शनिवार, 7 जुलाई 2018

सम्पादकीय

छालीवुड को चाहिए गुणवत्ता वाली फि़ल्में 
छत्तीसगढ़ी सिनेमा का इतिहास यूँ तो कई सालों से चला आ रहा है।बीते इन सालों में छालीवुड ने बहुत सी फि़ल्मे हमारे सामने रखी जिनमे बहुत सारी फि़ल्मो ने, कलाकारों ने अपना वजूद, अपना वर्चस्व स्थापित कर लिया और उन फि़ल्मो के गीत- संगीत आज भी हमें कर्णप्रिय लगते हैं।ऐसी फिल्मों को सभी पसंद करते थे गांव हो या शहर हर जगह उस फि़ल्म के गीत- संगीत सुनाई पड़ते थे। किन्तु आज के दौर में देखा जाए कुछ ही अच्छी फि़ल्मो को छोड़कर ऐसी फि़ल्मे बन रही है जो न कि पारिवारिक होती है, न ही सामाजिक, न ही ऐतेहासिक। छालीवुड सिनेमा अब तक अपना अस्तित्व पूरी तरह जनता के सामने नहीं बना पाई है। इसका कारण यही है की अच्छी व् गुणवत्ता की फि़ल्मे बन नहीं पा रही।यही वजह है कि आज छत्तीसगढ़ के लोग भी छत्तीसगढ़ी फि़ल्मे देखने बहुत कम ही जाते हैं।हम दूसरे राज्यों में देखते हैं की वहां की जनता क्षेत्रीय फिल्मों को पहले महत्व देती है और वहां का बच्चा-बच्चा भी क्षेत्रीय फिल्मों के कलाकारों और फिल्मों के बारे में जानकारी रखता है किन्तु छालीवुड में कुछ नामी लोगों को छोड़ दिया जाए तो यहाँ की फिल्मों के नाम तो बहुत दूर कोई कलाकारों को भी नहीं पहचान पाता।मैं यह मानती हूँ कि फि़ल्मो का निर्माण करना इतना आसान नहीं, बहुत मेहनत,बहुत पैसे और समय के साथ दिमागी मेहनत करने पर एक फि़ल्म का निर्माण होता है। फिर भी कई मुश्किलों का सामना निर्माता व् निर्देशक को करना पड़ता है।लेकिन इतनी मेहनत ,इतना समय अगर हम लगा ही रहे हैं तो एक अच्छी व् गुणवत्ता वाली फि़ल्मे समाज व् राज्य के सामने रखनी चाहिए।ऐसे फि़ल्म जो छालीवुड में एक नया इतिहास रच दे जिसे केवल छत्तीसगढ़ की जनता के साथ हर राज्य की जनता देखने के लिए उमड़ पड़े।और छालीवुड की चर्चा पूरे देश में हो।इसके लिए फि़ल्म बनाने से पहले यह सोचना होगा की हम किसके लिए फि़ल्मो का निर्माण कर रहे हैं, अपनी स्वार्थपरक दृष्टि को बदलकर हमें समाज के बारे में सोचना होगा, अपनी छत्तीसगढ़ महतारी के बारे में सोचना होगा, परिवार के बारे में सोचना होगा, हमारे छत्तीसगढ़ के गौरवपूर्ण इतिहास के बारे में सोचना होगा।तब जाकर हम अच्छी फि़ल्मे समाज,राज्य,परिवार के बीच रख पाएंगे और तब ये फि़ल्मे हमारे छालीवुड सिनेमा का गौरवगान करेगी।मेरी यही अपेक्षा लोगों से कि छत्तीसगढ़ की जनता को पारिवारिक फि़ल्मे दे,सामाजिक फिल्में दे,ऐतेहासिक फि़ल्मे दे जिससे छालीवुड सिनेमा हर छत्तीसगढ़ वासियों की लोकप्रिय बन सके और घर-घर में क्षेत्रीय सिनेमा का बोलबाला हो।
- श्रीमती केशर सोनकर 

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