मंगलवार, 6 जून 2017

फिल्म विकास बोर्ड पर क्या कहते है फिल्मकार

छत्तीसगढ़ के कलाकारों की बहुप्रतीक्षित मांग अब लगभग पूरी होने वाली है। छत्तीसगढ़ फिल्म विकास बोर्ड की ड्राफ्टिंग संस्कृति विभाग ने पूरी कर ली है। परामर्शदात्री समिति के सुझाव के बाद शासन को अनुमोदन के लिए भेजी जाएगी। संस्कृति विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अगले सप्ताह तक ड्राफ्ट शासन को भेज दिया जाएगा। शासन से अनुमोदन के बाद बोर्ड के रूप में उसके पंजीयन के लिए रजिस्ट्रार, फम्र्स एंड सोसाइटी में प्रक्रिया पूरी होगी। हालांकि इस प्रक्रिया के पहले सरकार द्वारा कुछ स्थायी सदस्यों (सरकारी पदों) का निर्धारण होगा। अभी तक इस ड्राफ्टिंग में कई बार फेरबदल हो चुुका है। संस्कृति विभाग ने कई राज्यों के फिल्म विकास निगम, विकास बोर्ड और इसी तरह की समकक्ष एजेंसियों के प्रारूप का अध्ययन किया। इसके बाद भी कई परिवर्तन की आवश्यकता महसूस की गई। अभी भी विधि संबंधी अभिमत के मुताबिक इसमें परिवर्तन की संभावना है। फिल्म विकास बोर्ड का गठन अब लगभग होने की कगार पर जरूर है, लेकिन तमाम प्रक्रियाओं को पूरी करने में लगभग छह माह का समय लग ही सकता है। इधर, कलाकारों के बीच में अभी से पद पाने के लिए जोर-आजमाइश शुरू हो गई है। कुछ खुलेआम पदों पर दावेदारी पेश कर रहे हैं, तो कुछ पर्दे के पीछे कवायद कर रहे हैं। इधर, अधिकारियों का कहना है कि प्रक्रिया में तेजी जरूर बरती जा रही
है, लेकिन विधि संबंधी अभिमत एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इससे छालीवुड से जुड़े फिल्मकारों को क्या फ़ायदा होगा। आईये हम आपको बताते हैं कुछ फिल्मकारों की राय.
परिचर्चा आयोजक - श्रीमती केशर सोनकर
------------------------------------------
छत्तीसगढ़ फि़ल्म विकास मंडल बनने के फायदे
राज्य में अगर फि़ल्म विकास बोर्ड का गठन होता है, तो इससे छत्तीसगढ़ी सिनेमा इंडस्ट्री को निश्चित रूप से लाभ होगा। कितना लाभ होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि प्रावधान और प्रक्रियाएं किस तरह की बनाई जाती हैं। निर्माता को लाभ देने के लिए तय किये जाने वाले मापदंड स्थानीय निर्माताओं के लिए कितने फेवरेबल हैं। मेरा मानना है कि फि़ल्म विकास बोर्ड अगर सही नीयत से काम करेगा, तो निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ी सिनेमा इंडस्ट्री प्रगति करेगी।
० विनोद डोंगरे, फि़ल्म समीक्षक
--------------------------------
बहुत से लाभ होंगे
सबसे पहले तो सरकार निगम बनाये और दूसरे राज्यो की तरह निर्माताओ को आगे बढऩे के लिए फिल्मे बनाने के लिए राशी उपलब्ध कराए कलाकारो के मानदेय की भी व्यवस्था करे टाकिजों का निर्माण करवाये। हा ये सही है निगम बनने के बाद बहुत से लाभ होंगे सभी लोग जो फिल्म से जुड़े है फायदा होगा ही ऐसा मेरा मानना है मैं आप को और सरकार को शुभ कामनाएं दे रहा हूं सरकार इस पुनीत कार्य को शीघ्र करे
0 सुनीलदत्त मिश्रा, कलाकार बिलासपुर
-----------------------------------
बिल्कुल फायदा होगा अगर....!
सरकार द्वारा जो बोर्ड के लिए सदस्य मनोनीत किये गयें हैं वो सभी सिर्फ और सिर्फ अपना फायदा ना देखते हुए सही मायनों में  सभी सदस्य फिल्म विकास बोर्ड के लिए एकजुटता दिखाएँ तो...।।नही तो ऐसा भी हो सकता है जैसा की होते आया है सभी सदस्य व्यक्तिगत अपना सम्बन्ध,  मंत्री या अध्यक्ष के समक्ष स्थापित करने के लिए अगर अंदर ग्राउंड की राजनीति करने लग जाएँ तो फिर जो छत्तीसगढ़ फिल्म विकास बोर्ड का रुपरेखा बनकर तैयार होगा उसे आप खुद ब खुद  देखना की क्या होता है ।।फिर भी अगर सूरज पूरब से ना निकलकर पश्चिम से निकल जाये और हमारे जो सभी सदस्य चुने गए हैं उनकी आपसी एकता और अखंडता कारगर हो जाये तो फिर जरूर एक नया मोड़ सामने आएगा और फिल्म विकास बोर्ड के बनने से हमे बहोत सारे सुविधावों का लाभ मिल सकता है
0 अशरफ अली अभिनेता
---------------------

सभी दिक्कतें जल्द ही दूर होंगी
छत्तीसगढ़ी फिल्मों के निर्माण, प्रदर्शन, तकनीकी व फाइनेंस संबंधी दिक्कतें जल्द ही दूर होंगी। बोर्ड के गठन के बाद यहां का फिल्म व्यवसाय व्यवस्थित हो जाएगा। अच्छी फिल्मों का निर्माण होगा जो यहां की संस्कृति और भाषा दोनों को संवर्धित करेंगी। राज्य बनने के बाद से प्रदेश में छत्तीसगढ़ी फिल्मों के निर्माण में तेजी आई है। अब तक तकरीबन 200 फिल्में प्रदर्शित हो चुकी हैें, जिनमें से काफी संख्या में हिट भी हुई हैं। सीमित संसाधन के बीच छत्तीसगढ़ी फिल्म व्यवसाय से जुड़े लोग लगातार फिल्में बना रहे हैं। स्थानीय भाषा में होने के कारण प्रदेश में ये फिल्में अच्छा व्यवसाय कर रही हैं। अब इन फिल्मों के निर्माण, प्रमोशन और प्रदर्शन में आने वाली समस्याएं फिल्म विकास बोर्ड के माध्यम से दूर होंगी।
0 अरुण बंछोर, फि़ल्म समीक्षक
------------------------

आम कलाकारों को नहीं होगा लाभ
फिल्म विकास निगम के गठन छत्तीसगढ़ी फिल्म के लिए अच्छी बात हो सकती है इससे निर्माता निर्दैशक को ही लाभ होगा आम कलाकारो को इससे कुछ लाभ होगा ऐसा मुझे नही लगता क्योकि छत्तीसगढ़ के भोले भाले और कम पढ़े लिखे लोक कलाकारो का सभी शोषण करते आ रहे है उन से मजदूरो सा व्यवहार होता आया है और होता रहेगा,इसलिए कलाकारो के लिए भी कोई ठोस कार्य योजना बनानी होगी ,
दिलीप ताम्रकार, कलाकार
------------------------

स्वागत हो परिणाम ना देखे
फिल्म विकास बोर्ड बनाने के निर्णय का स्वागत हो.कुछ ही सही कुछ तो होगा ये आशा पैदा होना ही चरितार्थ है.संजीवनी सा.
0 रजनीश झांझी, कलाकार
--------------------

निर्माताओं को मिलेगा लाभ
छत्तीसगढ़ फिल्म विकास बोर्ड बनाने से कम से कम छत्तीसगढ़ फिल्मो को फायदा होगा।फिल्मो को यहां अनिवार्य किया जा सकता है.निर्माताओं को आसानी से टाकीज मिलेगा और हम फिल्मो का अच्छा व्यवसाय कर सकेंगे।
आदित्य दीपक देवांगन निर्माता
---------------------

ये होगा फिल्म विकास निगम से फायदा
छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम के गठन के बाद छत्तीसगढ़ के फिल्म, थिएटर, लोककला, लोकरंग के कलाकारों को बेहतर मंच मिलेगा। यही नहीं, कलाकारों को होने वाली समस्याओं का निराकरण भी निगम के माध्यम से किया जाएगा। वर्तमान में छत्तीसगढ़ी फिल्में तो लगातार बन रही हैं, लेकिन उस प्रकार का आउटपुट प्राप्त नहीं हो रहा है, जैसा मिलना चाहिए। सिनेमाघर तो हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ी फिल्मों का प्रदर्शन नहीं हो रहा। यही नहीं, राज्य निर्माण के बाद भी अब तक दूरदर्शन में प्रादेशिक चैनल की शुरुआत नहीं हो पाई है। ऐसे में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम के गठन के बाद इन सभी दिशा में तेजी से कार्य किए जाएंगे।
0 अशोक तिवारी
-------------------

फिल्मो का स्तर बढ़ेगा
छत्तीसगढ़ फिल्म विकास बोर्ड बनाने से यहां की फिल्मो का स्तर बढ़ेगा और कलाकारों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।इससे छालीवुड का भविष्य उज्जवल होगा। सरकार के इस कदम का हम सराहना करते हैं.
यस त्रिवेदी

सभी प्रकार की भूमिका करना चाहूंगी

अपनी पहचान खुद बनाना चाहती है जयन्ती
मॉडलिंग से छालीवुड में कदम रखने वाली नायिका जयन्ती मनहर की तमन्ना सभी फिल्म इंडस्ट्री में काम करने और अपनी पहचान बनाने की है.साथ ही मौका मिले तो छोटे परदे पर भी काम करना चाहती है। जयन्ती
छालीवुड में सभी प्रकार की भूमिका निभाना चाहती है ताकि उन्हें कटु अनुभव हो जाए। वे कहती है कि छत्तीसगढ़ी फिल्मो में गुणवत्ता हो तो जरूर थियेटरों में चलेगी।जयन्ती की फिल्म बीए सेकण्ड ईयर अभी टाकीजों में चल रही है है.आशिक मयावाले बनकर तैयार है.होगा प्यार धीरे धीरे और धर्मयुद्ध में वे काम कर रही है. जयन्ती से हमने हर पहलुओं पर बात की।
0 आपको एक्टिंग का शौक कब से है ?
00 मुझे एक्टिंग का शौक बचपन से ही रहा है। स्कूल कॉलेजों में नाटकों में भाग लिया करती थी फिर मॉडलिंग करने लगी। जब जब टीवी देखता था तब तब मुझे लगता था कि मुझे भी कुछ बनना चाहिए ।
0 छालीवुड की क्या सम्भावनाये है?
00 बेहतर है। आने वाले समय में यहां की फिल्मे बॉलीवुड की तरह ही चलेंगी।यहां फिलहाल दर्शकों की कमी है। लोगो में अपनी भाषा के प्रति वो रूचि नहीं है जो होनी चाहिए । थियेटरों  की कमी को सरकार पूरा करे।

0 तो छालीवुड की फिल्मे दर्शकों को क्यों नहीं खीच पा रही है?
00 क्योकि यहां की फिल्मो में बहुत सारी कमियां होती है। फिल्मो में वो गुणवत्ता नहीं होती जो यहां के लोगो को चाहिए। प्रोड्यूसरों को इस और ध्यान देने की जरुरत है।
0 फिर मौका कैसे मिला और आपके प्रेरणाश्रोत कौन है ?
00 मेरा रोल मॉडल प्रियंका चोपड़ा है। कालेज के दिनों से ही मुझे फिल्मो का ऑफर मिलाने लगा था.
0 कभी आपने सोचा था की फिल्मो को ही अपना कॅरियर बनाएंगे ?
00 जी नहीं ! कालेज के समय में ऑफर मिला तो मेरा ध्यान सिर्फ पढ़ाई में था लेकिन फिल्मो में जब मेरे काम को पसंद किया जाने लगा तो मुझे लगा की इस क्षेत्र में कॅरियर बना सकती हूँ। अब मै एक्टिंग को कॅरियर बनाने की सोचकर चली हूँ। अब इसी लाईन पर काम करती  रहूंगी।
0  छालीवुड फिल्मो में आपको कैसी भूमिका पसंद है या आप कैसे रोल चाहेंगे।
00  मैं हर तरह की भूमिका निभाना चाहूंगी। लेकिन ऐसा रोल करना चाहूंगी जिसे दर्शक हमेशा याद रखे,और वो रोल मेरी पहचान बने.चाहे रोल छोटा हो या बढ़े.
0 सरकार से आपको क्या अपेक्षाएं हैं?
00 सरकार छालीवुड की मदद करे। टाकीज बनवाए, नियम बनाये। छत्तीसगढ़ी फिल्मो को सब्सिडी दें ताकि कलाकारों को भी अच्छी मेहनताना मिल सके।
0 आपका कोई सपना है जो आप पूरा होते देखना चाहती हैं?
00 छालीवुड में कुछ करके दिखाना चाहती हूँ। ऐसा प्रदर्शन करना चाहती हूँ जहां मेरी अलग पहचान बने.चाहे व: फिल्म हो या टीवी। लोगो के दिलो पर राज करना चाहती हूँ.

शनिवार, 13 मई 2017

फिल्म विकास निगम को लेकर राजनीति शुरू

छालीवुड स्टारडम का सम्पादकीय 
छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की घोषणा के 6 माह बाद भी जब कई पहल सरकार की ओर से नहीं हुई तब एक बार फिर छालीवुड के कलाकार मुखर हो गए हैं और फिर से संघर्ष करने की योजना पर काम कर रहे हैं। इसके साथ ही राजनीति भी शुरू हो गई है। यहां एक दो नहीं कई गुट है जो अपनी गोटी बैठाने की फिराक में है। मुख्यमंत्री को घोषणा से पहले शायद यह पता नहीं रहा होगा कि छालीवुड में इतनी मारामारी भी है। एक ओर संघर्ष के लिए बैठको का दौर शुरू हो गया है वही कुछ कलाकार इसे गलत कदम बता रहे हैं। एक कलाकार ने तो मुझे फोन करके यहां तक कह दिया कि सीएम पर यह गलत प्रहार है। एक बड़े कलाकार ने तो बाकायदा मुख्यमंत्री को पत्र लिखाकर फिल्म विकास निगम नहीं बनाने का अनुरोध तक किया है। छालीवुड में कई ऐसी भी हस्तियां है, जिन्होंने इस इंडस्ट्री को अपना सबकुछ दे दिया है। ऐसे लोग चुप बैठकर नजारा देख रहे है, पर दावेदारी नहीं जता रहे है। फिल्म विकास निगम के सही दावेदार यही लोग है, जैसे- श्री संतोष जैन, मोहन सुंदरानी, प्रेम चंद्राकर, सतीष जैन, अनुज शर्मा। निगम के लिए दावेदारी ऐसे लोग जता रहे है। जिन्होंने छालीवुड को कुछ भी नहीं दिया है। ऐसे लोगों की काबिलियत सबको पता है। फिल्मों में काम कर लेने से कोई योग्य नहीं हो जाता। सबसे मजेदार बात तो यह है कि निगम-मंडल का पद राजनीतिक होता है। सत्तारूढ़ दल के मुखिया पार्टी के निष्ठावान नेताओं को यह दायित्व सौंपता है। जो फिल्म विकास निगम मेें भी यही होगा। निगम की अभी सिर्फ घोषणा हुई है, गठन नहीं। इसके अस्तित्व में आते-आते चुनावी वर्ष आ जाएगा और चुनावी वर्ष में निगम-मंडल भंग कर दिए जाते है। खैर जो भी हो सरकार की ओर से पहल सकारात्मक है। इसे छालीवुड के लोग उत्साह से स्वीकारें। ताजुब तो तब हुआ जब एक ऐसे कलाकार ने सोशल मीडिया के जरिए निगम अध्यक्ष के लिए दावेदारी जता दी, जो काबिल तो कहीं से भी नहीं है। हां, पूरे समय विवादों में जरूर रहा है। योग्य लोग खामोश है। सीएम की इस घोषणा से ये जरूर साफ हो गया कि कौन लालची है ओर कौन सही में योग्य है।
छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम आखिर कब तक बनेगी, यह प्रश्न सभी कलाकारों के मन में है क्योकिं संस्कृति विभाग में निगम का तो बोर्ड लगा दिया गया है पर बजट में इसका कोई प्रावधान नहीं किया गया है। सरकार वर्षों से सिर्फ कलाकारों को दिलासा देती आ रही है। निगम का मसौदा कई साल पहले ही वरिष्ठ आईपीएस श्री राजीव श्रीवास्तव ने तैयार कर सरकार को दे दिया था, लेकिन आज तक वह आगे नहीं बढ़ पाया। सचिव संस्कृति विभाग आरसी सिन्हा  दिनों पहले ही कहा था कि छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम के गठन की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। अन्य राज्य के फिल्म विकास निगम के नियमों का अध्ययन किया जा रहा है। इनमें से जो बेहतर और छत्तीसगढ़ के लिए उपयोगी हैं, उन्हें इसमें शामिल किया जाएगा। चलो मान लेते है कि निगम बनाने की दिशा में सरकार ने कदम बढ़ा दी है, पर जब सरकार ने बजट ही नहीं दिया है तो आगे काम कैसे होगा। छत्तीसगढ़ के कलाकार लंबे अरसे से फिल्म विकास निगम के गठन की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कई बार धरना-प्रदर्शन तक किया। 18 सितंबर 2013 धरना-प्रदर्शन कर कलाकारों ने मुख्यमंत्री को इस संबंध में ज्ञापन भी सौंपा था। यही नहीं, विधानसभा चुनाव में राज्य की दोनों प्रमुख पार्टियों ने अपने घोषणापत्र में भी फिल्म विकास निगम के गठन की घोषणा की थी।पर लगता है यह टाँय टाँय फिस्स ही होगा। 

दीवाना छत्तीसगढिय़ा में दिखा भारती धुरी का जलवा


छालीवुड में सिंगर से फिल्मो में कदम रखने वाली भारती धुरी की तमन्ना एक अच्छी अदाकारा बनने की है। वे छालीवुड में सभी प्रकार की भूमिका निभाना चाहती है ताकि उन्हें हर प्रकार अनुभव हो जाए। वे कहती है कि छत्तीसगढ़ी फिल्मो में गुणवत्ता हो तो जरूर थियेटरों में चलेगी। भारती कहती है कि सरकार छालीवुड की मदद करे। टाकीज बनवाए, नियम बनाये। छत्तीसगढ़ी फिल्मो को सब्सिडी दें ताकि कलाकारों को भी अच्छी मेहनताना मिल सके।अभी हाल ही में प्रदर्शित फिल्म दीवाना छत्तीसगढिय़ा में भारती धुरी का जलवा देखने को मिल रहा है। भारती जितनी अच्छी कलाकार है उतनी ही सुन्दर भी है।  बिलासपुर की रहने वाली भारती धुरी कहती है कि मुझे एक्टिंग का शौक बचपन से ही रहा है। गाने गाते गाते एक्टिंग करने लगी। पहले एल्बम की फिर मुझे असली संगवारी में काम करने का मौका मिला और आज आपके सामने हूँ। वे कहती है कि आने वाले समय में यहां की फिल्मे बॉलीवुड की तरह ही चलेंगी।यहां फिलहाल दर्शकों की कमी है। लोगो में अपनी भाषा के प्रति वो रूचि नहीं है जो होनी चाहिए । थियेटरों  की कमी को सरकार पूरा करे। उनका कहना है कि यहां की फिल्मो में बहुत सारी कमियां होती है। फिल्मो में वो गुणवत्ता नहीं होती जो यहां के लोगो को चाहिए। प्रोड्यूसरों को इस और ध्यान देने की जरुरत है। भारती धुरी कहती है कि मैं हर तरह की भूमिका निभाना चाहूंगी। क्योकिं छालीवुड में कुछ करके दिखाना चाहती हूँ। लोग मुझे एक अच्छी अभिनेत्री के रूप में जाने पहचाने बस यही तमन्ना है। भारती को अपने परिवार से वि सहयोग नहीं मिला है जो एक लडक़ी को मिलना चाहिए। अब कला ही उनकी जिंदगी है और जीवन यापन का साधन भी। उनके पति भी एक अच्छे कलाकार हैं। 

नैनी की मोंगरा में शानदार एंट्री

कवियित्री से फिल्मों का सफर  
किसी एक इंसान में बहुत सारे गुण हो ऐसे बिरले लोग ही मिलते हैं। जी हाँ यही गुण है नंदिनी तिवारी नैनी में। वे एक शिक्षिका होने के साथ साथ कवयित्री, लेखिका, एक्ट्रेस, एंकर और डांस कोरियोग्राफर भी है। नैनी की तमन्ना फिल्मो में धूम मचाने की है। उनकी फिल्म मोंगरा में धमाकेदार एंट्री हुई है। ईएसके पहले नैनी एजाज वारसी की ड्रीम प्रोजेक्ट अंधियार में भूमिका निभा चुकी है। अब वे फिल्मों में किस्मत आजमा रही है। मुंगेली की रहने वाली नैनी अभी केन्द्रीय विद्यालय नवरंगपुर ओडिशा में शिक्षिका के पद पर कार्यरत है। नंदिनी तिवारी नैनी  का मेरा जन्म एक साहित्यकार परिवार में हुआ। जो लेखन के लिए प्रेरक रही एवं आसपास के कुदरती वातावरण उनके भीतर कविता का सृजन करते हैं ।वे कहती है कि पारिवारिक माहौल के साथ मेरी भावनाओं ने मेरी गीत-गज़़लों को अल्फ़ाज़ दिए। अब फिल्मो में कूद पडी है। उनकी दिली तमन्ना छालीवुड फिल्मो में काम करते रहने की है।
--------------------------------------------
संक्षिप्त परिचय 





नाम   - नंदिनी तिवारी नैनी
शिक्षा    एम•ए(हिन्दी), बी•एड•,पीएचडी(हिंदी)
व्यवसाय   - शिक्षिका, कवयित्री, लेखिका, ऐक्ट्रेस, एंकर
रुचि  - सिंगिंग, डांसिंग, रीडिंग लिट्रेचर बुक
उपलब्धि  -  सद्भावना साहित्य संस्थान द्वारा सम्मानित
                     डायट ओडिशा द्वारा सम्मानित
हिंदी विषय पर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तरीय सेमीनार में व्याख्यान ।
----------------------------------------------------
बेटियों को लेकर बेहतरीन सन्देश है मोगरा
लेखक निर्देशक निर्माता सोहन लाल वर्मा की फिल्म मोगरा देश के प्रमुख 10 भाषाओं में एक साथ रिलीज होगी। यह फिल्म अभी छत्तीसगढ़ी भाषा में शूट की गयी है। फिल्म की कहानी नारी प्रधान है जिसमे बेटी बचाने का बेहतरीन सन्देश दिया जा रहा है। निर्माता के सोच को सलाम किया जा सकता है। निर्माता सोहन लाल वर्मा ने बताया कि फि़ल्म मोंगरा की लगभग पूरी शूटिंग हो गयी है। इस फि़ल्म में एजाज वारसी सउदी अरब के मुश्लिम की भूमिका में रहेंगे। फि़ल्म के गाने बेहद कर्ण प्रिय बनाये गए है।जिसे सन्तोष यादव ने संगीतबद्द किया जो पांच साल मुंबई में रह चुके है आज देशभर में उनका हिंदी आर्केस्ट्रा चलता है।गायिका छाया प्रकाश जैन जाना पहचाना नाम है। वही नेहा तिवारी ने आइटम सांग गाया । पवन शर्मा ने साई भजन गीत गाया इस फि़ल्म में आठ अलग अलग प्रकार के गाने है जिसे बाजारवाद को ध्यान में रखकर बनाया गया है ,जिसे देश के प्रमुख 10 भाषओं में एक साथ रिलीज करेंगे।फि़ल्म को राष्ट्रिय लेबल के मार्केट  को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है जिसका विजुवल इफेक्ट देखते बनता है खासकर फाइट शीन में आपको दक्षिण भारतीय तडक़ा नजर आयेगा। फि़ल्म के हीरो दीपक सोनी, हीरोइन अंजना दास , माँ की भूमिका में है श्वेता शर्मा ,खलनायक एजाज वारसी व् विजय भैमिक पवन शर्मा । लेखक निर्देशक निर्माता सोहन लाल वर्मा, मोंगरा फि़ल्म का अगला शेड्यूल 25 मई से लगाने की तैयारी है। 

नए रूप में दिखाई दे रहे हैं राजेश पण्डया

काम करता हूं ,फल की चिंता नहीं करता
छालीवुड अभिनेता राजेश पण्डया आज किसी परिचय के मोहताज नहीं है. लेकिन इन दिनों वे नए रूप में दिखाई दे रहे हैं । उन्हें कैमरे के साथ खेलते  सकता है। उनके एल्बम छत्तीसगढ़ के गांव गांव और हर घरों में देखे सुने जाते हैं। सहज सरल राजेश की दिली तमन्ना है की लोग उन्हें एक अच्छे कलाकार के रूप में ही जाने पहचाने7 कई फिल्मों व एल्बमों में अपनी कला का जादू बिखेर चुके राजेश का कहना कि एक कलाकार कभी भी अपने कामो से संतुष्ट नहीं हो सकता। मुझे अभी बहुत कुछ करना है बहुत कुछ सीखना है। मै काम करता हूं ,फल की चिंता नहीं करता7 वे कहतें हैं कि छत्तीसगढ़ फिल्मों को थियेटरों की कमी से जूझना पड़ रहा है अगर सरकार सहूलियत दे और कारपोरेट सेक्टर प्रदेश में सौ-डेढ़ सौ नए सिनेमाघर बना दे तो छत्तीसगढ़ी फिल्मों का रंग ही बदल जायेगा।
वे कहते हैं की छतीसगढ़ी फिल्में इस कारण थियेटर में ज्यादा नहीं चल पाती क्योंकि आज के बच्चे बॉलिवुड फिल्म को ज्यादा महत्व देते हैं। दूसरी तरफ जो गाँव के लोग है वो छतीसगढ़ी फिल्म को बड़े ही चाव से देखते है और महत्व भी देते है। लेकिन हम उन तक नहीं पंहुच पाते। राजेश का कहना है कि मैंने पूरी ईमानदारी से अपने किरदार के साथ न्याय किया है। जब मै भूमिका में होता हूं तो अपने किरदार में पूरी तरह से डूब जाता हूं । बचपन से ही उन्हें एक्टिंग का शौक रहा है। स्कूल कालेज के समय से ही ड्रामा और डांस करते आ रहा है फिर एल्बम करने लगा. जिसमे उसे लोगो ने बहुत सराहा वही उनका सबसे बड़ा तोहफा भी है। एलबम का उन्हें सुपरस्टार भी कहा जा सकता है। राजेश का कहना है की वे कभी निराश नहीं होते और ना कभी निराशा मिली है।एक कलाकार कभी भी अपने कामो से संतुष्ट नहीं हो सकता। मुझे अभी बहुत कुछ करना है बहुत कुछ सीखना है।छत्तीसगढ़ी सिनेमा में शौकिया तौर पर फिल्म बनाने वाले लोग बड़ी संख्या में आ रहे है। कई भाषाओं में क्षेत्रीय फिल्म निर्माण से छत्तीसगढ़ी फिल्मों की आउट सोर्सिंग हुई है भोजपुरी, और उडिय़ा से नया बाजार मिला है इसी तरह और भी तरीके ईजाद करने से इंडस्ट्रीज के
सभी लोगों का भला होगा। यहां कलाकारों की कतई कमी नहीं है।
छत्तीसगढ़ फिल्मों को थियेटरों की कमी से जूझना पड़ रहा है अगर सरकार सहूलियत दे और कारपोरेट सेक्टर प्रदेश में सौ-डेढ़ सौ नए सिनेमाघर बना दे तो छत्तीसगढ़ी फिल्मों का रंग ही बदल जायेगा। उद्योगों की तरह रियायती दर में जमीन और उस पर कामर्शियल काम्प्लेक्स के निर्माण की अनुमति से नहीं कंपनियां सिनेमाघरों के निर्माण के लिए आकर्षित हो सकती है। राजेश की तमन्ना छालीवुड की फिल्मों में छा जाना की है।  उनका  सपना छालीवुड की सबसे अच्छे स्टार बनने की ही है।लोग मुझे छालीवुड स्टार के नाम से ही जाने।वे कहते है की हर प्रकार की भूमिका पसंद है। अब तक सभी रोल कर चुका हूँ , नायक ,खलनायक सह अभिनेता की भूमिका सब कुछ कर चुका हूँ।

उभरती अदाकारा अंजना दास

बिन बिहाव गवना में दोहरी भूमिका में दिखेंगी 
छॉलीवुड की उभरती अदाकारा अंजना दास होम प्रोडक्शन की फिल्म बिन बिहाव गवना में दोहरी भूमिका में नजर आएंगी । यह फिल्म अगले महीने फरवरी में रिलीज होने जा रही है। इस फिल्म की डायरेक्टर उनकी मम्मी ही है। अंजना कहती है की यह फिल्म बहुत ही अच्छी बनी है और मुझे इस फिल्म से बहुत ज्यादा उम्मीदें है। यह दो बहनों की कहानी है और दोनों बहनों की भूमिका में अंजना दास ही नजर आएंगी। अंजना ने इस फिल्म के लिए बहित ही मेहनत की है। उनके मम्मी पापा ने बेटी को लेकर बिन बिहाव गौना बनाई है जो एक पारिवारिक फिल्म है जिसमे अंजना की भूमिका भी प्रभावशाली है।


अंजना की एक ही तमन्ना है कि वे फिल्मों में अपनी अदाकारी से नाम कमाकर अपनी माता पिता का सपना पूरी कर सके. उनमे खूबियों का खजाना है। वे एक अच्छी कलाकार है ।  उन्हें अपने काम के प्रति जूनून है। उनका कहना है कि वे छालीवुड की फिल्मों में छा जाना चाहती हैं । उनका सपना छालीवुड के साथ बंगाली फिल्मों की स्टार बनने की है।  छत्तीसगढ़ी फिल्मों के साथ साथ अंजना अभी हिन्दी और भोजपुरी फिल्मों में भी अपनी कला का लोहा मनवा रही हैं। उन्होंने पांच फिल्में और 150 से ज्यादा एल्बम किया है।
अंजना को एक्टिंग का शौक नहीं था, पर मम्मी डॉ काजुल् दास की जिद्द और मेहनत ने उसे छालीवुड की एक अच्छी अदाकारा बना दी है7 मम्मी -पापा ही अंजना के लिए सब कुछ है यही कारण है कि अब अंजना के लिए एक्टिंग शौक नहीं , पागलपन बन गया है। वे कहती है कि़ शौक तो ख़त्म हो जाता है पर पागंलपन हमेशा बना रहता है। ये मेरा जूनून है जो कभी ख़त्म नहीं होगा। अब यही उनका करियर है।
अंजना छालीवुड की फिल्मों के साथ साथ बंगाली फिल्मों में भी छा जाना चाहती है। उनका सपना बंगाली की  सुपरस्टार बनने ने की ही है। लोग मुझे बंगाली फिल्मों कीश्रेष्ठ स्टार के रूप में जाने यही उनकी ख्वाहिश है7 अंजना की अभी दो फिल्में बंध गईल पिरितिया के डोर (भोजपुरी) और मोगरा (छत्तीसगढ़ी) निर्माणाधीन है7 अंजना की फिल्मों में एंट्री भी दिलचस्प है7 मनोजदीप के एक एल्बम में उनकी एक्टिंग से प्रभावित होकर फिल्म असली संगवारी के डायरेक्टर ने उन्हें अपने फिल्म में ले लिया7 अंजना की माने तो यहां फिल्मे कमजोर बन रही है और  की नकल होती है। फिल्मे नहीं चल पाती इसकी वजह भी हैं और वो सब जानते हैं कि पिछड़े हुए राज्य में टॉकीजों का विकास नहीं होना। छत्तीसगढ़ में मिनी सिनेमाघर दो सौ दर्शकों की क्षमता वाली टॉकिजों की बड़ी आवश्यकता है जहां छत्तीगसढ़ी फिल्मों के दर्शक आसानी से पहुंच सके। पात्र के हिसाब से कलाकारों का चयन नहीं होता। कुछ लोग इस इंडस्ट्री को खराब कर रहे हैं , वे ऐसे लोग है जो काम लागत में कुछ भी फिल्में बना लेते हैं।