शुक्रवार, 12 मई 2017

जादूगर बने डॉ अजय सहाय

पांच भाषाओं में अभिनय करना भी एक रिकार्ड है
सुपर स्पेशिलिटी हास्पीटल चलाने वाले डॉ. अजय सहाय अब जादूगर बन गए हैं। चौकिये नहीं यह सच है। डॉ सहाय ने फिल्म दीवाना छत्तीसगढिय़ा में जादूगर की भूमिका निभाये है और और दर्शकों को खूब हंसाते हुए नजर आयेंगे। बिलासपुर के समाजसेवक जेठू राम साहू ने कलाकारों को मंच देने के लिए फिल्म दीवाना छत्तीसगढिय़ा बनाई है। इस फिल्म में डॉ सहाय नए रूप में दिखेंगे। उनमे गजब की प्रतिभा है। नायक ,खलनायक ,लेखक ,निर्देशक साहित्यकार, कवि, रंगकर्मी, पटकथा जैसे अनेक कला किसी एक व्यक्ति में हो ऐसे बिरले ही होते है और यह सब कला है डॉ अजय सहाय में। छत्तीसगढ़ी फिल्मो का वे एक आधार स्तम्भ है। उन्होंने एक नहीं कई भाषाओं की फिल्मो में अभिनय कर सबके सामने एक चुनौती पेश की है। पांच भाषाओं में अभिनय करना भी उनका एक रिकार्ड है। जितने अच्छे वे मधुमेह व् हृदयरोग विशेषज्ञ है उतने ही बेहतर कलाकार है।
डॉ सहाय को कला विरासत में मिली है। माँ से कला मिली है तो पिता से शिक्षा। छालीवुड में डॉ सहाय एक ऐसे नायक खलनायक लेखक ,निर्देशक है जिन्होंने फिल्म उद्योग पर हर भूमिका में एकछत्र राज कर रहे हैं और अपने अभिनय का लोहा मनवाया है। उनके स्वाभाविक अभिनय और प्रतिभा की पराकाष्ठा ही थी कि लोगों के बीच वे काफी लोकप्रिय हैं। उन्होंने जितने भी फिल्मों में रोल किया उसे देखकर ऐसा लगता है कि उनके द्वारा अभिनीत पात्रों का किरदार केवल वे ही निभा सकते थे। उनकी अभिनीत भूमिकाओं की यह विशेषता रही है कि उन्होंने जितनी भी फिल्मों मे अभिनय किया उनमें हर पात्र को एक अलग अंदाज में दर्शकों के सामने पेश किया। रूपहले पर्दे पर डॉ सहाय ने जितने रोल किए उनमें वह हर बार नए तरीके से संवाद बोलते नजर आए। अभिनय करते समय वे उस रोल में पूरी तरह डूब जाते हैं। परिवर्तन धारावाहिक में स्थानीय कलाकारों को लेना वे अपनी सबसे बड़ी उपलब्धी मानते है। समय की कदर नहीं करने वालों से डॉ सहाय काफी निराश होते हैं। वे कहते है कि जूनून से अच्छी फिल्म नहीं बनती। कहानी, संवाद,  निर्देशन, सब कुछ फिल्मो में होनी चाहिए। पैसों से ज्यादा समय की कीमत होती है। कई बार उनके साथ ऐसा हुआ है कि निर्माता निर्देशक उन्हें शूटिंग पर बुलाकर घंटों लेट आये हैं। ऐसे लोगो के लिए उनका एक ही सन्देश है समय की कदर करो। 

फिल्म को ही अब कॅरियर बनाएंगी प्रीति

छालीवुड में शोहरत मिले यही तमन्ना है 
छत्तीसगढ़ी फिल्म दीवाना छत्तीसगढिय़ा की नायिका प्रीति शर्मा कहती है की एक्टिंग मेरा शौक है और चाहत भी, फिल्म को ही अपना कैरियर बनाउंगी। जब इंडस्ट्री में आ ही गयी हूँ तो पीछे नहीं हटूंगी। इस फिल्म में छत्तीसगढ़ के कई बड़े कलाकारों ने भी काम किया है। उनका कहना है कि मुझे हर तरह के रोल करने की इच्छा है डेव्यु फिल्म में नायिका हूँ ,और अपनी भूमिका के साथ बहुत ही मेहनत की है।
वे कहती हैं कि दीवाना छत्तीसगढिय़ा मेरी पहली फिल्म है इसमें मुझे नायिका का रोल दिया गया है। डेब्यू फिल्म से मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला है। मैंने एक आधुनिक लड़की का किरदार निभाया है। इस फिल्म में बहुत मेहनत करनी पडी है। फिल्म दीवाना छत्तीसगढिय़ा में सन्देश भी है तो कामेडी भी है जो दर्शकों को पसंद आएगा। इसमें सब कुछ है आप अपने जिंदगी को कैसे जी सकते है इस फिल्म में बेहतर तरीके से बताया गया है। इस फिल्म को लेकर हम आश्वस्त हैं। प्रीति का कहना है कि पहली बार कैमरे के सामने आने पर बिलकुल भी डर नहीं लगा। हम सब ने इसमें एक साथ कैमरे का सामना किया है। इस फिल्म से हमें उम्मीद है कि और बॉलीवुड की अन्य फिल्मो की तरह ही चलेंगी। इसमें सब कुछ है। आप देखिये ,हमें तो पूरी उम्मीद है।

वे कहती हैं कि मुझे एक्टिंग का शौक बचपन से ही रहा है। स्कूल में भी एक्टिंग किया करती थी। कई नाटकों में भाग लिया था। वैसे अभी तक मेरा रुझान माडलिंग की तरफ ही रहा है। एक्टिंग मैंने खुद से सीखा है । मेरा कोई रोल मॉडल नहीं है। मेरे परिवार का बहुत ही सहयोग मिलता है और मेरे प्रेरणास्रोत भी मेरे परिवार ही हैं। मेरे लगन को देखकर मेरे माता-पिता ने मुझे फिल्म करने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके ही कारण मैं फिल्म में अच्छे से रोल कर पाई हूँ। प्रीति बताती है कि उनका रुझान माडलिंग की ऑर ही था। एक्टिंग करने की नहीं सोची थी । अब फिल्मो में काम करती रहूंगी, पीछे नहीं हटूंगी। प्रीत्ति का तमन्ना छालीवुड में खूब नाम और शोहरत कमाने की है । वे चाहती है कि फिल्म दीवाना छत्तीसगढिय़ा खूब चले जनता मेरी एक्टिंग को सराहे। प्रीति के जीवन में कभी निराशा नहीं है । पर फिल्म में काम करने से मुझे बहुत खुशी हुई है क्योकि इससे मेरे जीवन में एक नया मोड़ आया है।

दर्शकों को भाएगी दीवाना छत्तीसगढिय़ा

0 दिखेंगी सलीम एलीना की जोड़ी 
0 प्रीति शर्मा की डेव्यू फिल्म 
छालीवुड की बहुचर्चित फिल्म दीवाना छत्तीसगढिय़ा भी शीघ्र ही प्रदर्शित होने जा रही है। कई मायनों में यह फिल्म छालीवुड के लिए एक मिसाल बनेगी। पहली बात तो यह कि इसी फिल्म से ही प्रीति शर्मा डेव्यू कर रही है और दूसरी बड़ी बात यह है कि डायरेक्टर सलीम खान जो एक अच्छे एक्टर भी हैं ठुमके लगाते हुए दिखेंगे। वे एलीना डेविड मसीह के साथ एक गाने में नजर आएंगे। वैसे सलीम खान जितने अच्छे कलाकार हैं उतने ही अच्छे निर्देशक भी है। इस फिल्म में कई जाने पहचाने चेहरें है जो दर्शकों को बोर नहीं होने देंगे। उपासना वैष्णव , सचिन शर्मा , डॉ अजय सहाय , उषा विश्वकर्मा जैसे कलाकारो ने अभिनय किया है। जे पी विश्वकर्मा की कहानी पर श्री जेठू साहू ने एक शानदार मनोरंजक फिल्म का निर्माण किया है जो दर्शकों को पसंद आएगी। केशव - प्रीति शर्मा की जोड़ी के साथ साथ एलीना और सलीम खान की जोड़ी भी दर्शकों को आकर्षित करेंगी। डॉ अजय सहाय एक जागूगर की भूमिका में है। इस फिल्म के निर्माता जेठू साहू ने राष्ट्रीय हिंदी मेल के दफ्तर में चर्चा के दौरान बताया कि दीवाना छत्तीसगढिय़ा में वह सब कुछ दिखाना चाहा है जो दर्शकों को पसंद है। कॉमेडी भी है, शानदार गीत है, एक्शन भी है, ठुमके भी है अच्छी कहानी है तो अच्छे संवाद भी है। श्री साहू ने बताया कि कलाकारों को मंच प्रदान करने के लिए ही इस फिल्म का निर्माण किया है आगे भी कलाकारों के लिए फिल्म बनाएंगे।
निर्देशक सलीम खान का कहना है कि हमारी योजना फिल्म को दिसंबर में रिलीज करने की है। उसी के हिसाब से तैयारी में हम लगे हुए हैं। निर्माता जेठू साहू ने कलाकारों को मंच प्रदान करने के लिए ही इस फिल्म का निर्माण किया है। वे एक ऐसे समाजसेवी है जिनका अपना नाम है। खासकर लड़कियों के विवाह के लिए निशुल्क अपने फार्म हाउस को देते है साथ ही 3100 रुपये भेंट भी देते हैं। आज के जमाने में ऐसे शख्स बिरले ही मिलते हैं। इस फिल्म में कई बड़े कलाकार भी हैं जिसे दर्शक देखना पसंद करेंगे। जिसमे सलीम खान ,उपासना वैष्णव, उषा विश्वकर्मा, डॉ.अजय सहाय नामी कलाकार हैं। नायिका प्रीति शर्मा की यह डेब्यू फिल्म है। जे पी विश्वकर्मा के लिखे गीत गुनगुनाने लायक है वही जेठू साहू, छाया प्रकाश, संतोष यादव की आवाज भी मधुर है। फिल्म का डांस पक्ष जरुर कमजोर हो सकता है। छायांकन शानदार है तो और संगीत कर्णप्रिय है। फिल्म में एलीना डेविड मसीह और सलीम खान पर फिल्माए गए गीत दर्शकों को आकर्षित करेंगे, ऐसी उम्मीद है। डायरेक्टर सलीम खान का कहना है कि यह एक पारिवारिक फिल्म है जिसमे सभी कलाकारों ने काफी मेहनत की है जिसके चलते फिल्म अच्छी बनी है और हमें खासकर मुझे इस फिल्म से बहुत ही उम्मीद है। 

फिल्म विकास निगम और राजनीति

-  अरुण कुमार बंछोर 
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह ने राज्य में फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने के लिए फिल्म विकास निगम जल्द बनाने की घोषणा की और शासन स्तर पर इस पर काम भी शुरू हो गया है। लेकिन शायद कलाकारों को नहीं मालूम की कुछ लोग फिल्म विकास निगम नहीं बनना देना चाहते। खबर मिली है कि कुछ बड़े कलाकारों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर निगम नहीं बनाने की अपील की है। इससे निगम के गठन में विलम्ब हो सकता है। ये राजनीति जऱा समझ से पर हैं। जबकि मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ी फिल्मों की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा था कि सन 1965 में मनु नायक द्वारा निर्मित पहली छत्तीसगढ़ी फिल्म 'कहि देबे संदेस' से लेकर अब तक लगभग डेढ़ सौ फिल्में यहां बन चुकी हैं। भले ही ये फिल्में आर्थिक रूप से अपेक्षाकृत उतनी कामयाब न हो पायी हो, लेकिन इसके बावजूद हमारे यहां के फिल्म निर्माताओं और कलाकारों ने प्रदेश की कला और संस्कृति के प्रति पागलपन की हद तक अपना समर्पण भाव दिखाया है और इस दिशा में लगातार सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के फिल्म कलाकार पैसों के लिए काम नहीं करते। वे अपनी कला साधना के लिए समर्पित रहते हैं। उनका यह जुनून सचमुच अदभुत है। प्रदेश में छत्तीसगढ़ी सिनेमा उद्योग को बढ़ावा देने, यहां के प्रतिभावान कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य में जल्द से जल्द फिल्म विकास निगम का गठन किया जाएगा, जिसकी मांग हमारे फिल्मकार और कलाकार काफी समय से करते आ रहे हैं। जब मुख्यमंत्री तैयार हैं तो अब निगम के गठन में रुकावट क्यों?
निगम बनने से छत्तीसगढ़ी फिल्मों के निर्माण, प्रदर्शन, तकनीकी व फाइनेंस संबंधी दिक्कतें जल्द ही दूर होंगी। यहां का फिल्म व्यवसाय व्यवस्थित हो जाएगा। अच्छी फिल्मों का निर्माण होगा जो यहां की संस्कृति और भाषा दोनों को संवर्धित करेंगी।राज्य बनने के बाद से प्रदेश में छत्तीसगढ़ी फिल्मों के निर्माण में तेजी आई है। अब तक तकरीबन 200 फिल्में प्रदर्शित हो चुकी हैें, जिनमें से काफी संख्या में हिट भी हुई हैं। सीमित संसाधन के बीच छत्तीसगढ़ी फिल्म व्यवसाय से जुड़े लोग लगातार फिल्में बना रहे हैं। स्थानीय भाषा में होने के कारण प्रदेश में ये फिल्में अच्छा व्यवसाय कर रही हैं। अब इन फिल्मों के निर्माण, प्रमोशन और प्रदर्शन में आने वाली समस्याएं फिल्म विकास निगम के माध्यम से दूर होंगी।2013 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने एजेंडे में फिल्म विकास निगम के गठन को शामिल किया था।
ये कमियां होंगी दूर
1. फिल्मों का प्रदर्शन के लिए थियेटरों की कमी
2. फिल्म सिटी बनने का रास्ता होगा साफ
3. अच्छे स्टूडियो की कमी होगी दूर
4. फिल्म अकादमी और ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खुलेंगे
5. तकनीकी और आर्थिक सहयोग मिलेगा

रविवार, 13 नवंबर 2016

छत्तीसगढ़ी कल्चर की श्रीलंका में प्रचार कर रही है अंजली मिश्रा

होली और करमा कोलम्बो विवि के पाठ्यक्रम में शामिल 
- अरुण बंछोर
छत्तीसगढ़ की अंजली मिश्रा श्रीलंका में अपनी कल्चर की बड़े पैमाने पर प्रचार प्रसार कर रही है। श्रीलंका की राजधानी कोलम्बो के विजुवल एंड परफार्मिंग विश्वविद्यालय में वे इस समय भारत और एशिया डांस विभाग की प्रमुख है। उन्होंने होली और करमा नृत्य को अपने पाठ्यक्रम में शामिल किया है। जो फोक डांस के अंतर्गत आता है। इस संस्थान में एक विषय भारतीय लोक नृत्य भी है। अंजली का कहना है कि उनकी तमन्ना छत्तीसगढ़ी नृत्य को श्रीलका में प्रचारित करना और यहाँ के कलाकारों को श्रीलंका बुलाकर लाईव परफार्मेंस कराना है। अंजली में कत्थक नृत्य की शिक्षा खैरागढ़ विश्वविद्यालय से हासिल की है। और कत्थक में ही पी एच डी बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से प्राप्त की है। सन 2007 में श्रीलंका विश्वविद्यालय से उन्हें आफर मिला और वे वहां जा पंहुंची। इसके पहले अंजली छत्तीसगढ़ में थियेटर से जुडी रही है और कई नाटकों का मंचन भी किया है। वे एक फिल्म बनाने के सिलसिले में रायपुर आई हुई हैहमने उनसे हर पहलुओं पर बात की है।
अंजली बताती है कि मैंने भारतीय संस्कृति का प्रचार प्रसार करना शुरू किया है लेकिन विभागीय प्रमुख होंने के कारण त्यौहारों के बारे में बच्चों को विस्तार से बताना शुरू किया है और पर्वों को मनाना भी शुरू किया है। शिव मंदिर में बाकायदा धार्मिक पर्व मनाते हैं। अंजली ने आठ साल की उम्र में पहला नाटक अपने स्कूल में किया और पुरस्कार जीती तब उनके माता पिटा को उनकी काबिलियत का पता चला। उसके बाद अंजली ने नाटक और नृत्य में भाग लेना शुरू किया फिर पलटकर नहीं देखा। 16 साल की उम्र में पंडित बर्मन लाल रायगढ़ घराना से कत्थक नृत्य की शुरुआत की।  पर पीएचडी करते ही श्रीलंका सरकार से उन्हें आफर मिला और वे वहां चली गयी। अंजली ने बताया कि छत्तीसगढ़ की परम्परा और यहाँ की नृत्य की जानकारी पहली बार उन्होंने ही शुरू की। और आज वहां सिलेबस में शामिल है। अंजली की दिली तमन्ना है कि छत्तीसगढ़ी नृत्य को श्रीलका में प्रचारित करना और यहाँ के कलाकारों को श्रीलंका बुलाकर लाईव परफार्मेंस कराना है।ताकि वहां के छात्र हमारी परम्परा व् नृत्य को करीब से देख सके। उनके पति श्रीलंका में ही गाना विभाग में लेक्चरार है और फेमस सिंगर भी है। अंजली मिश्रा श्रीलंका के थियेटर में भी काम कर चुकी है। हर वर्ष भारत के बड़े गुरुओं को बुलाकर श्रीलंका में वर्कशाप करवाती है अंजली ताकि बच्चे भारतीय संस्कृति से भली भाँती परिचित हो सके। 

शनिवार, 3 सितंबर 2016

" चमके रे बिंदिया " से चमकी अल्का चंद्राकार

सरकार कलाकारों के लिए आगे आएं 
- श्वेता शर्मा
छत्तीसगढ़ की मशहूर पार्श्वगायिका अलका परगनिहा (चंद्राकर) आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। वे छत्तीसगढ़ी लोकगीतों , लोककला की आदर्श है।उनकी आवाज में गजब की जादू है। जब वे गाती हैं तो लोग अपना दर्द भूल जातें है। वे कहती हैं कि अपने पिता जी को सुनकर संगीत को महसूस करना सीखा है. वे
चाहती हैं कि वही एहसास अपनी गायकी मे डालें और अपने सुनने वालों को सुकुन का एहसास कराये। संगीत उन्हें अपनी परिवार से विरासत में मिली है। छालीवुड की बेस्ट सिंगर का एवार्ड कई बार हासिल कर चुकी अल्का चंद्राकार संगीत के हर अंदाज़ को जीना चाहती है और कुछ नया करना चाहती है।उनकी खुद की एल्बम " चमके रे बिंदिया " ने ना केवल प्रदेश और भाषा को नई दिशा दी बल्कि उनकी जीवन में भी नई चमक ला दी। यहीं से उन्हें ऊंचाईयां मिली और आज वे एक मशहूर गायिका है।वे अपने पिताजी के लोककला मंच फुलवारी को लेकर आगे बढ़ रही हैं। उनका मानना है कि छत्तीसगढ़ी फिल्मो में तकनीक की कमी होती है और सरकार भी लोककला के प्रति रूचि नहीं दिखा रही है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ी फ़िल्में दर्शकों को नहीं रिझा पा रही है। 100 से अधिक एल्बम औरफिल्मों मे अपनी आवाज का जादू बिखेर चुकी अल्का चंद्राकार से हमने हर पहलुओं पे बेबाक बात की है।
० आपको गाने का शौक कैसे हुई?
०० मेरे पिताजी श्री माधव चन्द्राकर  गायक हैं कला मुझे विरासत में उन्ही से मिली है। उन्होने मुझे बचपन से ही सिखाना शुरू कर दिया था।
० किसी ने आपको प्रोत्साहित किया या फिर मर्जी से गाने लगी?
०० मेरे पिताजी ही मेरे पहले गुरू हैं और मेरे प्रेरणाश्रोत भी।
०सरकार से आपको क्या अपेक्षाएं हैं?
०० सरकार छालीवुड की मदद करे। टाकीज बनवाए, नियम बनाये। छत्तीसगढ़ी फिल्मो को सब्सिडी दें ताकि कलाकारों को भी अच्छी मेहनताना मिल सके।
० छालीवुड की फिल्मे दर्शकों को क्यों नहीं खीच पा रही है?
०० क्योकि यहां की फिल्मो में बहुत सारी कमियां होती है। फिल्मो में वो गुणवत्ता नहीं होती जो यहां के लोगो को चाहिए।तकनीक की कमी ने छत्तीसगढ़ी दर्शकों को दूर कर रखा है।प्रोड्यूसरों को इस और ध्यान देने की जरुरत है।
० छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति को आगे बढ़ाने की दिशा में फिल्म का योगदान कितना है?
०० अपनी संस्कृति और भाषा को आगे बढ़ाने का सशक्त माध्यम है सिनेमा । हम भी फिल्मो के माध्यम से लगातार अपनी भाषा की तरक्की के लिए ही काम करते है।हम चाहते है कि हमारी भाषा खूब आगे बढ़े।
० आपकी कोई तमन्ना है जिसे लेकर आप आगे बढ़ रही है
००  मैं छत्तीसगढ़ी लोकगीत जो आज अपना स्थान नहीं प्राप्त कर पाई है।उसे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित और पहचान दिलाना चाहती हूँ।मैं और मेरे पति श्री अमित परगनिहा ने छत्तीसगढ़ी लोक कला , लोकगीत और लोक नृत्य के विकास और उसमें लोगो को पारंगत करने के उद्देश्य से एक महाविद्यालय खोलने की तैयारी में है।जिससे हमारी लोक कला और लोकगीतों में भी पारंगत लोग आ सके और दूसरे प्रदेशों के लोक कलाकारों के बराबर आ सके।
० आपने गायकी का क्षेत्र ही क्यों चुना ?
०० गायन मेरे पिता से बचपन से प्राप्त हुआ।और ईश्वर के आशीर्वाद से मेरे ससुराल से भी पूरा सपोर्ट रहा।मेरे पति श्री अमित परगनिहा दिल्ली यूनिवर्सिटी से  एमबीए है।उनका कला या गायन से लगाव की वजह से वो मेरी पूरी तरह सेसपोर्ट रहता है।
० आप छत्तीसगढ़ से है तो क्या हिन्दी या भोजपुरी फिल्मो के लिए भी गाना गायेंगी?
०० भोजपुरी ।हां मैंने मराठी , उड़िया में गाने गाए है।भोजपुरी के लिए भी तैयार हूँ।
० आपका आदर्श कौन है , जिसे आप फॉलो करती है ?
०० लता मंगेशकर जी ।
० भविष्य की क्या योजनाएं हैं?


०० अभी हम आदिवासी संस्कृति, लोकगायिकी, का कलेक्शन करने जा रहे हैं , ताकि हम प्रदेशवासियों को जनजातीय परिवेश और संस्कृति से परिचित करा सकें।

गुरुवार, 16 जून 2016

अपराधों के खिलाफ सख्त क़ानून की जरुरत

 एक्टिंग के प्रति शौक नहीं , पागलपन है 
क्राइम पेट्रोल के इन्स्पेक्टर गुलशन पांडे से ख़ास चर्चा 
- अरुण बंछोर
सोनी चैनल की सत्य घटनाओं पर आधारित चर्चित धारावाहिक क्राइम पेट्रोल में पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका निभाने वाले गुलशन पांडे का कहना है कि देश में अपराधों के खिलाफ सख्त क़ानून की जरुरत है। ताकि लोगों को त्वरित न्याय मिल सके। वे कहतें हैं कि पुलिस का रोल निभाने में अच्छा लगता है। उन्होंने कहा कि
 पुलिस तो अपना काम करती है, लेकिन न्याय व्यवस्था पर बोझ के चक्कर में लोगों को न्याय मिलने में देरी होती है। हमारा काम लोगों को देश व प्रदेश में बढ़ रहे अपराधों को रोकने के लिए जागरूक करना है। पांडे फिल्म वांटेड में आईपीएस, अतिथि तुम कब जाओगे में रावण, हरियाणवी पृष्ठभूमि पर आधारित सीरियल ना आना इस देश लाडो... में छोटी-छोटी भूमिकाएं कर चुके हैं अब उन्हें क्राइम पेट्रोल सीरियल ने घर-घर तक पहचान दिला दी हैं। डर्टी पिक्चर में डायरेक्टर की भूमिका में गुलशन पांडे का डॉयलाग- स्टार जब खत्म होने लगते हैं तो अंधेरे में खो जाते हैं, खालीपन का अंधेरा जब खाने लगता है तो सबसे पहले स्टार की चमक को खा जाता है, दर्शकों को आज भी याद है। श्री पांडे आज राष्ट्रीय हिन्दी मेल के दफ्तर आये तो हमने उनसे हर पहलुओं पर बात की है।
आपको एक्टिंग का शौक कैसे हुआ?
एक्टिंग के प्रति शौक नहीं , पागलपन है। शौक तो ख़त्म हो जता है पर पागंलपन हमेशा बना रहता है। ये मेरा जूनून है जो कभी ख़त्म नहीं होगा।
क्राइम पेट्रोल से आपको घर-घर पहचान मिली। एक्टिंग का सफर आपने कहाँ से शुरू किया?
करीब 10 वर्ष पहले पंजाब से मुंबई आकर एक्टिंग की शुरूआत की थी। इसके बाद एक्टिंग का सिलसिला जारी हुआ, जो आज भी जारी है। इससे पहले कलर्स चैनल पर भी सीरील किए हैं और नॉन हिंदी मूवी में भी एक्टिंग करने का मौका मिला।वांटेड में आईपीएस, अतिथि तुम कब जाओगे में रावण, हरियाणवी पृष्ठभूमि पर आधारित सीरियल ना आना इस देश लाडो किया। अब क्राइम पेट्रोल कर रहा हूँ।
क्राइम पेट्रोल में पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका में होते हैं। क़ानून के प्रति आपकी क्या सोच है?
देश में अपराधों के खिलाफ सख्त क़ानून की जरुरत है। ताकि लोगों को त्वरित न्याय मिल सके। लेकिन न्याय व्यवस्था पर बोझ के चक्कर में लोगों को न्याय मिलने में देरी होती है। अपने काम के प्रति लोग ईमानदार हो जाये और दूसरों की तरफ ना देखें तो अपराध घाट जाएगा।
क्राइम पेट्रोल से आप लोग क्या सन्देश देना चाहते हैं?
पुलिस तो अपना काम करती है। हमारा काम लोगों को देश व प्रदेश में बढ़ रहे अपराधों को रोकने के लिए जागरूक करना है।
आपकी कोइ ख्वाहिश हो जो  हुए देखना चाहते हैं और आदर्श किसे मानते हैं?
मै  अपने आदेश को ऊंचाईयों पर देखना चाहता हूँ। दुनिया में अपने देश का मान सम्मान हो। मेरी ख्वाहिश एक अच्छे एक्टर बनने की भी रही है। अमिताभ बच्चन को मै अपना आदर्श मानता हूँ। उन्हें देखकर उनके जैसे लम्बे होने का अभ्यास किया। पागलपन की हद तक जाकर काम किया है मैंने।
आपको कैसा रोल पसंद है?
मुझे इमोशनल रोल पसंद है पर ऐसा रोल मिलता नहीं है। जो मिल रहा है उससे मै  संतुष्ट हूँ।
छत्तीसगढ़ आकर आपको कैसा लगा?
बहुत अच्छा लगा। प्रदेश खूबसूरत है यहां के लोग भी अच्छे हैं।