शनिवार, 23 अप्रैल 2016

संकट के दौर में भी बन रही है छत्तीसगढ़ी फिल्मे

 न सुविधाएं , न सरकारी मदद
छालीवुड में संकट का दौर अभी भी जारी है। फिल्में बनती है और लागतें नहीं निकल पाती फिर भी निर्माता साहस दिखा रहें है। हर साल औसतन दस फिल्में बन रही है। इसके अलावा भोजपुरी और हिन्दी फिल्में भी छत्तीसगढ़ में बन रही है। ना यहां किसी प्रकार की सुविधाएं है और ना ही सरकारी मदद। फिल्म निर्माताओं के हौसले और जज्बों की तारीफ़ ही करनी होगी जो बिना सुख सुविधाओं के फिल्में लगातार बना रहे है। आज हम यहाँ बनी अब तक की छत्तीसगढ़ी फिल्मों की ही बातें कर रहे हैं।
(1) कही देबे सन्देश (2) घर द्वार (3) मोर छइयां भुइयां (4) मया देदे, मया ले ले (5) मयारू भौजी (6) अंगना (7) छत्तीसगढ़ महतारी (8) कारी (9) तुलसी चौरा (10) झन भुलव मां बाप ला (11) मया (12) टूरा रिक्शावाला (13) लैला टिपटॉप, छैला अंगूठा छाप (14) भांवर (15) मया देदे मयारू (16) परदेशी के मया (17) मया (18) अब्बड़ मया करथंव (19) माटी के लाल (20) बैरी के मया (21) बिदाई (22) जय महामाया (23) बंधना (24) भकला (25) तीजा के लुगरा (26) गजब दिन भइगे (27) मिस्टर टेटकूराम (28) महूं दीवाना, तहूं दीवानी (29) हीरो न. 1 (30) टूरी न. 1 (31) लेडग़ा नं. 1 (32) छत्तीसगढिय़ा सबले बढिय़ा (33) मितान 420 (34) गुरांवट (35) अब मोर पारी हे (36) ऐ मोर बांटा (37) बैर (38) भुइयां के भगवान (39) घर द्वार (नई) (40) तरी हरी ना ना (41) दिल तोर दीवाना हे (42) कंगला होगिस मालामाल (43) किसान-मितान (44) संगवारी (45) मया के बरखा (46) मोंगरा (47) मोर धरती मईया (48) मोर गांव (49) मोर संग चलव (50) मोर गंवई गांव (51) मोर संग चल मितवा (52) मोर सपना के राजा (53) नैना (54) परशुराम (55) प्रीत के जंग (56) रघुबीर (57) तोर आंचल के छइयां तले (58) तोर मयां के मारे (59) तोर मया म जादू हे (60) तोर संग जीना संगी, तोर संग मरना (61) मोहनी (62) सजना मोर (63) किस्मत के खेल (64) मोर करम मोर धरम (65) अजब जिनगी गजब जिनगी (66) भोला अऊ शंकर (67) पहुना (68) मया के डोरी (69) बईरी सजन (70) दुल्हिन बना के ले जा (71) मोर दुलरवा (72) टूरा अनाड़ी तभो खिलाड़ी (73) जरत हे जिया मोर (74) गुरु बाबा घासीदास (75) गौना (76) डांड (77) पठौनी के चक्कर (78) गुहार रामराज के (79) अनाड़ी संगवारी (80) मया के बंधना (81) सीता (82) मया हो गे रे । 83 राजा छत्तीसगढिय़ा 84 . माटी मोर मितान , 85 महतारी के बँटवारा  86 .एक अउ अर्जुन 87 . सिधवा सजन , 88 तोर खातिर , 89 .राम बनाही जोड़ी 90 छलिया, 91 असली संगवारी (92) जय बम्लेश्वरी मइया (93 ) भोला छत्तीसगढिय़ा (94) सरपंच (95 ) दू लफाड़ू (96) गदर मताही (97) कका (98 ) मोहि डारे रे (99) गोलमाल (100) परेम के जीत (101) सलाम छत्तीसगढ़ (102 ) महतारी(103 ) मया के घरौंदा (104 ) तोला ले जाहू उढ़रिया (105 ) सोन चिरैय्या (106 ) दाई (107) धरती पुत्र   (108) दबंग देहाती(109 ) मया के मंदिर (110) मया 2 (111) मोर डौकी के बिहाव (112) ऑटो वाले भांटो (113) पागल (114) बेलबेलही टूरी (115) आये हम बाराती।
डब फि़ल्में
(116 ) संग म जीबो संग म मरबो, (117 ) मोर सैंया (118 ) अनाड़ी संगवारी, (119 ) चंदन बाबू, (120 ) हर हर महादेव, (121)लेडग़ा ममा (122) लोरिक चंदा, (123 ) मन के बंधना,(124) मया मा फूल मया मा कांटे, (125) माटी मोर महतारी, (126)पुन्नी के चंदा, (127) सीता,

अप्रदर्शित फिल्मों में
प्रदर्शित फिल्मों की सूची के साथ ही निर्माणाधीन अप्रदर्शित फिल्मों में (1) बही तोर सुरता म (2) तोर मोर यारी (3) प्रेम सुमन (4) राजा छत्तीसगढिय़ा 2 (5) दीवाना छत्तीसगढिय़ा (6) चक्कर गुरूजी के (7) (8) जागो रे (9) संगी रे (10) (11) धुरंधर (12) किरिया (13)  बेर्रा (14) मया के धरांैदा (15) नचकारिन (16) छैला (17) कोयला (18) मेहंदी तोर नाम की (19) तोला ले जाहू उढ़रिया (20) सोन चिरैय्या (21) अंजोर (22) मया के सौगंध (23) फुलकुंवर (24) नागिन के मया।

स्पॉट ब्वाय से हीरो बना आर्यध्वज

बेहतरीन अभिनय से सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेता का अवार्ड
फिल्म राजा छत्तीसगढिय़ा में सुपर स्टार अनुज शर्मा के दोस्त की भूमिका में नजर आने वाले आर्यध्वज ने बहुत ही कम समय छालीवुड में अपनी पहचान बना ली है। स्पॉट बॉय से उन्होंने अपना करियर शुरू किया था, फिर एल्बम में काम किया। उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें आज हीरो के करीब ला खड़ा किया है। राजा छत्तीसगढिय़ा उनकी बतौर सह अभिनेता दुसरी फिल्म थी जिसमे उसे ब्रेक मिला। अनुज शर्मा के साथ काम करने का उन्हें बहुत बड़ा फ़ायदा मिला है। आर्यध्वज की इच्छा एक हीरो के रूप में पहचान बनाने की है। 2015 के छालीवुड सिने अवार्ड में उन्हें बेस्ट डेव्यू हीरो का अवार्ड दिया गया।
आर्यध्वज का कहना है की जीवन्तपर्यन्त वह छालीवुड में काम करता रहेगा। अगर मेरी मौत भी हो तो वह किसी फिल्म के सेट पर ही हो। आर्यध्वज ने बताया की एक्टिंग उन्होंने एल्बम से शुरू किया पहले स्पॉट बॉय था फिर मेकअप मेन बना , फिर एल्बम में अभिनय करने लगा। अभिनय करते करते अपनी मेहनत और लगन से आज इस मुकाम पर है । सबसे पहले फिल्म छलिया में उन्हें हीरो के रूप में काम मिला लेकिन उनकी पहचान बनी फिल्म राजा छत्तीसगढिय़ा से। इस फिल्म में वे सुपर स्टार अनुज शर्मा के दोस्त का किरदार निभाया है। अभी हाल ही बनकर तैयार हुई फिल्म बही तोर सुरता म में आर्यध्वज ने मुख्य भूमिका निभाया है। उनका कहना है की इस फिल्म में मुझे अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला है। पर अभी और बहुत कुछ करना है। इसलिए अपने कामों से संतुष्ट होने का सवाल ही पैदा नहीं होता। अभी तो शुरुआत है ,लक्ष्य बाकी है। आर्यध्वज साउथ के हीरो धनुष के बहुत बड़े फेंन है। क्षेत्रीय कार्यक्रमों से प्रेरणा लेकर आर्यध्वज आगे बढ़ रहे अहइ। उनके मन में लगन और दृढ़ इच्छा है , जो उन्हें कामयाब बनाता है।

प्रकाश - अनुज फिर एक साथ ....... !

छालीवुड की चर्चित जोड़ी पर है सबकी नजऱ
छालीवुड के दो बड़े शीर्ष कलाकार पद्मश्री अनुज शर्मा और प्रकाश अवस्थी पर छत्तीसगढ़ की जनता की नजर है। सन 2009 में फिल्म भांवर के बाद इन दोनों कलाकारों ने किसी भी फिल्म में एक साथ काम नहीं किया है। छत्तीसगढ़ की जनता इन दोनों कलाकारों को एक साथ देखने को फिर आतुर हैं लेकिन ये स्टार फिर एक साथ किसी फिल्म में नजर आएंगे,कहना मुश्किल ही है। अनुज शर्मा की फिल्म राजा छत्तीसगढिय़ा को यहां की जनता ने हाथोहाथ लिया और कमाई का एक नया रिकार्ड भी बनाया। वहीं प्रकाश अवस्थी की फिल्म मया 2 ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। कुल मिलाकर दोनों कलाकारों को जनता ने पसंद किया है।
अनुज और प्रकाश ने बतौर नायक दो फिल्मों मया और भांवर में एक साथ काम किया है। पर भांवर में दोनों के अभिनय को खूब सराहा गया। इसके अलावा कुछ और फिल्में है जिसमे दोनों कलाकारों ने अभिनय किया है। भांवर फिल्म को बने सात साल बीत गया उसके बाद ये दोनों स्टार एक साथ किसी और फिल्म में नजर नहीं आये। छत्तीसगढ़ में गिने चुने ही हीरो हैं जिन्हे यहां की जनता परदे पर देखना पसंद करते हैं । छत्तीसगढ़ी फिल्मों के दीवाने इन्हे फिर एक साथ एक ही परदे पर देखना चाहते हैं। अब परिस्थितियां बदली हुई है फिर कभी एक सार्थ किसी फिल्म में नजर आएंगे यह कहना बहुत ही मुश्किल है। हालांकि दोनों कलाकार इससे इंकार भी नहीं कर रहे हैं। प्रकाश अवस्थी का कहना है कि भगवान ने चाहा तो जरूर साथ साथ दिखेंगे।
अनुज शर्मा की फिल्म राजा छत्तीसगढिय़ा ने 2015 के अंत में खूब धूम मचाई है। 30 टाकीजों में एक साथ रिकार्डतोड़ कमाई की है । उनकी एक और फिल्म राजा छत्तीसगढिय़ा 2 बनकर तैयार है। वही प्रकाश अवस्थी की फिल्म मया 2 ने भी रिकार्डतोड़ कमाई  अच्छा प्रदर्शन किया और वर्ष 2015 की सर्वश्रेष्ठ फिल्म बनी। अब देखना है कि ये कलाकार जनता की इच्छा को पूरी करते है या..............!

बदल गए हैं छालीवुड के सर्वश्रेष्ठ चहरे

मनोज जोशी, पवन गुप्ता, क्षमानिधि मिश्रा ,उपासना वैष्णव, मनोजदीप ,उर्वशी साहू, पुष्पांजली शर्मा , ललित उपाध्याय है अब श्रेष्ठ
छालीवुड के एक से बढ़कर एक कलाकार हैं लेकिन सर्वश्रेष्ठ कलाकारों के चेहरे इस बार बदल गए है। मनोज जोशी सर्वश्रेष्ठ अभिनेता हैं तो पवन गुप्ता सर्वश्रेष्ठ निर्देशक हैं। क्षमानिधि मिश्रा सर्वश्रेष्ठ कॉमेडियन है , तो उर्वशी साहू सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेत्री हैं। उपासना वैष्णव सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री , पुष्पांजली शर्मा सर्वश्रेष्ठ चरित्र अभिनेत्री ललित उपाध्याय सर्वश्रेष्ठ चरित्र अभिनेता और मनोजदीप सर्वश्रेष्ठ कोरियोग्राफर हैं।
   - अरुण बंछोर
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सर्वश्रेष्ठ अभिनेता मनोज जोशी
छालीवुड ने इस बार इतिहास रचा। पहली बार रायपुर से बाहर भिलाई के कलाकारों ने अवार्ड में बाजी मारी। फिल्म तोर खातिर के नायक मनोज जोशी ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का अवार्ड हासिल कर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की । मनोज ने न केवल बेहतर अभिनय किया बल्कि अपने संवाद और एक्शन से सबका दिल जीत लिया। पहले छालीवुड स्टारडम ने फिर फि़ल्मी छत्तीसगढ़ ने उन्हें बेस्ट हीरो का अवार्ड दिया तो पूरी स्टेडियम तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज उठा। मनोज में अपना अवार्ड तोर खातिर की टीम को समर्पित करते हुए कहा की यह मेरे जीवन का अनमोल क्षण है। उन्होंने कहा की हमारी पूरी टीम ने इस फिल्म में बहुत मेहनत की थी। रात दिन हम एक कर दिए थे। हमारी मेहनत आज सफल रही। थैंक्स छॉलीवुड स्टारडम, थैंक्स फि़ल्मी पत्रिका।

सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पवन गुप्ता
फिल्म तोर खातिर के निर्देशक पवन गुप्ता ने भी इस बार इतिहास रचते हुए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का अवार्ड अपने नाम कर लिया । उनके निर्देशन में बनी यह पहली फिल्म है और इस फिल्म ने अभिनेता अभिनेत्री डायरेक्टर सहित 14 अवार्ड हासिल कर एक नया कीर्तिमान बनाया है। पवन गुप्ता ने सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का अवार्ड लेने के बाद छालीवुड स्टारडम के मंच से कहा की यह मेरी पहली फिल्म है और पहली ही फिल्म में अवार्ड लेकर मै नबहत ही गर्व का अनुभव कर रहा हूँ। मेरे सारे कलाकारों ने बहुत सहयोग किया जिसके चलते आज मै यह मुकाम हासिल कर पाया हूँ। पवन गुप्ता पहले ऐसे निर्देशक बन गए हैं जिन्होंने 1पहली ही फिल्म में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का  पुरस्कार जीता है। उन्होंने पुरस्कार स्वीकार करते हुए कहा, मुझे यकीन नहीं हो रहा कि ऐसा हो रहा है। इस पुरस्कार को प्राप्त करना बहुत शानदार अनुभव है। मैं यह पुरस्कार अपनी कास्ट, सहकर्मियों और फिल्म के सदस्यों के साथ बांटना चाहता हूं जिनके कारण यह फिल्म बनी।

सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता क्षमानिधि
छालीवुड स्टारडम सिने अवार्ड में क्षमानिधि मिश्रा को सर्वश्रेष्ठ कॉमेडियन को अवार्ड  गया है। छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री का एक बड़ा नाम है क्षमानिधि मिश्रा, जिसकी धमक बॉलीवुड में भी सुनाई देती है। जहाँ भी जाते हैं, कुछ न कुछ जुगाड़़ कर ही आते हैं। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, आमिर खान जैसे कलाकारों के साथ काम करने का उन्हें मौका मिला है। वे सिर्फ कलाकार नहीं है बल्कि बहुप्रतिभा के धनी है। वे जितने अच्छे अभिनेता है उतने ही अच्छे गायक, गीतकार, लेखक, निर्माता, निर्देशक और कॉमेडियन भी है। योगिता आर्ट्स फिल्म प्रोडक्शन के बैनर तले पहली वीडियो फिल्म बंशी में अभिनेता के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाले मिश्रा जी शासकीय योजनाओं पर आधारित आंचल वीडियो फिल्म में निर्माता निर्देशक के साथ विभिन्न आडियो, वीडियो एलबमों के निर्माता हैं । उनके लगभग आज तक 200 से अधिक आडियो कैसेट रिलीज हो चुके हैं जिनमें रसगुल्ला, नोनी, बेन्दरी, गुलेल गोली, तोर सुरता मा, मोहनी, वीडियो एलबमों में संगी के मया, मेड इन जापान, ये दद्दा रे के साथ धारावाहिक कार्यक्रमों का दूरदर्शन से प्रसारण में मकान हाजिर है में गायक व अभिनेता के भूमिका में रहें । उन्होंने विज्ञापन फिल्म मयूर प्लाई, बजाज पंखा के लिए भी काम किया छत्तीसगढ़ के प्रसिध्द फिल्में मोर छइंया भुइंया, मयारू भौजी, लेडग़ा नं. 1 में वे अभिनेता रहे । उन्हें छत्तीसगढ़ शासन और छालीवुड स्टारडम द्वारा बेस्ट कामेडियन एवं अन्य पुरस्कार व सम्प्रति प्रदान की गयी हैं ।

सर्वश्रेष्ठ सहनायिका उपासना वैष्णव
छत्तीसगढ़ी फिल्मो की सबसे सीनियर अदाकारा उपासना वैष्णव को इस वर्ष सर्वश्रेष्ठ सहनायिका का अवार्ड मिला। अवार्ड लेने के लिए वह मंच पर तो नहीं थी लेकिन यह उनके लिए  का  खुशनुमा पल था। उन्होंने अब तक 85 फिल्मे की है जिसमे अधिकाँश फिल्मों में वे माँ की भूमिका में ही है। उसने हिन्दी,तेलुगु और भोजपुरी फिल्मे भी की है। छत्तीसगढ़ी फिल्मो में उपासना बच्चों पर प्यार लुटाती हुई नजर आती है पर उसे खुद निगेटिव रोल पसंद है। मया2 फिल्म में उन्होंने निगेटिव किरदार किया है जिसे दर्शकों ने खूब पसंद कियायह भूमिका उन्हें भी पसंद है। तँहू दीवाना महू दीवाना से वह खलनायिका के नाम से चर्चित हुई ,लकिन मोर डौकी के बिहाव और ऑटो वाले भांटो में वह नायिका के रूप में सामने आई। क्षमानिधि मिश्रा ने इस रोल में उन्हें आजमाया और सफल रहे। उपासना कहती है कि रोल कोई भी हो उसे जीवंत बनाना ही उनका शौक है। अब वह कुछ हटकर रोल करना चाहती है। वे कहती है कि हमारी इमेज एक साफ सुथरी और आदर्श नायिका की होती है जिसे पूरी तरह भुला कर हमें एक ऐसा किरदार निभाना पड़ता है जो खलनायिका के गुण भी दिखा दें और दर्शक भी उसे पसंद करें ।

सर्वश्रेष्ठ कोरियोग्राफर मनोजदीप
कोरियोग्राफर मनोजदीप आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। वे जितने अच्छे अभिनेता है उतने ही अच्छे डायरेकटर, फाइटर और कोरियोग्राफर है। उन्हें इस साल सर्वश्रेष्ठ कोरियोग्राफर का अवार्ड दिया गया। उनका कहना है कि मैंने बहुत संघर्ष किया है। जब मैं शुरू में आया था तो मेरा कोइ ठिकाना नहीं था। मैं भूखा भी सोया हूं। फिल्मों में कोरियोग्राफी का मौका मिलने के बाद मेरी जिंदगी बदल गई। वे कहते हैं की आज हर माता-पिता अपने बच्चों को बहुआयामी बनाना चाहते हैं लेकिन करियर की जब बात आती है तो सिर्फ इंजीनियरिंग या डॉक्टरी जैसे बरसों से चले आ रहे रुढि़वादि क्षेत्रों में ही आगे बढऩे पर जोर दिया जाता है। सभी माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा पेंटिंग भी करे, गाए भी, नाचे भी पर करियर की बात आते ही इन क्षेत्रों से मुंह फेर लिया जाता है।यदि गहराई से सोचा जाए तो नाचने-गाने जैसे क्षेत्र में भी अच्छा पैसा और नाम कमाया जा सकता हैं। कोरियोग्राफी आज एक नए और अनोखे करियर के रूप में सामने आया है। इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए अधिक समस्या भी नहीं होती। आपको संगीत के साथ थिरकना पसंद है और शरीर में लचीलापन है तो आपके पास भी एक मौका है कि कोरियोग्राफर बन जाइए।

सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेत्री उर्वशी साहू
छत्तीसगढ़ी फिल्मो की चर्चित नाम है उर्वशी साहू जिन्होंने 19 फिल्मों में माँ और भाभी की भूमिका निभाई है। झन भुलाहू माँ-बाप ला उनकी पसंदीदा फिल्म है। मोर डौकी के बिहाव , ऑटो वाले भांटो , दबंद देहाती और मया 2 में तो उन्होंने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। ऑटो वाले भांटो फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट हास्य अभिनेत्री का एवार्ड मिला है। अवार्ड मिले के बाद उर्वशी ने कहा कि वो लोककला मंच के कलाकारों के लिए कुछ करना चाहती है और  उसके लिए ही जीना चाहती है । उर्वशी कहती है कि उसे सभी तरह के रोल पसंद है।छत्तीसगढ़ में कलाकारों की भरमार है , जरुरत है उन्हें तराशने की। गाँव गाँव ,गली-गली में कलाकार मिलेंगे , उन्हें फिल्मो में मौका मिलना चाहिए। वे कहती है कि अच्छी कहानी हो और अच्छे- अच्छे कलाकार हो तो छत्तीसगढ़ी फिल्मे भी अच्छी चलेंगी। एक्टिंग और डांसिंग उनका शोक है। लगभग 65  फिल्मो में अपने अभिनय का जादू चला चुकी उर्वशी हिन्दी भोजपुरी फिल्मो में भी अभिनय कर चुकी है। चुनौतीपूर्ण भूमिका उन्हें बहुत पसंद है।

सर्वश्रेष्ठ चरित्र अभिनेत्री पुष्पांजली शर्मा
सर्वश्रेष्ठ चरित्र अभिनेत्री का खिताब जीतने वाली पुष्पांजली शर्मा का यह पहला लेकिन जीवन का सबसे अहम अवार्ड है । छालीवुड स्टारडम ने उन्हें 2014 और 2015 का सर्वश्रेष्ठ चरित्र अभिनेत्री का अवार्ड दिया। पुष्पांजली ने मां की भूमिका निभाकर एक अलग अध्याय रचा है। उन्हें प्रकाश अवस्थी, अनुज शर्मा, करण खान, चन्द्रशेखर चकोर जैसे तमाम बड़े नायको की माँ की भूमिका निभाने की वजह से ही छत्तीसगढ़ की निरुपा राय भी कहा जाता है। पुष्पांजली ने 71 फिल्मों में माँ की भूमिका निभाई है। मया के घरौंदा में उनकी भूमिका वाकई गजब थी। मां के रूप में जब भी पर्दे पर आई लोगों ने उन्हें खूब प्यार दिया। पहुना, टूरी नंबर वन आदि में उनकी भूमिका दमदार थी। लेकिन पुष्पांजली खुद विदाई और मया 2 में अपनी भूमिका को सबसे अच्छी मानती है। पुष्पांजली को आज छत्तीसगढ़ी सिनेमा की बेहतरीन अदाकारा माना जाता है। फिल्मों में उनकी एंट्री बड़े ही निराले ढंग से हुई। कभी अभिनय न तो की थी और ना ही कभी सोची थी। डायरेक्टर एजाज वारसी इन्हे फिल्मो में लेकर आये और डॉ अजय सहाय ने इनका हौसला अफजाई किया, जिसकी वजह से ही आज वे इस मुकाम को पा सकी है। वे कहती है कि मां के चरित्न को फिल्म में जीवंत बनाने की पूरी कोशिश करती हूँ। 80  से अधिक फिल्मो में काम कर चुकी पुष्पांजली को किस्मत ने फिल्मो में खिंच लाया। माँ की भूमिका निभाना उन्हें बेहद पसंद है वैसे पुष्पांजली कई फिल्मो में भाभी की भूमिका भी निभा चुकी है। उनकी तमन्ना इस भूमिका को लगातार आगे भी जीते रहने की है।

सर्वश्रेष्ठ चरित्र अभिनेता ललित उपाध्याय
छत्तीसगढ़ी फिल्मो के सीनियर कलाकार ललित उपाध्याय को इस वर्ष का सर्वश्रेष्ठ चरित्र अभिनेता का अवार्ड मिला तो पूरा स्टेडियम तालियों से गूँज उठा । छालीवुड स्टारडम ने उन्हें मया 2  बेहतर अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ चरित्र अभिनेता का अवार्ड दिया । अवार्ड लेने के लिए वह मंच पर तो नहीं थी लेकिन यह उनके लिए  का  खुशनुमा पल था। बाद में फि़ल्मी पत्रिका ने भी उन्हें यही अवार्ड से नवाजा । उन्होंने अब तक कई फिल्मे की है जिसमे अधिकाँश फिल्मों में वे पिता की भूमिका में ही है। उसने हिन्दी और भोजपुरी फिल्मे भी की है। छत्तीसगढ़ी फिल्मो में ललित बच्चों पर प्यार लुटाते हुए नजर आते है मया2 फिल्म में उन्होंने नायक के पिता किरदार निभाया है जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। यह भूमिका उन्हें भी पसंद है। 1982 में वह रंगकर्म से जुडा और 40 नाटकों में काम किया। मोर छइयां भुइंया में उन्हें ब्रेक मिला और वे आगे बढ़ते गए। इस अवार्ड को उन्होंने  जींदगी का सबसे खूबसूरत संपत्ति बताया है।

रील लाइफ को रियल लाइफ में उतारने की कोशिश होना चाहिए

 लोग मुझे सिंगर के रूप में ही पहचाने  : संगीता
छत्तीसगढ़ी फिल्मो की सहकलाकार संगीता निषाद की दिली तमन्ना सिंगर बनने की है। वे आगे जाकर गायन के क्षेत्र में ही कॅरियर बनाना चाहती है। संगीता भरथरी गायन की एक अच्छी कलाकार है और अभी स्टेज शो भी करती है। वास्तविक जिंदगी में भी संगीता काफी संघर्ष कर रही है। परिवार चलाने के साथ साथ उन पर अपने भाई बहन को पढ़ाने लिखाने की भी जिम्मेदारी है। वे कहती है कि रील लाइफ हमें प्रेरणा देती है जिसे मैं रियल लाइफ में भी उतारने की कोशिश करती हूँ।
संगीता कहती है कि मन में लगन और इच्छा हो तो कोई भी काम किया जा सकता है। वक्त ने मुझे फिल्मो में खींच लाई । मुझे जो भूमिका मिलती है उसे मै पूरी ईमानदारी से निभाती हूँ । उनकी आवाज में जादू है , वे चाहती भी है कि वे अच्छी सिंगर बने उनकी अब भी यही कोशिश है कि  सिंगर के रूप में ही पहचाने । संगीता भरथारी गायन के साथ अभी मै स्टेज शो करती है साठ ही नाट्य मंचन में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेती है । वे कामतादास मानिकपुरी के साथ मै काफी स्टेज शो कर चुकी हूँ। संगीता बताती है की बचपन से ही मै भरथरी गीत के प्रति आकर्षित रही हूँ । फिल्मो में जरुर आ गयी पर मेरी रूचि गायन में ही है । फिल्मों में मै भाभी और बहन की भूमिका अदा करती हूँ और मुझे जो भी भूमिका मिलती है उसे पूरी तरह से डूबकर निभाती हूँ। फिलहाल मैंने अभी पांच फिल्मे की है। हिन्दी फिल्मों में संगीता को रेखा और काजोल पसंद है तथा छत्तीसगढ़ी फिल्मों में पुष्पांजली और उपासना बेहद पसंद है। पर वे किसी को फॉलो नहीं करती है। उनका कहना है कि रील लाइफ और रियल लाइफ में बहुत फर्क होती है। रियल लाइफ को संघर्षपूर्ण होने के बाद भी जीना पड़ता है और रियल लाइफ हमें प्रेरणा देती है। जो रील लाइफ में होता है उसे रियल लाइफ में उतारने की कोशिश करना चाहिए।

गॉडफादर जैसे रोल का इन्तजार में

 सर्वश्रेष्ठ खलनायक पुष्पेंद्र सिंह
छत्तीसगढ़ के जाने माने स्टार पुष्पेन्द्र सिंह में खूबियों का खजाना है। वे एक अच्छे कलाकार है तो उतने ही अच्छे निर्माता निर्देशक और लेखक भी हैं। पुष्पेंद्र सिंह 2015 के सर्वश्रेष्ठ खलनायक है। छालीवुड स्टारडम ने उन्हें 5 मार्च को सिने अवार्ड समारोह में इस खिताब से नवाजा था। उन्हें अपने काम के प्रति जूनून है। उनका कहना है कि - कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती , लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती। उन्हें आज भी गॉडफादर जैसे रोल का इन्तजार है, जो किसी के जीवन पर आधारित हो। पुष्पेन्द्र सिंह मुम्बई में भी अपनी कला का लोहा मनवा रहे हैं। उन्होंने सीरियलों में 100 से ज्यादा एपिशोड कर चुके हैं। छत्तीसगढ़ी फिल्मों के भविष्य के बारे में उनका कहना है कि जब तक टेक्नीकल क्षेत्र में एक्सपर्ट लोग नहीं होंगे तब तक ऐसी ही कमजोर फिल्मे बनती रहेंगी। यहां जिसे जो नहीं आता वही करते हैं । गायक निर्देशक बन जाता है। कोई भी फाइट मास्टर बन जाता है। कोई प्लानिंग नहीं होती जो पैसा नहीं लेते वही कलाकार यहाँ चलते है। तो आप अंदाज लगा ले कैसी फिल्मे बनेंगी।
पुष्पेंद्र सिंह थिएटर से अपने करियर की शुरुआत की है और आज एक मंजे हुए बड़े  कलाकार हैं । सलमा सुलतान की धारावाहिक सुनो कहानी में जब उन्हें मौका मिला तो फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने भारतभूषण जैसे महान एक्टर के साथ काम किया है। पुष्पेंद्र जी बताते हैं कि मेरी कला मेरे पिताजी की देंन है। एक कार्यक्रम में कृष्ण बनाकर मुझे जबरन खड़ा कर दिए थे वही मेरे प्रेरणाश्रोत है। आगे बढऩे में मेरी पत्नी का भी बहुत सहयोग है। जिसके कारण मैं कलाकार हूँ । मै बार बार टूटता हूँ ,बार बार सम्हालता हूँ । मुझे ढर्रे पर जीना नहीं आता। यहां आलोचना करने वाले तो बहुत मिल जाएंगे पर साथ देने वाले नहीं। कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होप्ती , लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती। बस मै यही जानता हूँ।
नायिकाओं की कमी है
पुष्पेंद्र की नजर में छत्तीसगढ़ में नायिकाओं की कमी जरूर है। लडकिया बहुत है पर अच्छे घरों की लडकियां इस फिल्ड में आना नहीं चाहती क्योकि उन्हें वो सम्मान नहीं मिलता जो वो चाहतीं हैं। इसलिए कमी बनी हुई है। मै साल में दो ही फिल्मों में काम करूंगा पर अच्छा करूंगा। मैंने अपना ग्रुप तैयार किया है एसपी इंटरटेनमेंट के बैनर पर हमने काम शुरू किया है। इस क्षेत्र में काम करते रहेंगे। उनका ये बी कहना है कि मुझे आज तक पसंद का रोल नहीं मिला। साइलेंट करेक्टर चाहिए ,पता नहीं कभी मिल पायेगा या नही।गॉडफादर जैसे रोल करने की तमन्ना है, जो किसी के जीवन पर आधारित हो। जैसे महात्मा गांधी।

छालीवुड की ख़ास ख़बरें

शीघ्र दिखाई देगा छत्तीसगढ़ी चैनल मोगरा
छत्तीसगढ़ में क्षेत्रीय भाषा के पहली चैनल मोगरा जल्द ही शुरू होने वाला है। निर्माता निर्देशक पवन गुप्ता ने भिलाईनगर में इस चैनल की स्थापना की है। इस चैनल के शुरू होने से छत्तीसगढ़ी कलाकारों को न केवल एक बेहतर मंच मिलेगा बल्कि रोजगार का साधन भी होगा। चैनल के हेड पवन गुप्ता का कहना है कि छत्तीसगढ़ी भाषा में चैनल की कमी मुझे महसूस हो रही थी। इसलिए मैंने यह शुरू करने का फैसला किया है। इसमें गाने, फिल्म और छत्तीसगढ़ी भाषा में धारावाहिक का प्रसारण किया जाएगा।

फिर लौटेगा पुराने निर्माताओं का दौर
पिछले कुछ सालो से बड़े और दिग्गज निर्माताओं की फिल्में देखने को नहीं है ।  लेकिन जल्द ही पुराने निर्माता फिर फिल्म की शूटिंग करते नजर आएंगे। पहले भी हिट फिल्म दे चुके मनोज वर्मा जल्द ही अपने नए प्रोजेक्ट को लेकर मैदान में उतरने वाले हैं। उन्होंने फिल्म शूटिंग की तैयारी कर ली है। इसी तरह क्षमानिधि मिश्रा ऑटो वाले भांटो फिल्म के प्रदर्शन से बेहद खुश है और जल्द ही एक और नारी प्रधान फिल्म बनाने की तैयारी में है। इस बार भी वे कुछ काटकर करना चाहते है।

पांच फिल्में प्रदर्शन के लिए तैयार
छत्तीसगढ़ी भाषा में बनी पांच फिल्में अब प्रदर्शन के लिए तैयार है ।चक्कर गुरूजी के , तोर मोर यारी ,कोइला , बही तोर सुरता म, और राजा छत्तीसगढिय़ा 2 की शूटिंग पूरी हो चुकी है। चक्कर गुरूजी केफिल्म में निर्माता निर्देशक और नायक चन्द्रशेखर चकोर है। इस फिल्म से उन्हें काफी उम्मीदें है क्योकि यह फिल्म शिक्षा में व्याप्त अव्यवस्था का खुलासा करती है तथा दर्शकों क एक बेहतर संदेश देती है। राजा छत्तीसगढिय़ा 2 सुपर स्टार अनुज शर्मा अभिनीत फिल्म है जिसे राजा छत्तीसगढिय़ा1 की अपार सफलता के बाद निर्माता अनुराग साहू ने बनाया है। तोर मोर यारी ,कोइला , बही तोर सुरता म ये तीन ऐसी फिल्म है जिसकी नायिका तान्या तिवारी है।

ये कैसा मेहनताना
छत्तीसगढ़ में एक हिन्दी फिल्म की शूटिंग इन दिनों चल रही है। इस फिल्म में जितने भी कलाकार है उन्हें मेहनताना नहीं के बराबर दिया जा रहा है लेकिन काम में कोई कोताही नहीं बरती जा रही है। बयाता जा रहा है की इस फिल्म की नायिका को मात्र 5000 रुपये ही दिए जाएंगे। उस हीरोइन ने भी इतने ही रकम में काम करने एके लिए राजी हो गयी गई है। अगर यही हाल रहा तो कलाकारों के दिन नहीं बहुरेंगे।

चल पडी ऑटो वाले भांटो
सुनील तिवारी अभिनीत फिल्म ऑटो वाले भांटो इस साल प्रदर्शन होने वाली चौथी फिल्म हैऔर इन चरों फिल्मों में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है । पहली फिल्म मया के मंदिर सिर्फ एक हप्ते ही चल पाई, वही हाल धरतीपूत का रहा ,तीसरी फिल्म पगला को देखने दर्शक टाकीज नहीं पंहुचे। चौथी फिल्म है ऑटो वाले भांटो जिसने पहले हप्ते अच्छी कमाई की है। यह फिल्म दर्शकों को पसंद आ रही है क्योकि इसमें सकारात्मक सन्देश है। निर्माता क्षामानिधि मिश्रा ने भी इस फिल्म में काम किया है। उनका कहना है कि मुझे इस फिल्म से यही उम्मीदें थी। उपासना उर्वशी की एक्टिंग को देखने लोग जरूर टाकीज पहुंचेंगे। मई इस फिल्म के प्रदर्शन से संतुष्ट हूँ।

अब भोजपुरी फिल्म को डायरेक्ट करेंगे मनोजदीप
छत्तीसगढ़ी और हिन्दी फिल्म का निर्देशन कर चुके छत्तीसगढ़ के बेस्ट कोरियोग्राफर मनोजदीप अब एक भोजपुरी फिल्म को डायरेक्ट करते नजर आएंगे। चर्चित अभिनेता मुकेश वाधवानी एक भोजपुरी फिल्म की शूटिंग करने जा रहे है जिसे मनोजदीप डायरेक्ट करेंगे और कोरियोग्राफर भी होंगे। फिल्म के सभी पात्रों का चयन कर लिया गया है सिर्फ हीरोइन की तलाश है। मनोजदीप इन दिनों महाराष्ट्र में हिन्दी फिल्मों की डबिंग में व्यस्त है।