बुधवार, 26 अगस्त 2020

मम्मी-पापा का सपना ही अंजली का सपना है

फ़िल्मी सफर छोटा है पर बेहतर है



छत्तीसगढ़ी फिल्मो कीअदाकारा अंजली ठाकुर आज किसी परिचय की मोहताज नहीं है. उनकी कला में वो जादू है कि जो भी एक बार देखे, उनकी कला के कायल हो जाएंगे। उनकी एक्टिंग में जीवंतता झलकती है. वे कहती है की मन में दृढ़ इच्छा और लगन हो तो कोइ भी काम असम्भव नहीं होता। जो मन में ठान ले उसे पूरा करके ही रहती हूँ। वे अपने कला के दम पर पहचान बनाना चाहती है. उनका कहना है कि छालीवुड में उनका कोइ आदर्श नहीं है। अपने कामो से पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हूँ। मुझे अभी बहुत कुछ करना है. अंजली ठाकुर को कभी निराशा नहीं होती । यही उनकी सफलता का राज है. उन्होंने बतौर नायिका चार फिल्मे की है. फ़िल्मी सफर उनका छोटा है पर बेहतर है. पेश है बातचीत के सम्पादित अंश - अरुण बंछोर

आपने कितनी फिल्मे या एल्बम किये हैं?
4 फिल्म लीड़ की हूँ, शुरूवाती दौर मे 2 -3 मूवी में छोटा छोटा सा किरदार निभाई हूँ. छत्तीसगढ़ी एल्बम तो अनगिनत है। ओड़िया और हिन्दी एल्बम भी की हूँ|
आपको एक्टिंग के प्रति कैसे दिलचस्पी हुई ?
बचपन मे जब टी.वी. देखतीं थी, तो सोचा करती थी कि इसके अंदर कोई इंसान कैसे जाते हैं और एक बार जब मेरे घर का टी. वी. फूट गया तो मैं उस दिन स्कूल जाना छोड़ के बस यही देखतीं रही.. इसके अंदर के लोग अभी तक बाहर कैसे नहीं आये मैं तब 5-6 साल की थी उस समय अपनी माँ से पूछती भी थी... मुझे भी टी.वी. के अंदर जाना हैं कैसे जाते है. बचपन से रूचि थी
कैसे और कहाँ से आपने एक्टिंग का सफर शुरू किया?
जब मैं हायर सेकेंडरी मे थी तभी से मैंने शुरुआत किया हैं मेरी मम्मी जब अपना और मेरा फोटोज फेसबुक पर अपलोड करती थीं तभी से मेरे पास फिल्मों और एल्बम के ऑफर आने लगे थे.
आप छत्तीसगढी में अपना आदर्श किसे मानते है?
किसी को नहीं..।
अब तक की आपकी उपलब्धी क्या है?
4 फिल्म बि ना किसी के रिफरेंस के की हूँ अपनी मेहनत और हूनर से की हूँ.मेरे लिये यही बहुत बडी बात हैं.. इंडस्ट्री मे मेरा कोई बाप दादा नहीं हैं... अपनी मेहनत और अपने काम के प्रति जो लगन हैं उसी के बलौलत धीरे-धीरे आगे बढ़ रही हूँ.
आप छत्तीसगढ़ी फिल्मों में अपना आदर्श किसे मानते है?
किसी को भी नहीं। लेकिन हाँ मेरी माँ बहुत कम समय मे छत्तीसगढ़ फिल्मों मे अपनी कला का जादू बिखेर रही हैं और मेरी माँ फिल्मों मे हो या मेरी जिन्दगी मे हो आर्दश मेरे लिए एक मात्र वहीं हैं लीना ठाकुर जी.
क्या आप अपने कामों से संतुष्ट हैं?
संतुष्ट नहीं हूँ मैं..मुझे जैसा काम करना पसंद हैं वैसा काम नहीं मिल पा रहा हैं. कुछ अच्छा काम सोचो या करने की कोशिश करो तो यहां पैर खिचने वाले बहुत हैं मगर हाथ खिच के कोई साथ नहीं देते हैं ।
आप किस कलाकार को फॉलो करते है?
मैं किसी कलाकार को फॉलो नहीं करती मुझे अपनी कला से उभरना हैं किसी का कॉपी कर के नहीं।

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कभी आपने सोचा था की फिल्मो को ही अपना कॅरियर बनाएंगे ?
बचपन से यही सोच बना के चलतीं आई हूँ.. मेरी माँ का ये सपना भी हैं.. की मैं अपने कला से अपने दर्शको के दिल मे राज करुं और अपना कॉरियर इसी मे बनाऊ क्योंकि जब मैं 1 साल की भी नहीं थी तो मेरी माँ के पास फिल्मो के ऑफर आते थे तो वो मुझे छोटी हैं बोल के नहीं कर पाई थी और उनका सपना अधूरा था और उस सपने को मैं पूरा कर रही हूँ धीरे-धीरे।
छालीवुड फिल्मो में आपको कैसी भूमिका पसंद है या आप कैसे रोल चाहेंगे।
मुझे गांव घर की बहू और स्कूल लाइफ वाली फिल्म करना अच्छा लगेगा,परिवार के साथ बैठ के देख सके वैसा फिल्म पसंद हैं।
आपका कोई सपना है जो आप पूरा होते देखना चाहती हैं?
मेरे मम्मी पापा का सपना ही मेरा सपना है और उसे ही मैं पूरा होते देखना चहती हूँ.

शुक्रवार, 21 अगस्त 2020

छत्तीसगढ़ी प्रतिभाओं को बॉलीवुड तक ले जाने की ख्वाहिश रखते हैं


छत्तीसगढ़ी कलाकारों के लिए बहुत कुछ करना चाहतें है आलोक स्वर्णकार 

छत्तीसगढ़ में प्रतिभाओं की कमी नहीं है , जरुरत हैं उन्हें तराशने की और इन प्रतिभाओं को सही मंच प्रदान करने की। यह कहना है छालीवुड फिल्म निर्माता आलोक स्वर्णकार का| कलाकारों को लगातार काम मिलता रहे और छालीवुड की पहचान देश दुनिया में बढ़ता रहे इसके लिए उन्होंने यूट्यूब चैनल लेकर आये हैं जो पूरे बारह महीने कलाकारों को काम देता रहेगा ताकि कलाकारों को काम की तलाश में भटकना ना पड़े और छत्तीसगढ़ की जनता का मनोरंजन भी होता रहे. आज हमारी मुलाक़ात आलोक स्वर्णकार से हुई। साथ में थे अभिनेता अशरफ अली. तो संक्षिप्त मुलाक़ात में ही उनसे बहुत सारी बातें हो गयी. 

उन्होंने अपनी भावी योजना बताई जो छत्तीसगढ़ और यहां के कलाकारों के लिए मिल का पत्थर साबित होगा।आलोक स्वर्णकार ने बताया कि इस यूट्यूब चैनल चैनल में छत्तीसगढ़ के नई नई प्रतिभाओं को मौका दिया जाएगा अभी शुरुआती दौर पर नए म्यूजिक डायरेक्टर व सिंगर को मौका दिया जा रहा है इसके लिए आलोक स्वर्णकार लगातार नई प्रतिभाओं की खोज कर रहे हैं और जो कलाकार मिल रहे हैं उन्हें पूरी तरह से अपने साथ जोड़ रहे हैं ताकि उनकी प्रतिभा भी निखरे और उन्हें लगातार काम भी मिले। जब हमने इस संदर्भ में अशरफ से बात की तब उन्होंने बताया कि आलोक स्वर्णकार पेशे से इंजीनियर है और वह जो भी काम करते हैं उस का स्तर बहुत उच्च होता है उन्होंने बताया कि कोरोना के दौर में आलोक स्वर्णकार ने बहुत से कलाकारों की आर्थिक मदद भी की थी और वह कलाकारों के हित के लिए अच्छे कार्य करते रहते हैं यह नए कलाकारों के लिए एक बहुत अच्छा अवसर होगा कि उन्हें इतने बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा जब हमने आलोक स्वर्णकार से बात की तो उन्होंने कहा कि इस चैनल को लेकर उनकी भविष्य की बहुत सी योजनाएं हैं जो धीरे-धीरे लोगों को पता चलेंगी उनका कहना है कि कलाकारों को लगातार काम मिलता रहना चाहिए और जब तक पढ़े-लिखे निर्माता इस फील्ड में नहीं आएंगे तब तक छत्तीसगढ़ के कलाकारों का उद्धार नहीं हो सकता इसलिए वह एक उच्च स्तर का प्लेटफार्म कलाकारों को देना चाहते हैं और इस प्लेटफार्म में छोटे से छोटे गांव के भी प्रतिभावान कलाकारों को वह मौका देंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ फिल्म में रीजनल क्षेत्रों के लोगों व उनके भाषाओं का भी प्रयोग किया जाना चाहिए। लोगों को जागरूक करने के लिए फिल्में सामाजिक क्षेत्र, शिक्षा के क्षेत्र, खेल के क्षेत्र आदि में भी काम करने की जरुरत है जो समाज के लिए संदेश वाहक होती हैै। फिल्म निर्माता आलोक स्वर्णकार ने छत्तीसगढ़ी फिल्म कलाकारों काे बाॅलीवुड तक ले जाना अपना मुख्य उद्देश्य बताया। 

जल्द रिलीज करेंगे  फिल्म मोर भाई नंबर वन

छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार फिल्म मोर भाई नंबर वन में बॉलीवुड टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है। फिल्म में कलाकारों द्वारा काफी मेहनत की गई है। संगीत के पक्ष को भी मजबूत रखा गया है।उन्होंने बताया कि फिल्म मोर भाई नंबर वन में क्षेत्रिय स्टूमेंट का भी प्रयोग किया गया है।स्वर्ण फिल्म्स द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ी फिल्म मोर भाई नंबर वन को वे जल्द ही लाकडाउन खुलते ही रिलीज करने की सोच रहे हैं। फिल्म मोर भाई नंबर वन में मुख्य भूमिका करन, अखिलेश पाण्डेय, प्रियंका परमार व सेजल साहू ने निभाई है। निर्माता आलोक स्वर्णकार, निर्देशक करन खान, कोरियोग्राफर निशांत उपाध्याय, संगीतकार अमित प्रधान, स्वर सुनील सोनी, मुनमुन चक्रवर्ती ने दिया हैं। 

शनिवार, 8 फ़रवरी 2020

अपने दम पर पहचान बनाना चाहती है जागेश्वरी मेश्राम

छालीवुड अदाकारा की एक्टिंग में जीवंतता झलकती है

- अरुण कुमार बंछोर 

छत्तीसगढ़ी फिल्मो कीअदाकारा जागेश्वरी मेश्रामआज किसी परिचय की मोहताज नहीं है. उनकी कला में वो जादू है कि जो भी एक बार देखे, उनकी कला के कायल हो जाएंगे। उनकी एक्टिंग में जीवंतता झलकती है. वे कहती है की मन में दृढ़ इच्छा और लगन हो तो कोइ भी काम असम्भव नहीं होता। जो मन में ठान ले उसे पूरा करके ही रहती हूँ। वे अपने कला के दम पर पहचान बनाना चाहती है. उनका कहना है कि छालीवुड में काम करने वाली सभी कलाकार उनके आदर्श है। क्योकि सबसे मुझे कुछ ना कुछ सीखने को ही मिलता है। मै अपने कामो से पूरी तरह से संतुष्ट हूँ। जागेश्वरी मेश्राम को कभी निराशा नहीं होती । यही उनकी सफलता का राज है.मैंने फिल्म दइहान देखी तो उनकी एक्टिंग देखता रह गया. ऐसा लग रहा था जैसे वे फिल्मों में नहीं सच में सामने थी. उन्होंने बतौर नायिका तीन फिल्मे की है. मैंने जागेश्वरी मेश्राम से हर पहलूओं पर बात की.
0 आपको एक्टिंग के प्रति कैसे दिलचस्पी हुई ?
बचपन से शौक था एक्टिंग करने का। स्कूलों में नाटकों में भाग लिया करती थी। बाद में मुझे थियेटर का शौक हुआ। ऐसा करते करते मैंने छत्तीसगढ़ी फिल्मो की ऑर कदम बढ़ाया। लोगो को देखकर लगा की मुझे भी इस क्षेत्र में कुछ करना चाहिए।

0 अब तक की आपकी उपलब्धी क्या है?
मैंने करीब 7 छत्तीसगढ़ी फिल्मो में काम किया है और कुछ एल्बम बनाये है। मेरे पापा से मुझे कला विरासत में मिली है. मैंने लोकरंग ज्वाइन कर अपना कदम आगे बढ़ाया है. और आज आपके सामने हूँ.
0 आप छस्तीस्सगढ़ी फिल्मों में अपना आदर्श किसे मानते है?
छालीवुड में काम करने वाली सभी कलाकार मेरे आदर्श है। क्योकि सबसे मुझे कुछ ना कुछ सीखने को ही मिलता है।
0 क्या आप अपने कामों से संतुष्ट हैं? 
हाँ, मैं अपने कामों से पूरी तरह से संतुष्ट हूँ। मैंने जितने भी फिल्मों में काम किया है सभी मेरे जीवन की बेहतर फ़िल्में है।
0 कभी आपने सोचा था की फिल्मो को ही अपना कॅरियर बनाएंगे ?
हाँ ! शुरू से ही मै एक्टिंग को कॅरियर बनाने की सोचकर चली हूँ। अब इसी लाईन पर काम करती  रहूंगी।
0  छालीवुड फिल्मो में आपको कैसी भूमिका पसंद है या आप कैसे रोल चाहेंगे।
मैं हर तरह की भूमिका निभाना चाहूंगी  , लेकिन लीड रोल मुझे ज्यादा पसंद है।
0 सरकार से आपको क्या अपेक्षाएं हैं?
सरकार छालीवुड की मदद करे। टाकीज बनवाए, नियम बनाये। छत्तीसगढ़ी फिल्मो को सब्सिडी दें ताकि कलाकारों को भी अच्छी मेहनताना मिल सके।
0 आपका कोई सपना है जो आप पूरा होते देखना चाहती हैं?
अपने कला के दम पर पहचान बनाऊँ तथा लोग मुझे एक अच्छी अभिनेत्री के रूप में जाने , यही मेरा सपना है. 

शुक्रवार, 31 जनवरी 2020

ए टी म्यूजिक का यूट्यूब में धमाका

छत्तीसगढ़ी फिल्म निर्माता अजय त्रिपाठी ने यूट्यूब में ए टी म्यूजिक वर्ल्ड के रूप में तहलका मचा दिया है।  उनके गाने खूब पसंद किये जा रहे हैं. अजय ने चारामा मे पत्रकारिता से अपनी सार्वजनिक जीवन की शुरूवात की थी, पहले फिल्मो में आये और तोर मोर यारी फिल्म बनाई।  इस फिल्म में उन्होंने अभिनय भी किया है. अब यूट्यूब प् धमाल कर रहे हैं. आजा आजा मोर मैना मंजूर गीत अभी यूट्यूब पर लोग खूब देख सुन रहे हैं.गीतकार संगीतकार घनश्याम महानंद है। अजय त्रिपाठी और पूजा देवांगन ने इस गीत पर शानदार अभिनय और डांस करसबका दिल जीत लिया है. कांसेप्ट भीआजाय त्रिपाठी का ही है जिसे कोरियोग्राफ किया है चंदनदीप ने.अजय  त्रिपाठी का कहना है कि फिल्म दुनिया में तो हम है ही लेकिन आज ज़माना यूट्यूब का है इसलिए मैंने इस क्षेत्र में भी कदम रखा है.

छालीवुड में संध्या वर्मा की धमाकेदार एंट्री

छत्तीसगढ़ी फिल्मो में मौलिकता और संस्कृति की कमी झलकती है
- अरुण कुमार बंछोर
छत्तीसगढ़ी फिल्मो की उभरती नायिका संध्या वर्मा की दिली तमन्ना छत्तीसगढी फिल्मे लगातार करने और अपने माता पिता का नाम रौशन करने की है.फिल्म सनम तोर कसम मेवे नायिका है और वे इसी फिल्म से
छालीवुड में धमाकेदार एंट्री करने जा रही है. धमाकेदार हम इसलिए कह रहे हैं क्योकि इस फिल्म में संध्या ने बहुत ही शानदार अभिनय किया है. ट्रीजर में ही इसकी झलक दिखती है। संध्या ने सिंगिग से अपने कॅरियर की शुरुआत की थी और आज छत्तीसगढ़ी फिल्मों का एक हिस्सा बन गयी है। उन्होंने एक हिंदी की भी एक फ़िल्में की है। अब वे लगातार फिल्मे ही करते रहना चाहती है। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ी फिल्मो में मौलिकता और छत्तीसगढ़ी संस्कृति की कमी झलकती है।
0 आपको एक्टिंग का शौक कब से है ?
00 मुझे एक्टिंग का शौक बचपन से ही रहा है। जब मै छोटी थी तभी से फिल्म देकहती आ रही हूँ। तभी से कुछ अलग करने की सोच ली थी। मन में लगन हो तो सब संभव है। मैंने थियेटर ज्वाइन किया और आज इस मुकाम पर हूँ।
0 छालीवुड की क्या सम्भावनाये दिखती है?
00 बेहतर है। आने वाले समय में यहां की फिल्मे बॉलीवुड की तरह ही चलेंगी।यहां फिलहाल दर्शकों की कमी है। लोगो में अपनी भाषा के प्रति वो रूचि नहीं है जो होनी चाहिए और जो दर्शक है उनकी रुझान हिन्दी फिल्मो की ऑर है।
0 तो छालीवुड की फिल्मे दर्शकों को क्यों नहीं खीच पा रही है?
00 क्योकि यहां की फिल्मो में अपनी संस्कृति और मौलिकता की कमी झलकती है। कलाकारों का चयन भी पात्रों के अनुसार नहीं होता क्योकि निर्माता सबसे पहले फाइनेंसर की तलाश में होता है। जो पैसा लगाता है वो कलाकार बन जाता है।
0 फिर मौका कैसे मिला और आपके प्रेरणाश्रोत कौन है ?
00 एक्टिंग मैंने खुद से सीखा है। मेरा कोई रोल मॉडल नहीं है। मै थियेटर से आई हूँ। मेरी पहली फिल्म एक हॉरर फिल्म है। सही मायने में मेरी पहली फिल्म सनम तोर कसम है जो बड़े परदे पर आने वाली है। इसके पहले बरात ले के आ जा में सेकण्ड लीड रोल में हूँ. मेरे माता पिता सिंगर है जिससे मुझे कला विरासत में मिली है.
0 कभी आपने सोचा था की फिल्मो को ही अपना कॅरियर बनाएंगे ?
00 हाँ ! शुरू से ही मै एक्टिंग को कॅरियर बनाने की सोचकर चली थी । इसी लाईन पर काम करती रहूंगी।
0  छालीवुड फिल्मो में आपको कैसी भूमिका पसंद है या आप कैसे रोल चाहेंगी।
00  मैं हर तरह की भूमिका निभाना चाहूंगी ताकि मुझे सभी प्रकार का अनुभव हो। छोटे बड़े सभी रोल मुझे पसंद है। मैं किसी भी भाषा की फिल्म हो जरूर करूंगी।
0 आप फिल्मो में भूमिका को लेकर कैसा महसूस करते हैं ?
00 जब मैं कोई भूमिका निभाती हूँ तो पहले गंभीरता से मनन करती हूँ। उसमे पूरी तरह से डूब जाती हूँ।
0 आपका कोई सपना है जो आप पूरा होते देखना चाहती हैं?
00 छालीवुड में कुछ करके दिखाना चाहती हूँ। अब लगातार फिल्मो में ही काम करते रहने की तमन्ना है। 

गुरुवार, 23 जनवरी 2020

" फिल्मसिटी " की घोषणा पर छिड़ी बहस

0 इस मुद्दे पर बटें नजर आये फ़िल्म निर्माता
0 कोई सरकार के साथ तो कोई विरोध में
अरुण बंछोर/ श्रीमती केशर सोनकर
रायपुर । राज्य सरकार ने रायपुर में फिल्मसिटी बनाने की घोषणा की है उसके साथ ही प्रदेश भर में इस निर्णय का विरोध भी शुरू हो गया है। छालीवुड के फ़िल्म निर्माताओं ने दो टूक शब्दों में कहा है कि उन्हें फिल्मसिटी नही बल्कि प्रदेश भर में थियेटर चाहिए। वहीं कुछ निर्माताओं का कहना है कि फिलसिटी तो चाहिए ही ,  थियएटर है उसी में हम फिल्म नहीं लगा पा रहे हैं। हमने छालीवुड के जाने माने निर्माताओं से बात की है.आइए जानते है क्या कहते हैं निर्माता।

पहले थियेटर बने - संतोष जैन

छत्तीसगढ़ फ़िल्म प्रोड्यूसर एसोसिएशन के अध्यक्ष फ़िल्म निर्माता संतोष जैन का कहना है कि फ़िल्म सिटी का हम विरोध नही करते हैं पर हमारी पहली प्राथमिकता थियेटर है। प्रदेश भर में ज्यादा से ज्यादा मिनी थियेटर और टूरिंग टाकीज बने और सरकार उन्हें सब्सिडी दें। इससे छालीवुड बहूत आगे जाएगा। थियेटर की कमी के चलते छत्तीसगढ़ के दर्शक हमारी मूवी नही देख पाते। सरकार को इस दिशा में विचार करना चाहिए।  फिल्मसिटी का हम स्वागत करते हैं पर हमारी पहली प्राथमिकता थियेटर ही होगी। सीधी सी बात है मिनी थियेटर और टूरिंग टॉकीज होगी तो गांवों के दर्शकों को बड़े शहर नही आना पड़ेगा और आसानी से फ़िल्म देखने को मिलेगा। बहुत ऐसे भी लोग होते है जो शहर जाते ही नही और मनोरंजन के शौकीन होते हैं। ऐसे लोगो के लिए मिनी थियेटर या टूरिंग टाकीज चाहिए।

फिल्मसिटी की क्या जरूरत- मनोज वर्मा
छत्तीसगढ़ी फिल्मों के जाने माने निर्माता निर्देशक एवं प्रोड्यूसर एसोसिएशन के सचिव मनोज वर्मा का दो टूक शब्दों में कहना है कि यहाँ फ़िल्म सिटी की जरूरत ही नही है। क्यों चाहिए और किसे चाहिए फ़िल्म सिटी। छत्तीसगढ़ में शूटिंग के लिए सब कुछ है। सुंदर सुंदर लोकेशन है, नदी है, झरना है, पहाड़ है, जंगल है, गांव है, मंदिरें है, सब कुछ तो है फिर फ़िल्म सिटी की क्या जरूरत। कौन जाएगा वहां शूटिंग करने। नेचुरल चीजें है उसे हम दिखातें हैं फिल्मों में, जिसे देखकर दूर दूर से पर्यटक छत्तीसगढ़ आते हैं। हमें तो बस मिनी थियेटर चाहिए ब्लाक स्तर पर। सारी समस्याएं थियेटर बना देने से खत्म हो जाएगी। यहां फिल्मसिटी बनेगी बाहर के लोग आएंगे दुकान लगाएंगे। छोटे छोटे सेट लगाकर शूट करेंगे। हमारे किसी काम के नही। ना तो यहां वेब्सिरिज बनता है, ना सीरियल बनता है तो फिर फिल्मसिटी किसलिए। नही चाहिए फिल्मसिटी। हमारी मांग है थियेटर बस।

फिल्मसिटी से क्या होगा - अशोक तिवारी
छत्तीसगढ़ी फिल्मों के निर्माता अशोक तिवारी भी फ़िल्म सिटी बनाने के सरकार के फैसले से सहमत नही है। उनका कहना है कि फिल्मसिटी के बन जाने से क्या होगा। ना निर्माताओं को फायदा है और ना ही कलाकारों का। फिर फिल्मसिटी क्यों। आज हम मनपसंद लोकेशन पर मुफ्त में फिल्मों की शूटिंग कर लेते है। फिल्मसिटी बन जाने से हमारा खर्च बढ़ जाएगा। शूटिंग के लिए वहां पैसा देना होगा। ये तो बाद की बात है। सबसे पहली बात है कि वहां शूटिंग के लिए जाएगा कौन। छत्तीसगढ़ में इतने सुंदर सुंदर लोकेशन है जैसा चाहे हमे मिलता है। छालीवुड की हितैषी है तो सरकार विकास खंडों में थियेटर बनाये सब्सिडी दे और टूरिंग टॉकीजों को लाइसेंस दे बस । फिर देखो छत्तीसगढ़ी फ़िल्म कैसे दौड़ती है।

फिल्मसिटी ही चाहिए, स्वागतेय निर्णय-मोहन सुंदरानी
छालीवुड के भीष्मपितामह मोहन सुंदरानी ने कहा है कि हमे तो फिल्मसिटी ही चाहिए। सरकार का निर्णय स्वागतेय है। 20 सालों में किसी ने भी फ़िल्म ओर संस्कृति की ओर ध्यान नही दिया। मैं आभारी हूँ भूपेश बघेल का जिन्होंने हमारी सुध तो ली और फिल्मसिटी बनाने का निर्णय लिया। बहुत फायदा है इससे। फ़िल्म निर्माताओं को सारा लोकेशन एक ही स्थान पर मिलेगा। आज यहां वहां भटकना पड़ता है। रही बात थियेटर की तो क्यों चाहिए। जितनी थियेटर अभी है उसी में निर्माता फ़िल्म नही लगा पाते। मैं छालीवुड के निर्माताओं से पूछना चाहता हूं कि क्या सभी सेंटरों पर फ़िल्म लगाते हैं। नही ना,तो फिर ओर थियेटर क्यों चाहिए। सरकार का कदम सही है हमें फिल्मसिटी ही चाहिए।

फिल्मसिटी आज की जरूरत है- अमरनाथ पाठक
अभिषेक मूवी के संचालक फ़िल्म निर्माता अमरनाथ पाठक का कहना है कि फिल्मसिटी आज की जरूरत है। थियेटर की जरूरत नही है जितने थियेटर है हम उसी का उपयोग नही कर पाते है तो फिर और क्यों चाहिए। फिल्मसिटी बनाने से निर्माताओं को शूटिंग में सहूलियत होगी। जो चशिये वो एक ही स्थान पर उपलब्ध होगी। यहां वहां शिफ्ट नही होना पड़ेगा। यही समय की मांग है। धन और समय दोनों की बचत होगी।


फिल्मसिटी का विरोध नही पर औचित्य भी नही- अलक राय
फ़िल्म निर्माता एवं डिस्ट्रीव्यूटर अलक राय का कहना है कि मैं फिल्मसिटी का विरोध नही कर रहा हूँ पर यहां फिल्मसिटी का कोई औचित्य नही है। पूरा छत्तीसगढ़ अपने आप मे एक फ़िल्म सिटी है। हमे तो थियेटर चाहिए इससे रिकवरी होगी। जहां हमारे दर्शक है वहां थियेटर नही है। थियेटर वहां है जहां दर्शक नही है। सिमगा, में नही है, गरियाबंद में नही है ,चौकी में नही है, डोंगरगांव में नही है। यहां थियेटर चाहिए। छत्तीसगढ़ में कोई लोकेशन की कमी तो है नही की फिल्मसिटी बनाएं। शासन अपने गार्डन तक का तो मेंटनेंस नही कर पाती। फिल्मसिटी क्या मेंटेन करेंगे।

सरकार मरीजों का मर्ज तो जाने- प्रकाश अवस्थी
फ़िल्म निर्माता निर्देशक एवं अभिनेता प्रकाश अवस्थी का कहना है कि सरकार मरीजों का मर्ज जाने बिना कैसे फिल्मसिटी का ऐलान कर दिया।सरकार पहले थियेटर खोलने सब्सिडी दे। सरकार तो थियेटर खोलेगी नही, तो गांवों के बेरोजगार युवकों को थियेटर खोलने सब्सिडी दे ताकि जो फ़िल्म देखना चाहते हैं उसे साधन मिल जाए। जुआ ओर शराब ही इंटरटेनमेंट का साधन ना हो फ़िल्म भी गांवों तक पहुंचे। फिल्मसिटी हमारी कोई जरूरत नही है बल्कि यहां सुंदर सुंदर गार्डन है उसे शूटिंग के लिए फ्री कर दें। फिल्मसिटी पर 500 करोड़ खर्च करोगे। 100 करोड़ में तो  दो ढाई सौ थियेटर खुल जाएंगे।

थियेटर हो तो सारी समस्या खत्म - डॉ अजय सहाय
छालीवुड के जाने माने अभिनेता, निर्माता निर्देशक डॉ अजय मोहन सहाय का कहना है कि हमारी सबसे बड़ी सज़्मस्या थियेटर है।सरकार इस दिशा में कदम उठाए। थियेटर होगा तो छत्तीसगढ़ी फिल्मों को लोग देख सकेंगे। गांव के दर्शक फ़िल्म देखने गांव से शहर नही आते। उन्हें उनके नजदीक तक हमारी फिल्म ले जानी होगी यानी कस्बों में थियेटर बने। फ़िल्म सिटी का यहां कोई काम नही है। जो सरकार के पास साधन है उसे शूटिंग के लिए फ्री कर दें। मुक्तांगन में शूटिंग करनी है तो हमे पैसा देना होता है। फिल्मसिटी बन जायेगा तो वहां भी पैसा वसूला जाएगा। अभी हमारे निर्माता जहां चाहे वह मनमर्जी से शूटिंग कर लेते हैं।

मंगलवार, 14 जनवरी 2020

“आ जा नदिया के पार” ज्ञानेश तिवारी का ड्रीम प्रोजेक्ट

एक्शन से भरपूर रोमांटिक एवं पारिवारिक फिल्म  
अरुण बंछोर छॉलीवुड स्टारडम 

श्रीराम मोशन पिक्चर्स के बेनर तले बनी निर्माता निर्देशक ज्ञानेश तिवारी की फिल्म “आ जा नदिया के पार” उनकी ड्रीम प्रोजेक्ट है. इस फिल्म में उन्होंने दर्शकों की पसंद का विशेष ख्याल रखा है और वो सब कुछ देने की कोशिश की है जो छत्तीसगढ़ की जनता फिल्मों में देखना चाहती हैं. ये फिल्म श्री तिवारी की दिशा और दशा दोनों तय करेगी. “आ जा नदिया के पार” एक ऐसी फिल्म है जिसमे आपको रोमांस भी मिलेगा तो एक्शन ,मारधाड़ ,सन्देश , शानदार लोकेशन भी देखने को मिलेगा. इस फिल्म की कहानी पारिवारिक है जो मौजूदा हालातों को प्रदर्शित करती है. कहानी क्या है ये हम अभी नहीं बताएँगे इसके लिए आपको टाकीजों तक जाना होगा. पर यह जरुर है कि फिल्म देखकर आपको कहीं भी निराशा नहीं होगी. ज्ञानेश तिवारी का निर्देशन में बेहतर अनुभव है., फिल्म के नायक अशरफ अली है और नायिका आस्था दयाल दोनों के अभिनय में माहिर हैं और कम समय में इस फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अच्छी पहचान बनाई है. दोनों की फिल्मे टाकीजों में पहले भी अच्छा प्रदर्शन कर चुकी है. अशरफ ने प्रेम के बंधना और ले चल नदिया के पार में तो आस्था ने तहूँ कुंवारा महूँ कुंवारी में लोगो का दिल जीता है. विनायक अग्रवाल एक मझे हुए बेहतरीन कलाकार हैं, सरला सेन का अभिनय हमेशा लोगो को पसंद आया है इस फिल्म में भी सरला ने अपना अच्छा अभिनय देने की कोशिश की है. अन्य कलाकार है मंदिरा नायक, दूजे निषाद, विनोद. टाईटल गीत खुद निर्माता ज्ञानेश तिवारी ने लिखे हैं तो संगीत दिया है अभिनव तिवारी ने. अभिनव और चम्पा निषाद के स्वर से गाने सजे हैं. फिल्म में चार गाने हैं जो दर्शकों को पसंद आयेगा, ऐसी उम्मीद है.