शुक्रवार, 12 मई 2017

छालीवुड को अच्छी व् गुणवत्ता फि़ल्मो की ज़रूरत

- नंदिनी तिवारी नैनी
छत्तीसगढ़ी सिनेमा का इतिहास यूँ तो कई सालों से चला आ रहा है।बीते इन सालों में छालीवुड ने बहुत सी फि़ल्मे हमारे सामने रखी जिनमे बहुत सारी फि़ल्मो ने, कलाकारों ने अपना वजूद, अपना वर्चस्व स्थापित कर लिया और उन फि़ल्मो के गीत- संगीत आज भी हमें कर्णप्रिय लगते हैं।ऐसी फिल्मों को सभी पसंद करते थे गांव हो या शहर हर जगह उस फि़ल्म के गीत- संगीत सुनाई पड़ते थे। किन्तु आज के दौर में देखा जाए कुछ ही अच्छी फि़ल्मो को छोड़कर ऐसी फि़ल्मे बन रही है जो न कि पारिवारिक होती है, न ही सामाजिक, न ही ऐतेहासिक। छालीवुड सिनेमा अब तक अपना अस्तित्व पूरी तरह जनता के सामने नहीं बना पाई है। इसका कारण यही है की अच्छी व् गुणवत्ता की फि़ल्मे बन नहीं पा रही।यही वजह है कि आज छत्तीसगढ़ के लोग भी छत्तीसगढ़ी फि़ल्मे देखने बहुत कम ही जाते हैं।हम दूसरे राज्यों में देखते हैं की वहां की जनता क्षेत्रीय फिल्मों को पहले महत्व देती है और वहां का बच्चा-बच्चा भी क्षेत्रीय फिल्मों के कलाकारों और फिल्मों के बारे में जानकारी रखता है किन्तु छालीवुड में कुछ नामी लोगों को छोड़ दिया जाए तो यहाँ की फिल्मों के नाम तो बहुत दूर कोई कलाकारों को भी नहीं पहचान पाता।मैं यह मानती हूँ कि फि़ल्मो का निर्माण करना इतना आसान नहीं, बहुत मेहनत,बहुत पैसे और समय के साथ दिमागी मेहनत करने पर एक फि़ल्म का निर्माण होता है। फिर भी कई मुश्किलों का सामना निर्माता व् निर्देशक को करना पड़ता है।लेकिन इतनी मेहनत ,इतना समय अगर हम लगा ही रहे हैं तो एक अच्छी व् गुणवत्ता वाली फि़ल्मे समाज व् राज्य के सामने रखनी चाहिए।ऐसे फि़ल्म जो छालीवुड में एक नया इतिहास रच दे जिसे केवल छत्तीसगढ़ की जनता के साथ हर राज्य की जनता देखने के लिए उमड़ पड़े।और छालीवुड की चर्चा पूरे देश में हो।इसके लिए फि़ल्म बनाने से पहले यह सोचना होगा की हम किसके लिए फि़ल्मो का निर्माण कर रहे हैं, अपनी स्वार्थपरक दृष्टि को बदलकर हमें समाज के बारे में सोचना होगा, अपनी छत्तीसगढ़ महतारी के बारे में सोचना होगा, परिवार के बारे में सोचना होगा, हमारे छत्तीसगढ़ के गौरवपूर्ण इतिहास के बारे में सोचना होगा।तब जाकर हम अच्छी फि़ल्मे समाज,राज्य,परिवार के बीच रख पाएंगे और तब ये फि़ल्मे हमारे छालीवुड सिनेमा का गौरवगान करेगी।मेरी यही अपेक्षा लोगों से कि छत्तीसगढ़ की जनता को पारिवारिक फि़ल्मे दे,सामाजिक फिल्में दे,ऐतेहासिक फि़ल्मे दे जिससे छालीवुड सिनेमा हर छत्तीसगढ़ वासियों की लोकप्रिय बन सके और घर-घर में क्षेत्रीय सिनेमा का बोलबाला हो।
  

खुद को सबसे बड़ी चुनौती मानती है नेहा

लोग उनकी कला को सराहे, यही तमन्ना है 
मराठी फिल्मो की चरित्र अभिनेत्री नेहा राउत ने छालीवुड फिल्मो में धमाकेदार एंट्री की है। वे फिल्म संत शिरोमणी गुरु घासीदास बाबा से छालीवूड़ में कदम रखी है। जिसमे नेहा उनकी माता अमरौतीन की भूमिका में है। नेहा अपने आप को ही सबसे बड़ी चुनौती मानती है। वे देखना चाहती है कि वे क्या क्या कर सकती है। वे मराठी फिल्मो की एक जाना पहचाना नाम है। कई एल्बमों में अपनी कला का जादू बिखेर चुकी नेहा कहती है कि अमरौतीन माता की भूमिका बहुत ही प्रभावित करने वाली है। स्कूल के समय से ही नाटकों में अपनी कला का प्रदर्शन करने वाली नेहा के नाम कई उपलब्धियाँ है । बचपन से ही उन्हें एक्टिंग और सिंगिंग का शौक रहा है बाद में वे एंकरिंग भी करने लगी। आईटी इंजीनियर नेहा डिजिटल और साईबर क्राईम में स्नातक है। 8 साल की उम्र में उन्होंने अपने अभिनय की शुरुवात की फिर पीछे पलटकर नहीं देखा। उनकी तमन्ना है कि लोग उन्हें बड़े परदे पर देखकर उनकी सराहना करें और अपने दम पर बतौर अभिनेत्री अवार्ड जीतना चाहती हूँ।

नेहा पांच साल से फिल्मो में अभिनय कर रही है। वे मराठी फिल्मो और एल्बम में काम करती रही है अब उन्होंने छालीवूड़ में कदम रखी है। वे कहती है कि उनके पापा ही उनके प्रेरणाश्रोत रहे हैं उन्होंने मुझे कदम कदम पर साथ दिया है। वही उर्मिला मातोंडकर उनकी आदर्श है जिन्हें वे फालो करती हैं। नेहा ने बचपन ने अपने स्कूल में जब सोलो डांस किया तब उन्हें ना केवल सराहना मिली बल्कि उनकी कला की जमकर तारीफ़ हुई थी. वही से नेहा को एक राह मिली जिस पर वे आगे बढ़ती चली गयी और आज सबके सामने हैं। तीन साल पहले अपने पापा के निधन से नेहा टूट गयी थी लेकिन उनकी तमन्ना को पूरी करने जल्द ही वह सम्हल भी गयी. अब वे अपने पापा की इच्छाओं को पूरी करने में लगी हुई हैं। क्योकि उनके पापा ही उनके लिए सब कुछ थे। धर्मेद्र और सन्नी देवोल से मिलकर नेहा सबसे ज्यादा उत्साहित हुई थी क्योकि इस दोनों मशहूर अभिनेताओं के उन्हें आगे बढऩे का आशीर्वाद दिए थे। नेहा अपने आप को ही सबसे बड़ी चुनौती मानती है। वे देखना चाहती है कि वे क्या क्या कर सकती है। उनकी ख्वाहिश है कि लोग उन्हें उनकी कला से जाने पहचाने और तारीफ़ करें। अभिनय का अवार्ड जीतना भी उनका मकसद है। 

चुनौतीपूर्ण भूमिका ही पसंद है आशीष को


थियेटर से फिल्मो तक का सफऱ 
- अरुण बंछोर
छालीवुड के जाने माने चरित्र अभिनेता आशीष शेंद्रे आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। थियेटर से फिल्मो में आये आशीष शेंद्रे ने पूरे देश भर में घूम घूमकर थियेटर में अपनी कला का लोहा मनवाया है। देश का ऐसा कोइ शहर नहीं है जहां इनकी कला की धूम ना हो।  ''हो जिनका हौसला बुलंद, भला कौन रोक सकता है उनको बुलंदियों से  " कुछ इन्हीं पंक्तियों के साथ छत्तीसगढ़ के इतिहास में अपना नाम दर्ज कराने वाले श्री आशीष जो अपने कामों और फिल्मों के बलबूतों पर प्रेरणा के उदाहरण बन गये हैं। 200 से अधिक थियेटर करने के बाद उन्होंने फिल्मो में कदम रखा और आज 50 से अधिक फिल्मो में अपनी अभिनय से सबका दिल जीत चुका है। इनकी फिल्मो में एंट्री भी बड़ी दिलचस्प है। फिल्म छइयां भुईयां के लिए सतीश जैन इन्हें बतौर हीरो साइन करने आये थे लेकिन थियेटर में व्यस्त होने के कारण उन्हें पिता की भूमिका में ले लिए। आशीष का कहना है कि छालीवुड में कलाकारों का शोषण नहीं होता बल्कि कलाकार खुद अपना स्तर गिरा लेते हैं। इन्हें कला विरासत में मिला है उनके पिताजी घनश्याम शेंद्रे भी एक मंजे हुए कलाकार है। चरित्र अभिनेता आशीष शेंद्रे आज हमारे दफ्तर आये तो हमने उनसे हर पहलुओं पर बेबाक बात की है।
0 अभिनय में आप माहिर हैं , इसकी बारीकियां आपने कहाँ से सीखी?
00 अभिनय की बारीकियां हमने थियेटर से सीखी है। थियेटर के कलाकार को हर क्षेत्र में महारत हासिल होता है क्योकि थियेटर ही कला की पहली पायदान है।
0 थियेटर में क्या किया, कैसे शुरुआत की?
00 हमने थियेटर में करीब 200 से अधिक नाटकों का देश भर में मंचन किया है। देश का ऐसा कोइ बड़ा शहर नहीं है जहां हमने नाटकों का मंचन ना किया हो। हर बारीकियां वहीं से सीखी है। मुम्बई में हमने सईंया भये कोतवाल का मंचन किया जिसे सबने सराहा। कोलकाता दिल्ली चेन्नई जैसे शहरों में भी हमारे छत्तीसगढ़ी मंचन को खूब तारीफ़ मिली है।
0 फिल्मो में एंट्री कैसे मिली?
00 मेरी पहली फिल्म छइयां भुईयां है जिसमे मुझे सतीश जैन जी ने बतौर हीरो साइन करने आये थे उन्होंने मेरा अभिनय थियेटर में ही देखा था। जब उन्हें पता चला कि हम थियेटर में बीजी हैं तो पिताजी की भूमिका में ही ले लिए। वे चाहते थे कि मै इस फिल्म में हरहाल में काम करूँ।
0 आपकी सबसे पसंदीदा फिल्म कौन सी है और आपकी तमन्ना क्या है?
0 झन भूलव माँ बाप ला मेरी पसंदीदा फिल्म है और लोग मुझे अपनी कला के जरिये दुनिया भर में जाने यही मेरी तमन्ना है।
0 क्या आप मानते है फिल्मो में कलाकारों का शोषण होता है?
00 बिलकुल नहीं होता बल्कि कलाकार अपना स्तर खुद गिरा लेते हैं। बड़े परदे पर दिखने के लिए या तो कम पैसों में काम करने या फिर मुफ्त में काम करने के लिए तैयार हो जाते हैं। कुछ कलाकार तो ऐसे है कि काम करने के लिए पैसा तक निर्माता को दे देते है।
0 आपको कैसा रोल पसंद है ?
00 मुझे चैलेंजिंग रोल पसंद है चाहे वह निगेटिव हो या पाजिटिव हो. जो भी रोल मिलता है उसमे डूबकर काम करता हूँ। कहानी के अनुसार अपने को ढ़ालता हूँ और डायरेक्टर क्या चाहता है उसके साथ तालमेल करके अपना अभिनय को जीवंत बनाता हूँ।
0 फिल्मे नहीं चलने का कारण आप क्या मानते हैं?
00 यहाँ के फिल्म निर्माता फिल्म बनाने की सही प्रक्रिया पर नहीं चलते। अच्छी कहानी हो, पात्रों का चयन सही हो। जो नहीं होता। यहाँ तो जुगाड़ से फिल्म बनती है कास्ट्यूम खुद कलाकार लातें है। ऐसे में फिल्मे कहाँ टिक पायेगी। अभी भूलन कांदा फिल्म बनने वाली है उसमे हर पात्र हीरे की तरह लिए गए हैं। ऐसा ही चयन चाहिए फिल्मो में। इस फिल्म की स्टोरी अच्छी है बनने से पहले ही तारीफ़ हो रही है। 

रंग रसिया एक उम्दा फिल्म

अनुज की लोकप्रियता रंग लायेगी 

रंग रसिया एक उम्दा फिल्म है। जो अनुज शर्मा के नायक होने के कारण और उस फिल्म का कद काफी उंचा हो गया है। इसका निर्देशन किया है पुष्पेन्द्र सिंह ने जो एक अच्छे डायरेक्टर एक्टर तो हैं ही, वे एक फिल्म निर्माता भी है। इसे उनके करियर का बेहतरीन काम कहा जा सकता है। यह एक ऐसी फिल्म है जो दर्शकों का खूब मनोरंजन करेगी, क्योकि इस फिल्म में वो सब कुछ है जो दर्शक पसंद करते है। अनुज शर्मा के साथ है मुम्बई की लेजली त्रिपाठी जो एक बेहतरीन नायिका है। अनुज फिल्म में सान्या कम्बोज के साथ रोमांस करते नजर आयेंगे। इस फिल्म में कामेडी भी है तो एक्शन भी है। गीत अच्छे हैं तो संगीत भी कर्णप्रिय हैं। अनुज छत्तीसगढ़ के सबसे लोकप्रिय नायक है जिसे सभी वर्ग ए लोग फिल्मो में देखना चाहते हैं। उनकी लोकप्रियता का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है जब कवर्धा में शूटिंग चल रही थी तब लोग उन्हें आकर घेर लेते थे। आटोग्राफ और साथ में फोटो खिचाने के आग्रह से उनकी शूटिंग में बाधा पंहुच रही थी। वहां और भी बहुत से कलाकार थे लेकिन लोगो को सिर्फ अनुज शर्मा की एक झलक चाहिए होता था। ये छत्तीसगढ़ी फिल्मो के लिए एक अच्छा संकेत है कि लोग अपने कलाकारों को जानते हैं पहचानते हैं। हीरा क्रियेशन फिल्म निर्माता अशोक तिवारी की यह दूसरी फिल्म है। श्री तिवारी ने पहली फिल्म से मिली अनुभव के बाद कोइ रिस्क नहीं लेते हुए अनुज शर्मा को ही साइन किया। उन्हें भी इस फिल्म से काफी उम्मीदें है। 

छालीवुड ही मेरी जिन्दगी है

कभी निराश नहीं होता - अरविन्द
छत्तीसगढ़ी फिल्मो के खलनायक अरविंद गुप्ता की एक्टिंग का अब सभी निर्माता निर्देशक कायल हैं। वे जितने अच्छे एक्टर हैं उतने ही मिलनसार और व्यवहारिक भी है। जिन्दगी में काफी उतार चढ़ाव देखने वाले अरविंद का कहना है कि छालीवुड ही मेरी जिन्दगी है और मै यहाँ काम करता रहूंगा। काम नहीं मिलाने पर मै निराश भी नहीं होता। छालीवुड में काम करने वाली सभी एक्टर उनके आदर्श है। क्योकि सबसे मुझे कुछ ना कुछ सीखने को ही मिलता है। मै अपने कामो से पूरी तरह से संतुष्ट हूँ। अरविंद को कभी निराशा नहीं होती । उनकी आने वाली फिल्म है-  डर्टी मया, अंधियार, हिन्दी में प्रतिशोध। डर्टी मया को लेकर अरविन्द गुप्ता बहुत ही उत्साहित है क्योकि इस अफिल्म ने उन्होंने विलेन की भूमिका अदा की है। वे कहते है कि वे नक़ल नहीं करना चाहते और अपने बलबूते पर ही आगे बढऩा चाहते हैं। अरविन्द स्कूल में ड्रामा किया करता था और आज फिल्मो के विलेन है।

उनकी आने वाली फिल्म है - डर्टी मया, अंधियार, हिन्दी में प्रतिशोध। वे कहतें हैं कि ये तीनों ही फिल्मे मेरे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। डर्टी मया कुछ सालो से बनाकर तैयार है अब तकनीक रूप से पूरी होने वाली है। अरविंद को बचपन से शौक था एक्टिंग करने का। वे कहते है कि लोगो को देखकर लगा की मुझे भी इस क्षेत्र में कुछ करना चाहिए। स्कूल में ड्रामा तो करता ही था। बाद में मुझे थियेटर का शौक हुआ। ऐसा करते करते मैंने छत्तीसगढ़ी फिल्मो की ऑर कदम बढ़ाया। अरविन्द बतातें हैं कि पिछले 16 सालों से मै इस क्षेत्र में काम कर रहा हूँ। इसके पहले हिन्दी एल्बम में काम किया है जो काफी चर्चित हुई थी। मैंने करीब 14 छत्तीसगढ़ी फिल्मो में काम किया है और कुछ एल्बम बनाये है। हिन्दी में बनी एल्बम साईं मेरे सरकार सबसे चर्चित एल्बम है जो पूरे देश में देखे और सुने जाते है। इसमें मैंने एक्टिंग भी की है। उनका कहना है कि छालीवुड में काम करने वाली सभी एक्टर उनके आदर्श है। क्योकि सबसे मुझे कुछ ना कुछ सीखने को ही मिलता है। वे अपने कामों से पूरी तरह से संतुष्ट है। अरविन्द किसी की नक़ल नहीं करना चाहते और अपने बलबूते पर ही आगे बढऩा चाहते हैं। सब उनके लिए अच्छे है पर वे किसी भी कलाकार को भी फॉलो नहीं करता। फिल्म निर्माता निर्देशक और एक्टर एजाज वारसी उनके प्रेरणाश्रोत है। उन्होंने ही उसे इस क्षेत्र में लेकर आये है और काम दिलाये उसके बाद से उन्होंने पीछे मुडकऱ नहीं देखा । फिल्म में उन्हें उनके कामो के लिए हर तरफ तारीफ़ ही मिली है। अरविन्द कभी निराश नहीं होते। उनका कहना है कि मैं सिखता रहता हूँ और कोशिश करता हूँ की मुझे काम मिलता रहे। काम नहीं मिलने पर भी मै निराश नहीं होता हूँ। 

बाबा घासीदास की जीवनी अब परदे पर

बिल्हा में चल रही है फिल्म की शूटिंग

बाबा गुरु घासीदास को एक समाज विशेष के लोग भगवान् मानते हैं। उनके कई धार्मिक सन्देश भी है। उनका जीवन बड़ा ही सात्विक था। अब उनका पूरा जीवन वृत्त बड़े परदे पर दिखाई देगा। छत्तीसगढ़ के बिल्हा में इस फिल्म की शूटिंग चल रही है। जिसका पहला शेड्यूल आज समाप्त हुआ। संदीप गर्ग निर्मित इस फिल्म का निर्देशन कर रहे हैं मनोज दीप जो छालीवूड़ के श्रेष्ठ कोरियोग्राफर भी है और उन्हें हिन्दी फिल्म डायरेक्ट कन्ने का भी अनुभव है। उनके साथ दिनेश चेल्के भी डायरेक्शन में लगे हुए हैं। फिल्म में बाबा गुरु घासीदास के जन्म से लेकर अंत तक की कहानी का बड़ी बखूबी से वार्वन किया जा रहा है। चांपा के रंजन राय पिता मंहगू दास और महाराष्ट्र की नेहा राउत माता अमरौतीन की भूमिका में है। इस फिल्म में करीब 90 कलाकार होंगे।
बाबा गुरु घासीदास का जन्म छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में गिरौद नामक ग्राम में हुआ था। उनके पिता का नाम मंहगू दास तथा माता का नाम अमरौतिन था और उनकी धर्मपत्नी का सफुरा था। गुरु घासीदास का जन्म ऐसे समय हुआ जब समाज में छुआछूत, ऊंचनीच, झूठ-कपट का बोलबाला था, बाबा ने ऐसे समय में समाज में समाज को एकता, भाईचारे तथा समरसता का संदेश दिया।  घासीदास की सत्य के प्रति अटूट आस्था की वजह से ही इन्होंने बचपन में कई चमत्कार दिखाए, जिसका लोगों पर काफी प्रभाव पड़ा। गुरु घासीदास ने समाज के लोगों को सात्विक जीवन जीने की प्रेरणा दी। उन्होंने न सिर्फसत्य की आराधना की, बल्कि समाज में नई जागृति पैदा की और अपनी तपस्या से प्राप्त ज्ञान और शक्ति का उपयोग मानवता की सेवा के कार्य में किया।   इसी प्रभाव के चलते लाखों लोग बाबा के अनुयायी हो गए। फिर इसी तरह छत्तीसगढ़ में 'सतनाम पंथ' की स्थापना हुई। इस संप्रदाय के लोग उन्हें अवतारी पुरुष के रूप में मानते हैं। गुरु घासीदास के मुख्य रचनाओं में उनके सात वचन सतनाम पंथ के 'सप्त सिद्धांत' के रूप में प्रतिष्ठित हैं। इसलिए सतनाम पंथ का संस्थापक भी गुरु घासीदास को ही माना जाता है। बाबा ने तपस्या से अर्जित शक्ति के द्वारा कई चमत्कारिक कार्यों कर दिखाएं। बाबा गुरु घासीदास ने समाज के लोगों को प्रेम और मानवता का संदेश दिया। संत गुरु घासीदास की शिक्षा आज भी प्रासंगिक है। 

थियेटरों की कमी से पिछड़ती हैं छत्तीसगढ़ी फिल्म : अशोक

0 फिल्मों में काम करते रहने की तमन्ना है 
छत्तीसगढ़ी फिल्मों में कदम रखने वाले अभिनेता अशोक खंडेलवाल की तमन्ना है कि हिन्दी फिल्मो में भी अभिनय करे। वे कहते है कि प्रमोशन की कमी और थियेटर नहीं मिलने के कारण छत्तीसगढ़ी फिल्मे अन्य भाषी फिल्मो से पिछड़ गयी है। सरकार का भी सही ढंग से सहयोग नहीं मिल पाता। जबकि छत्तीसगढ़ी फिल्मो में अपनी संस्कृति, भाषा और लोक कला का भरपूर प्रदर्शन होता है,जो लोगो के दिलो को छू जाता है। रायपुर में पढ़े लिखे अशोक ने छत्तीसगढ़ी भाषा की फिल्म अंधियार से छालीवूड़ में एंट्री की है। उनसे हमने हर पहलूओं पर बेबाक बात की।

0 आपका रुझान फिल्मो की और कैसे हुआ?
00 बचपन से ही मुझे फिल्मो का शौक रहा है। जब मै कोई फिल्म देखता था तो उसे दोहराता था। और जब बड़ा हुआ तो मैंने अपना शौक दिल में ही दबाये रखा लेकिन अब अंधियार में मुझे मौका मिला तो एक्टिंग कर ली। रवि शर्मा ने मुझे सहयोग किया और हम एक्टिंग की दुनिया में आ गए।
0 अभिनय के लिए आपने क्या किया?
00 कुछ ख़ास नहीं । रूची थी पर अभिनय नहीं किया था। स्थानीय मंचो पर ही अभिनय करता रहा है। बचपन में ही मैंने लक्ष्य तय कर लिये था कि मुझे आगे चलकर अभिनय करना है।
0 अब तक आपने कितनी फिल्मे की है?
00 अभी अभी तो छालीवूड़ में एंट्री की है। अंधियार में मुझे ब्रेक दिया है एजाज वारसी ने।
0 छत्तीसगढ़ी फिल्मे खूब चले इसके लिए और क्या चाहिए?
00 प्रमोशन खूब करना होगा, प्रचार प्रसार की कमी है। थियेटर का अभाव है। यहां के थियेटर छत्तीसगढ़ी फिल्मो को ज्यादा दिन तक चलाना नहीं चाहते। दर्शक है पर थियेटर नहीं है। सरकार ऐसा नियम बनाये की पहले हमारे फिल्मो को थियेटरों में प्रदर्शन करना अनिवार्य होगा, अन्यथा उन पर कार्रवाई होगी। तब छत्तीसगढ़ी फिल्मो का भविष्य बन पायेगा।
0 क्या हिन्दी फिल्मो में काम करने के इच्छुक है।
00 हाँ जरूर! अगर मौका मिला तो जरूर अपने अभिनय को दिखाना चाहूँगा।
0 फिल्मो में अभिनय के अलावा और क्या करना चाहेंगे ?
00 अभिनय ही करना चाहूँगा। इसी क्षेत्र में आगे बढना चाहता हूँ। लोग मुझे एक कलाकार के रूप में जाने यही तमन्ना है।