गुरुवार, 9 मई 2019

फिल्म महुँ कुंवारा तहँ कुंवारी

 कॉमेडी, एक्शन, रोमांस के साथ सशक्त संदेश देता है
 फिल्म समीक्षा - अरुण बंछोर
एक के बाद एक हिट फिल्मों की लाइन लगा देने वाले मनोज वर्मा की सबसे कसी हुई फिल्म है महुँ कुंवारा तहँ कुंवारी । इसका एक-एक सीन किसी बॉलीवुड फिल्म से कम नहीं है। कमर्शियल जोन में एंटरटेनर फिल्म बनाना सबसे मुश्किल काम होता है। कमर्शियल फिल्म का फॉर्मूला साफ है, एक नायक होता है जो सुपर हीरो होता है, एक नायिका होती है जो हीरो के साथ गाने गाती है और एक खलनायक होता है जिस पर जीत हासिल करके हीरो हीरो बनता है। लेकिन इस फॉर्मूले पर भी लगातार नयापन देते हुए मनोरंजक फिल्म बनाना एक बहुत मुश्किल काम है लेकिन मनोज वर्मा ने यह कर दिखाया है. दो हीरो को लेकर एक ऐसी फिल्म बनाई है जो शुरू से अंत तक दर्शकों को बोर नहीं होने देती। सन्देश है कुंवारा लोगों को जो समस्याएं जीवन में आती है उसका नजारा। कॉमेडी के माध्यम से सारी समस्याएं कहती है फिल्म और समस्याओं का हल करने के लिए तिकड़मबाजी जो दिखाया गया है वह काबिलेतारीफ है. भूमिका निभाने में आकाश सोनी सब पर भारी है. लड़की के किरदार को जीने का अंदाज भी शानदार है. महुँ कुंवारा तहँ कुंवारी की कहानी में भले ही नयापन ना हो मगर एक अलग ट्रीटमेंट के साथ मनोज वर्मा ने पूरी तरह मनोरंजक फिल्म बनाई है। फिल्म के एक-एक फ्रेम पर उनकी पकड़ साफ नजर आती है। फिल्म की भव्यता के लिए जाने जाने वाले मनोज वर्मा ने इस फिल्म को भी भव्यता की चरम पर लाकर खड़ा किया है।
फिल्म देती है सशक्त संदेश
फिल्म में कॉमेडी है, एक्शन है, रोमांस है और साथ ही साथ एक सशक्त संदेश भी है। अभिनय की बात करें तो एक कदम आगे जाते आकाश को स्क्रीन पर देखते ही बनता हैद्य वह इमोशन हो या फिर कॉमेडी एक्शन आकाश हर पहलू पर 100 प्रतिशत खरे उतरते हैं। उनके इस यादगार परफॉर्मेंस से एक बात तय हो गई कि महुँ कुंवारा तहँ कुंवारी का सफर यहां नहीं रुकेगा। एल्सा घोष छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक नायाब तोहफा बनकर आई हैं जिसे उन्होंने इस फिल्म से साबित कर दिया है। निशांत उपाध्याय एक अलग अंदाज में नजर आते हैं। उनको देखकर एहसास होता है यह पात्र सचमुच इतना खतरनाक हो सकता है,साथ ही उतना ही मानवीय भी। पुष्पेंद्र सिंह ने भी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। टेक्सी ड्रायवर बने संजय महानंद अपने किरदार को एक अलग स्तर पर ले जाते हैं। उनके एक्शन डायलॉग डिलवरी सब कुछ बेहतर है. संजय सिद्ध करता है कि वो सच में एक सुलझे हुए कलाकार हैं. माहिरा खान अनुराधा दुबे , सरला सेन , देवेंद्र पांडे समेत बाकी सभी कलाकारों ने अपने अपने किरदारों में जान फूंकी है। कमर्शियल सिनेमा के रग रग से वाकिफ हो चुके मनोज वर्मा ने नए कलाकारों की एंट्री करा कर एक्स्ट्रा तालियों और सीटियों का इंतजाम कर लिया। नए अभिनेता आकाश को देख कर आप खुद को सीटी बजाने से नहीं रोक पाएंगे। संगीतकारों ने शानदार संगीत दिया है। सिनेमैटोग्राफी फिल्म को ना सिर्फ भव्य बनाती है बल्कि मंत्रमुग्ध कर देती है। कुल मिलाकर महुँ कुंवारा तहँ कुंवारी एक बेहतरीन मनोरंजक फिल्म है जिसका आनंद आप सपरिवार उठा सकते हैं। कहानी हम नहीं बता रहे हैं इसके लिए आपको सिनेमाघरों तक जाना होगा। बस इतना कह सकतें हैं की फिल्म एक बार नहीं बार बार देखने लायक है.

कचरा - बोदरा में होंगी मुस्कान और गुलशन साहू की जोडी

- अरुण कुमार बंछोर
रायपुर। सुंदरानी प्रोडक्शन हाउस की नई फिल्म कचरा - बोदरा के लिए अभिनेत्री मुस्कान साहू के बाद अभिनेता के लिए गुलशन साहू को साईंन किया गया है.छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध कलाकार उपासना वैष्णव ,

उर्वशी साहू व छत्तीसगढ़ी फिल्मों के आलराउंडर कलाकार प्रदीप शर्मा इस फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आएंगे। इस फिल्म में कई नए कलाकारों को छालीवुड के भीष्म पितामह मोहन सुंदरानी ने अभिनय का मौका देने जा रहे हैं।  इस फिल्म की शूटिंग रायपुर एवं उसके आसपास ग्रामीण अंचलों में प्रारंभ होगी। स्क्रिप्ट , कहानी गीत एवं संगीत का लगभग कार्य पूरा हो चुका है। फिल्म के निर्देशक उत्तम तिवारी ही होंगे जिन्होंने सुंदरानी प्रोडक्शन हाउस की दो फि़ल्में आई लव यू और आई लव यू 2 का भी निर्देशन किया है। इस फिल्म के लिए 12 और कलाकारों का महत्वपूर्ण अभिनय के लिए चयन करना बाकी है.

बॉलीवुड की तरह अब टकराएंगे छालीवुड की फि़ल्में

एक साथ कई फिल्मे होंगी रिलीज
छालीवुड भी अब बॉलीवुड की राह पर है. फि़ल्में इतनी बनने लगी है जितना छत्तीसगढ़ में थियेटर नहीं है. यही कारण है कि अब यहां की फि़ल्में भी आपस में टकराएंगे। 2018 में 32 फिल्मे बनी और मात्रा 14 फि़ल्में ही
रिलीज हो पाई. इस साल एक ही तारीख पर कई फिल्मे रिलीज करने का ऐलान किया गया है. यह अलग बात है कि फिल्म को टाकीज ना मिले। 26 अप्रैल को महुँ कुंवारा तहूँ कुंवारी एक साथ 22 टाकीजों में लगेगी। 16 जून को दो फिल्मे हंस झन पगली फंस जाबे और राजा भैया एक आवारा रिलीज होने जा रही है. हंस झन पगली फंस जाबे के नायक मन कुरैशी है तो राजा भैया एक आवारा के नायक अनुज शर्मा है. यही नहीं 19 जुलाई को तो तीन फिल्मे रिलीज करने का ऐलान निर्माताओं ने किया है. निर्माता अशोक तिवारी की रंगोबती , अखिलेश मिश्रा की असली कलाकार और तीसरी फिल्म है माधो बैंड वाला। रंगोबती और  माधो बैंड वाला ने तो टाकीज भी बुक कर लिया है. जुलाई में इन तीन फिल्मो के बाद निर्माता मोहन सुंदरानी ने अपनी फिल्म आई लव यू 2 अगस्त में और कचरा बोदरा नवंबर में लाने का ऐलान कर दिया है.

साल 2019 छत्तीसगढ़ी फिल्मो के लिए रहेगा बेहद खास।

यू तो छत्तीसगढ़ी फिल्मे और उनके कलाकारों का संघर्ष बहुत लंबा रहा है, छत्तीसगढ़ के निर्माता, निर्देशक, कलाकार सभी शुरुआत से ही बहुत संघर्ष के दौर से गुजर रहे है, और अपनी मांगों को लेकर भी सरकार से काफी लंबे समय से संघर्ष कर रहे है, बरहाल 2018 में नई सरकार ने छत्तीसगढ़ की बागडोर सम्भाली है, अब फिल्मो से जुड़े लोगों की उम्मीद एक बार फिर जोर पकड़ती नजऱ आ रही है, ये समय ही तय करेगा कि सरकार इस दिशा में उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है। हम बात कर रहे है संघर्ष भरे छत्तीसगढ़ी फिल्मो की, निश्चित तौर पर वर्ष 2019 छत्तीसगढ़ी फिल्मो के लिए एक अहम साल गुजरने वाला है, एक तरफ नई सरकार से ढेरो उम्मीदे है, दूसरी तरफ लंबे समय के अंतराल के बाद छत्तीसगढ़ी फिल्मो के तीन दिग्गज निर्देशकों की फिल्में भी वर्ष 2019 में रुपहले पर्दे पर आएगी। पहले बात करते है सतीश जैन जी की जिन्होंने छत्तीसगढ़ी फि़ल्म इंडस्ट्री में ऑक्सीजन भरने का काम किया है , जिनकी पिछली सारी फिल्में हिट रही, पर फिर वो भोजपुरी फि़ल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हो गए और अब 8 साल के बाद उन्होंने फिर से छत्तीसगढ़ी फि़ल्म का निर्देशन किया है प्तहस झन पगली मया हो जाहिप्त ये फि़ल्म वर्ष 2019 में रिलीज़ होनी है। बात करे प्रेम चंद्राकर जी की, वो भी लंबे समय के बाद अपनी बहुप्रतीक्षित फि़ल्म लेकर आ रहे है प्तलोरी के चंदाप्त जिसकी शूटिंग खत्म हो चुकी है।
मनोज वर्मा भी एक नाम है इस इंडस्ट्री में जिन्होंने छत्तीसगढ़ को हिट फिल्में दी है, हाल ही में उनकी फिल्म प्तभूलनप्त को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचो काफी तारीफ मिली और पुरुस्कार भी जीत चुकी है वे भी अभी जोर शोर से अपनी नई फिल्म की शूटिंग में व्यस्त है प्ततहू कुँवारा महू कुँवारीप्त ये फि़ल्म भी वर्ष 2019 में आएगी। इस तरह तीन बड़े निर्देशक एक साथ 2019 मे अपनी अपनी फिल्मे लेकर आ रहे है ये निश्चित ही छत्तीसगढ़ी फिल्मो के लिए अच्छी सूचना है।दूसरी ओर नए और पुराने निर्माता भी वर्ष 2019 में अपनी फिल्मे लेकर आ रहे है ।बात करे मोहन सुंदरानी जी की 2018 की उनकी हिट फिल्म प्तद्ब द्यश1द्ग ङ्घशह्वप्त का सीक्वल लेकर आने वाले है। मोहित साहू नये निर्माताओं में बहुत बड़ा नाम है 2019 वो भी 3 नये फि़ल्म ला रहे है प्तभोकवा 2प्त प्तद्यश1द्ग दिवानाप्त और मोर जोड़ीदार 2प्त ये तीनो फिल्मे भी 2019 में आयंगी। नए निर्माताओं में नटराज बंझोर भी प्तप्रेम रंगप्त लेकर आ रहे है।इस तरह और भी 15 – 20 फिल्मे नए , पुराने निर्माता लेकर आ रहे है। साथ ही वर्ष 2019 में बहुत सारे नए कलाकार निर्माता, निर्देशक भी इंडस्ट्री को मिलने जा रहे है। अब देखना ये है कि वर्ष 2019 छत्तीसगढ़ी फिल्मो के लिए कैसा बीतता है जो निश्चित तौर पे छत्तीसगढ़ी फिल्मो की दिशा और दशा तय करेगा।

नाचा की विविधता से परिचित करायेगी फिल्म 'मंदराजी"

'नाचा छत्तीसगढ़ का पारंपरिक लोकनाट्य है। इस लोकनाट्य को ऊंचाई प्रदान करने में दाऊ मंदराजी का अतुलनीय योगदान रहा। आने वाली पीढ़ी छत्तीसगढ़ लोकनाट्य 'नाचा की विविधिता और खूबसूरती जानने के
साथ ही इस परंपरा के पुराधा रहे दाऊ मंदराजी के जीवन मूल्यों से परिचित हो सके। इसके लिए किशोर सारवा और नंद किशोर साहू ने मिलकर संयुक्त रुप से छत्तीसगढ़ी फिल्म 'मंदराजी का निर्माण किया है। इस फिल्म का निर्देशन विवेक सारवा ने किया है। फिल्म में दाऊ मंदराजी के मुख्य किरदार को छालीवुड के सुपर स्टर करन खान ने निभाया है। फिल्म बनकर तैयार है और आने वाले 28 जून को छत्तीसगढ़ के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म में अन्य कलाकारों में ज्योति पटेल, लता ऋषि चंद्राकर, डॉ. डीपी देशमुख, हेमलाल कौशल, नरेश यादव, उर्वशी साहू प्रमुख रुप से शामिल हैं। गीतकार लक्ष्मण मस्तुरिया है और संगीत गोविंद साव ने दिया है। स्वर कविता वासनिक, महादेव हिरवानी, कुलेश्वर ताम्रकर और प्रभु सिन्हा के हैं। फिल्म पूरी तरह से पारिवारिक है। निर्माताद्वय किशोर सारवा और नंद किशोर साहू को उम्मीद है कि यह फिल्म लोगों को पसंद आयेगी।

विविधताओं से भरा छत्तीसगढ़ी लोक संगीत दुनिया में सर्वश्रेष्ठ

जिस तरह से छत्तीसगढ़ प्राकृतिक विविधताओं से संपन्न है ठीक उसी प्रकार यहां की लोक संगीत विविधताओं से भरी पड़ी है। छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा में जन्म से लेकर मृत्यु तक हर संस्कार के लोक संगीत हैं। यह लोक संगीत न केवल मनोरंजन के लिए हैं बल्कि संस्कार प्रदान करने के साथ ही प्रकृति के सत्य की तह तक जोडऩे वाले हैं। यह कहना है कि छत्तीसगढ़ी फिल्म 'महू कुंवारा तहु कुवारीÓ के निर्देशक मनोज वर्मा का। मनोज वर्मा छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री में अजीम शख्सियत के रुप में पहचाने जाते हैं। उन्हें राज्य में फिल्म और कला के क्षेत्र कासर्वश्रेष्ठ सम्मान किशोर साहू सम्मान मिल चुका है। फिल्म और लोककला के क्षेत्र में इतनी ऊंचाई हासिल करने के बाद भी मनोज वर्मा संगीत की बारीकियों को समझने के लिए इंदिरा कला संगीत
विश्वविद्यालय खैरागढ़ से पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री हासिल कर रहे हैं। इसमें उन्हें देश के सभी राज्यों के लोकसंगीत का अध्ययन कराया गया है। श्री वर्मा ने खास बातचीत में छत्तीसगढ़ी लोक संगीत को दुनिया में सर्वश्रेष्ठ बताया। इसके पीछे की वजह को विस्तार से बताते हुए उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत वृहद और विविधताओं से भरी पड़ी है। यहां केवल कर्मा की प्रस्तुति 30 प्रकार से की जाती है। इसी तरह से ददरिया, नाचा व अन्य संगीत की परंपराएं हैं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ का लोक संगीत केवल मनोरंजन से नहीं बल्कि संस्कार और जीवन के सत्य से जुड़ा हुआ है। मनोज वर्मा की पारिवारिक पृष्ठभूमि संगीत के क्षेत्र से नहीं रही। उन्होंने शिक्षा भी अर्थशास्त्र विधा में प्राप्त की है पर संगीत के प्रति उनके लगाव ने उन्हें फिल्म और निर्देशन के क्षेत्र में खींच लाया। वह बताते हैं कि वर्ष 2007 में उन्होंने 'बैरÓ नाम से छत्तीसगढ़ी फिल्म का निर्माण किया था। इस फिल्म के वह निर्माता और निर्देशक दोनों रहे। तब से अब तक वह पांच फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं। छठवीं फिल्म के रुप में हाल ही में उन्होंने छत्तीसगढ़ी फिल्म 'महू कुंवारा तहु कुवारीÓ का निर्देशन किया है। यह फिल्म बनकर तैयार है और 26 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म के बारे में उन्होंने बताया कि यह पूरी तरह से कॉमेडी पर आधारित है। यह युवा वर्ग को बेहद पसंद आयेगी।
बदलते परिवेश के साथ फिल्मों को भी बदलना होगा
छत्तीसगढ़ी फिल्म की स्वीकार्यता और सफलता के सवाल पर मनोज वर्मा ने साफ कहा कि जिस तरह से आधुनिकता की दौड़ में समाज का परिवेश बदल रहा है उससे तालमेल करते हुए फिल्मों को भी बदलना होगा। अब पुराना ट्रेंड लोगों को पसंद नहीं। इंटनेट की गांवों तक पहुंच ने युवा वर्ग को बेहद जागरुक कर दिया है। हमें ऐसी फिल्में बनानी होगी जिससे आज का युवा उससे खुद को कनेक्ट कर सके। तभी फिल्मों की स्वीकार्यता भी होगी और सफलता भी मिलेगी।

फिल्म 'हंस झन पगली फंस जाबे

छत्तीसगढ़ी सिनेमा के दर्शकों को पसंद आयेगी
अरसे बाद छत्तीसगढ़ी फिल्मों के मशहूर निर्देशक सतीश जैन एक बार फिर फिल्म 'हंस झन पगली फंस जाबेÓ के निर्देशन को लेकर चर्चा में हैं। ऐसा माना जाता है कि सतीश जैन छत्तीसगढ़ी सिनेमा के दर्शकों की नब्ज समझते हैं। उनके द्वारा निर्देशित यह फिल्म आने वाले 14 जून को रिलीज होगी। इससे पहले 14 अप्रैल के इस फिल्म के गानों को यू-ट्यूब पर लांच किया जायेगा। इस फिल्म के निर्माता छोटेलाल साहू और कार्यकारी निर्माता टिकेश्वर प्रसाद साहू का कहना है कि यह फिल्म दर्शकों को पसंद आयेगी। पिछले दिनों इस फिल्म के पोस्टर का विमोचन एवीएम स्टूडियों में किया गया था। फिल्म में नायक के किरदार में अभिनेता मन कुरैशी और नायिका के रोल में  अभिनेत्री अनुकृति चौहान नजर आएंगी। फिल्म को पारिवारिक पुट देने के साथ ही इसमें रोमांस, कॉमेडी और एक्शन का भी समावेश किया गया है। फिल्म के अन्य कलाकारों में आशीष शैन्द्रे, पुष्पेन्द्र सिंह, डॉ. अजय सहाय, विक्रम राज, प्रदीप शर्मा, उपासना वैष्णव, अनुराधा दुबे, निशांत उपाध्याय, मनोज दीप, क्राति दीक्षित, हेमलाल कौशल, उषा विश्वकर्मा व अमित शर्मा शामिल हैं। संगीत सुनील सोनी ने दिया है। संवाद मनोज कुशवाहा ने किया है। कोरियोग्राफी निशांत उपाध्याय की है। फिल्म में एक्शन अरूण जॉनसन (तम्मी अन्ना) का है। फिल्म का छायांकन तोरण राजपूत और प्रोडक्शन डिजाइन आलेख चौधरी का है। बता दें सतीश जैन द्वारा निर्देशित फिल्में मोर छंईहा भुंइया, झन भूलो मां बाप ला, मया और लैला टिपटॉप छैला अंगूठा छाप जैसी फिल्में सुपरहिट रही हैं।