शुक्रवार, 29 सितंबर 2017

फ़िल्मी खबरें

छत्तीसगढ़ की प्रिया की छोटे परदे पर धूम
छत्तीसगढ़ की बेटी प्रिया शर्मा आज छोटे परदे पर अपने अभिनय का जादू बिखेर रही है। सीआईडी जैसे धारावाहिक में काम करना सबका सपना होता है प्रिया को मुम्बई जाते ही सीआईडी में काम करने का मौका मिला. ससुराल सिमर का, अकबर बीरबल, जय श्री अग्रसेन जैसी शारावाहिक कर रही प्रिया का कहना है कि लोग मुझे मेरे अभिनय से पहचाने बस यही तमन्ना है। वे कहती है कि छत्तीसगढ़ी फिल्मो के लिए राज्य सरकार को बेहतर से बेहतर करना चाहिए। प्रिया को दु:ख इस बात का है कि आज के युवा अपनी भाषा के प्रीति रुचि नहीं रखते।
त्रिवेणी अब 9 नवंबर को आएगी
पीवीबी के बैनर तले बनी फिल्म त्रिवेणी अब 9 नवंबर को रिलीज होगी।पहले यह फिल्म आज यानी 29 नंवंबर को रिलीज होने वाली थी, लेकिन सेंसर बोर्ड ने खूनखराबे वाली दृश्य पर आपत्ति जताई है. निर्माता चंद्रशेखर
चौहान भी उस दृश्य को हटाने के लिए तैयार नहीं है और सेंसर बोर्ड से टकराने के मूड में है.यह फिल्म महिला प्रधान है,जिसमे महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों को दर्शाया गया है. प्रताडि़त महिलाओं पुरुषों को सबक सिखाती है. फिल्म में चंद्रशेखर चौहान, डॉ अजय सहाय, उषा विश्वकर्मा, पूजा देवांगन, मेहर, अहाना दिखाई देंगे। फिल्म का डायरेक्शन एजाज वारसी का है.
डिब्बे में गयी शीतला माई
डायरेक्टर मनोजदीप के निर्देशन में बन रही जय शीतला माई एक बार फिर डब्बे में चली गयी. लगता है शीतला माई छालीवुड से नाराज है क्योकि जब जब फिल्म बनने को आई तब तब फिल्म का काम रूका। डायरेक्टर मनोजदीप ने जब पहली बार शीतला माई की शूटिंग शुरू की तब कहानीकार और स्क्रिप्ट लेखक ने आपत्ति की. मनोजदीप ने फिर इसे बंद कर नई कहानी लेकर शीतला माई की शूटिंग शुरू। अब कलाकारों के बीच मतभेद होने के कारण यह फिल्म बंद हो गयी. इसकी काफी शूटिंग हो चुकी है.अब आगे इसकी शूटिंग होने की संभावना लगभग ख़त्म हो गयी है. इस फिल्म में जीत शर्मा, राजेश पंडया, दिव्या यादव, ज्योति वैष्णव, श्वेता शर्मा कलाकार है.
आशीष शेंद्रे छाये रहें साल भर
छालीवुड के सीनियर कलाकार आशीष शेंद्रे मनोज वर्मा की फिल्म भूलन द मेज करने के बाद साल भर छाये रहेंगे। वे अपने अभिनय से काफी संतुष्ट हैं। वे एक मंजे हुए कलाकार है उन्हें कला अपने पिताजी से विरासत में मिली है। आशीष शेंद्रे के नाम कई हिट फिल्मे है। वे हर प्रकार की भूमिका को निभाने में माहिर है। वे छालीवुड के कादर खान है। छत्तीसगढ़ी फिल्मों में अपनी अभिनय का लोहा मनवा चुके अभिनेता आशीष शेंद्रे की तमन्ना है कि हिन्दी फिल्मो में भी अभिनय करने की है। भूलन को वे अपने जिंदगी का सबसे बेहतरीन उपलब्धी मानते हैं। साल 2017 में सबसे व्यस्त रहने वाले कलाकार आशीष शेंद्रे ही हैं.
दो बहनों की कहानी है मोर मया ला राखे रहिबे
छत्तीसगढ़ी एवं भोजपुरी में बनकर तैयार फिल्म मोर मया ला राखे रहिबे एक पारिवारिक फिल्म है जिसमे दो बहनों की कहानी को बेहतर ढंग से चित्रित किया जाएगा। यह फिल्म अगले महीने रिलीज होने जा रही है। बाबी खान , राजेश नायक, अक्षरा सिंह, प्रतिभा पांडे, शैलेन्द्र साव , शैलेन्द्र भट्ट, श्वेता शर्मा, ललित उपाध्याय एवं अनुराधा दुबे मुख्य भूमिका में है। भोजपुरी में अविनाश मिथलेश और छत्तीसगढ़ी में राजेश नायक इस फिल्म का निर्देशक हैं। एबी फिल्म्स के बेनर तले बनी इस फिल्म के कैमरामेन तोरण राजपूत हैं। इस फिल्म के ड्रामा पोरशन की शूटिंग तरपोंगी में और क्लाईमेक्स की शूटिंग माढर में हुई है। फिल्म के सहायक निर्देशक भूपेन्द्र चंदनिया है।
सजना साथ निभाबे में एलीना
छत्तीसगढ़ी फिल्म सजना साथ निभाबे में छालीवुड की नायिका एलीना डेविड मसीह भी नजर आयेंगी। इस फिल्म की अधिकाँश शूटिंग डोंगरगढ़ में की गयी हैं। एलीना इस फिल्म में उर्वशी साहू की बेटी की भूमिका में हैं। एलीना को इस फिल्म से बहुत ही उम्मीद है। वे कहती है कि फिल्मों में अपनी भूमिका को इंज्वॉय करती
हूँ। जो भी भूमिका मिलती है उसमे डूब जाती हूँ और दिल से पूरा करती हूँ ताकि लोग मेरे अभिनय को सराहे। बचपन से ही मेरी रूचि कला के क्षेत्र में रही है। मुझे गाने का बहुत शौक था। टीवी रेडियो में गाने देखकर सुनकर मुझे भी वैसे ही बनने की इच्छा होती थी। बचपन से ही उनकी रूचि कला के क्षेत्र में रही है। उन्हें एक्टिं का बहुत शौक था। टीवी देखकर उसे भी वैसे ही बनने की इच्छा होती थी। और आज वे सफलता के मुकाम पर है।

फिल्म प्रेम के बंधना का इन्तजार

अनुज शर्मा हैं मुख्य भूमिका में
छत्तीसगढ़ फिल्म प्रेम के बंधना में सुपर स्टार अनुज शर्मा सहित कई बड़े कलाकार अपना जलवा दिखाते नजर आएंगे। बिलासपुर के तखतपुर में फिल्म की शूटिंग हुई थी जिसके निर्माता- अशोक सिंह ठाकुर एवं निर्देशक- शिवनरेश केशरवानी हैं । फिल्म में मुख्य भूमिका में अनुज शर्मा, लवली अहमद की जोड़ी एवं सेकेण्ड लीड में बिलासपुर के उभरते कलाकार अशरफ अली और सनम परवीन की जोड़ी नजर आएगी।
सहायक कलाकारों में प्रदीप शर्मा, अनिल शर्मा, उपासना वैष्णव, अरुण बंछोर ,चन्द्रकला तिवारी, धर्मेंद्र चौबे, हेमलाल कौशल, संतोष निषाद, संतोष सारथी, श्वेता शर्मा, सरला सेन , पुष्पेंद्र सिंह जैसे कलाकार हैं. इस फिल्म के निर्देशक शिवनरेश केशरवानी इसके पहले भी मोहनी, और चंदू अऊ चांदनी जैसी बड़ी फिल्म बना चुके हैं।। चंदू अऊ चांदनी में तो उन्होंने बॉलीवुड के तीन बड़े कलाकार स्व.रज्ज़ाक खान, मुश्ताक खान एवं सहजाद खान को लेकर काम कर चुके हैं। और इस बार फिर छत्तीसगढ़ के सभी बड़े स्टार कास्ट को लेकर प्रेम के बंधना बनायें हैं। इस फिल्म की सभी गाने की रिकॉर्डिंग कटक में पूरी की गयी है जिसमे छत्तीसगढ़ के सभी बड़े गायक गायिका के सांथ बॉलीवुड के प्रसिद्ध गायक उदित नारायण ने भी इस फिल्म के गानों को अपने स्वर से सजाया हैं।फिल्म के एक गाने बैंकाक में शूट किये गए हैं.

लगन ने बनाया दीपक को एक्टर

 भोजपुरी फिल्म की तैयारी में जुटे
- श्रीमती केशर सोनकर
मन में दृढ़ इच्छा और लगन हो तो कोइ भी काम असम्भव नहीं होता। जो मन में ठान ले उसे पूरा करके ही रहता है। यह साबित किया है दीपक देवांगन ने। छालीवुड में काम करने वाली सभी एक्टर उनके आदर्श है।
उनका मानना है कि सबसे मुझे कुछ ना कुछ सीखने को ही मिलता ही है। वे अपने कामो से पूरी तरह से संतुष्ट है। दीपक को कभी निराशा नहीं होती और ना ही वे किसी की नक़ल नहीं करना चाहते , अपने बलबूते पर ही आगे बढऩा चाहते हैं। दीपक रोज 15 रुपये कमाकर अपनी पढ़ाई पूरी की और आज वे बड़ी कंपनी में रीजनल मैनेजर है. उनके पिताजी आज भी सब्जी बेचने का काम करते हैं. दीपक ने दो फिल्मे की है और बतौर हीरो उनकी तीसरी फिल्म तहार दुपट्टा सरक गईल की शूटिंग जल्द शुरू होने वाली है.दीपक से हमने हर पहलुओं पर बात की है. पेश है बातचीत के सम्पादित अंश.
आपको एक्टिंग के प्रति कैसे दिलचस्पी हुई ?
बचपन से शौक था एक्टिंग करने का। लोगो को देखकर लगा की मुझे भी इस क्षेत्र में कुछ करना चाहिए।फिल्म छइयां भुईंयां देखी तब से मन में लगन जागी।
कैसे और कहाँ से आपने एक्टिंग का सफर शुरू किया?
बचपन में मै स्कूल में ड्रामा किया करता था। बाद में मुझे नाटकों का शौक हुआ। ऐसा करते करते मैंने छत्तीसगढ़ी फिल्मो की ऑर कदम बढ़ाया।
सूना है आपने बहुत संघर्ष किया है?
जी हाँ! मैंने बचपन में सोनपापड़ी बेचा करता था.रोज 15 रुपये मिला करते थे जिससे मैंने पढ़ाई की. मेरे पिताजी आज भी सब्जी का धंधा करते हैं.
फिल्मों में काम करते आपको कितना वक्त हो गया ?
पिछले कुछ सालों से ही मै इस क्षेत्र में काम कर रहा हूँ। मेरी पहली फिल्म जुग जुग बंधना है ,फिर प्रेम छत्तीसगढिय़ा में सेकण्ड लीड रोल किया।
अब तक की आपकी उपलब्धी क्या है?
मैंने 3 छत्तीसगढ़ी फिल्मो में काम किया है।अभी एक भोजपुरी फिल्म तहार दुपट्टा सरक गईल की शूटिंग जल्द शुरू होने वाली है.
आप छत्तीसगढी फिल्मों में अपना आदर्श किसे मानते है?
छालीवुड में काम करने वाली सभी एक्टर उनके आदर्श है। क्योकि सबसे मुझे कुछ ना कुछ सीखने को ही मिलता है।
क्या आप अपने कामों से संतुष्ट हैं?
हाँ, मैं अपने कामों से पूरी तरह से संतुष्ट हूँ। जुग जुग बंधना मेरे जीवन की सबसे बेहतर फिल्म है।
आप किस कलाकार को फॉलो करते है?
00 मैं किसी की नक़ल नहीं करना चाहते और अपने बलबूते पर ही आगे बढऩा चाहते हैं। सब मेरे लिए अच्छे है पर मै किसी को भी फॉलो नहीं करता।

गुरुवार, 21 सितंबर 2017

मोबाइल ने धीर को बनाया कलाकार

एक्टिंग,रैम्पवॉक , मॉडलिंग में है माहिर
कहतें हैं मोबाइल से खेलना बच्चों के लिए बहुत ही हानिकारक है पर धीर उपारकर एक ऐसा मासूम बालक है जिसे मोबाइल ने ही एक कलाकार बना दिया। मोबाइल से खेलते खेलते धीर उपारकर एक्टिंग, रैम्पवॉक , मॉडलिंग में महारत हासिल कर ली है. मात्रा 4 साल की उमरी में धीर ने कई अवार्ड और सम्मान जीते है.उनके घर में ऐसा कोइ माहौल नहीं है.माँ प्रियंका उपारकर एक गृहणी है और पापा का कला के क्षेत्र से कोइ नाता नहीं है.हाँ स्कूल में धीर जरूर सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया करता था.पापा प्रवीण उपारकर बताते है कि धीर को घर में कभी भी ऐसा कोइ माहौल नहीं मिला। बस मोबाइल से खेला करते थे.ऐसा करते करते वह रेनवॉक करने लगा फिर टीवी देखकर कलाकारों का नक़ल करने लगा.कब धीर एक्टिंग में माहिर हो गया पता नहीं चला.उनकी रूचि को देखते हुए स्पर्धाओं में हमने शामिल  कराया उसका परिणाम बेहतर मिला, धीर अब तक कई एवार्ड जीत चुका है.मम्मी प्रियंका उन्हें भरपूर साथ देती है उनका मानना है कि उनकी रूचि कला में है इसलिए जरूरी है कि बच्चो अपने टैलेंट को अपनी विशेषता बनाएं।

सुमन की छालीवुड में धमाकेदार वापसी

 फि़ल्मी दुनिया में ही कॅरियर बनाएगी
- श्रीमती केशर सोनकर
मन में दृढ़ इच्छा और लगन हो तो कोइ भी काम असम्भव नहीं होता। जो मन में ठान ले उसे पूरा करके ही रहता है। यह कर दिखाया है सुमन कोसरे(कश्यप) ने। छत्तीसगढ़ के भिलाईनगर में पली बढ़ी सुमन कोसरे ने अपनी छोटी सी उम्र में एक बढ़ी उपलब्धी हासिल कर ली है। छइयां भुईंया, मयारू भौजी जैसी फिल्मो में काम कर चुकी है। फि़ल्मी दुनिया में कॅरियर बनाने की इच्छा रखने वाली सुमन कहती है कि उनका मकसद
छालीवुड में ही नाम कमाने की है। दूरदर्शन की धारावाहिक से सुमन ने अपने कॅरियर की शुरुवात की थी, फिल्मो में आई फिर आठ साल इस इंडस्ट्री से दूर रही.अब वे फिर छालीवुड में धमाकेदार एंट्री करने जा रही है.चौरां मा गोंदा रसिया, मोर बारी मा पाताल उनका पाह;ला एल्बम है जो खूब धूम मचाई थी.खूबसूरत सुमन ने कला के क्षेत्र में किसी से प्रेरणा नहीं ली है और अपने बलबूते ही बुलंदियां छूने लगी है। सुमन छालीवुड में सभी प्रकार की भूमिका निभाना चाहती है ताकि उन्हें कटु अनुभव हो जाए। वे कहती है कि छत्तीसगढ़ी फिल्मो में गुणवत्ता हो तो जरूर थियेटरों में चलेगी। 7 साल की उम्र में पहला स्टेज शो और 11 साल की उम्र में पहला एल्बम करने वाली सुमन अब फिल्मो में ही अपना देखती है.
0 आपको एक्टिंग का शौक कब से है ?
00 मुझे एक्टिंग का शौक बचपन से ही रहा है। स्कूल में नाटकों में भाग लिया करती थी फिर नाटकों में किया। जब जब टीवी देखती थी तब तब मुझे लगता था कि मुझे भी कुछ करना चाहिए ।
0 छालीवुड की क्या सम्भावनाये है?
00 बेहतर है। आने वाले समय में यहां की फिल्मे बॉलीवुड की तरह ही चलेंगी।यहां फिलहाल दर्शकों की कमी है। लोगो में अपनी भाषा के प्रति वो रूचि नहीं है जो होनी चाहिए । थियेटरों  की कमी को सरकार पूरा करे।
0 तो छालीवुड की फिल्मे दर्शकों को क्यों नहीं खीच पा रही है?
00 क्योकि यहां की फिल्मो में बहुत सारी कमियां होती है। फिल्मो में वो गुणवत्ता नहीं होती जो यहां के लोगो को चाहिए।
0 फिर मौका कैसे मिला और आपके प्रेरणाश्रोत कौन है ?
00 मेरा कोई रोल मॉडल नहीं है। मेरे पापा मम्मी ही मेरे प्रेरणाश्रोत है। लोगो ने मेरा अभिनय देखा और फिल्मो में मौका दिया। पापा रवि कश्यप ही मेरे आदर्श है जो हर पल मेरे साथ होते है।
0 कभी आपने सोचा था की फिल्मो को ही अपना कॅरियर बनाएंगे ?
00 हाँ ! शुरू से ही मै एक्टिंग को कॅरियर बनाने की सोचकर चली हूँ। अब इसी लाईन पर काम करती  रहूंगी।
0  छालीवुड फिल्मो में आपको कैसी भूमिका पसंद है या आप कैसे रोल चाहेंगे।
00  मैं हर तरह की भूमिका निभाना चाहूंगी , लेकिन सीरियस रोल ज्यादा पसंद है।
0 सरकार से आपको क्या अपेक्षाएं हैं?
00 सरकार छालीवुड की मदद करे। टाकीज बनवाए, नियम बनाये। छत्तीसगढ़ी फिल्मो को सब्सिडी दें ताकि कलाकारों को भी अच्छी मेहनताना मिल सके।
0 आपका कोई सपना है जो आप पूरा होते देखना चाहती हैं?
00 छालीवुड में कुछ करके दिखाना चाहती हूँ। अपने कामो और कला से खूब नाम कमाना चाहती हूँ.

मंगलवार, 6 जून 2017

फिल्म विकास बोर्ड पर क्या कहते है फिल्मकार

छत्तीसगढ़ के कलाकारों की बहुप्रतीक्षित मांग अब लगभग पूरी होने वाली है। छत्तीसगढ़ फिल्म विकास बोर्ड की ड्राफ्टिंग संस्कृति विभाग ने पूरी कर ली है। परामर्शदात्री समिति के सुझाव के बाद शासन को अनुमोदन के लिए भेजी जाएगी। संस्कृति विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अगले सप्ताह तक ड्राफ्ट शासन को भेज दिया जाएगा। शासन से अनुमोदन के बाद बोर्ड के रूप में उसके पंजीयन के लिए रजिस्ट्रार, फम्र्स एंड सोसाइटी में प्रक्रिया पूरी होगी। हालांकि इस प्रक्रिया के पहले सरकार द्वारा कुछ स्थायी सदस्यों (सरकारी पदों) का निर्धारण होगा। अभी तक इस ड्राफ्टिंग में कई बार फेरबदल हो चुुका है। संस्कृति विभाग ने कई राज्यों के फिल्म विकास निगम, विकास बोर्ड और इसी तरह की समकक्ष एजेंसियों के प्रारूप का अध्ययन किया। इसके बाद भी कई परिवर्तन की आवश्यकता महसूस की गई। अभी भी विधि संबंधी अभिमत के मुताबिक इसमें परिवर्तन की संभावना है। फिल्म विकास बोर्ड का गठन अब लगभग होने की कगार पर जरूर है, लेकिन तमाम प्रक्रियाओं को पूरी करने में लगभग छह माह का समय लग ही सकता है। इधर, कलाकारों के बीच में अभी से पद पाने के लिए जोर-आजमाइश शुरू हो गई है। कुछ खुलेआम पदों पर दावेदारी पेश कर रहे हैं, तो कुछ पर्दे के पीछे कवायद कर रहे हैं। इधर, अधिकारियों का कहना है कि प्रक्रिया में तेजी जरूर बरती जा रही
है, लेकिन विधि संबंधी अभिमत एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इससे छालीवुड से जुड़े फिल्मकारों को क्या फ़ायदा होगा। आईये हम आपको बताते हैं कुछ फिल्मकारों की राय.
परिचर्चा आयोजक - श्रीमती केशर सोनकर
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छत्तीसगढ़ फि़ल्म विकास मंडल बनने के फायदे
राज्य में अगर फि़ल्म विकास बोर्ड का गठन होता है, तो इससे छत्तीसगढ़ी सिनेमा इंडस्ट्री को निश्चित रूप से लाभ होगा। कितना लाभ होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि प्रावधान और प्रक्रियाएं किस तरह की बनाई जाती हैं। निर्माता को लाभ देने के लिए तय किये जाने वाले मापदंड स्थानीय निर्माताओं के लिए कितने फेवरेबल हैं। मेरा मानना है कि फि़ल्म विकास बोर्ड अगर सही नीयत से काम करेगा, तो निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ी सिनेमा इंडस्ट्री प्रगति करेगी।
० विनोद डोंगरे, फि़ल्म समीक्षक
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बहुत से लाभ होंगे
सबसे पहले तो सरकार निगम बनाये और दूसरे राज्यो की तरह निर्माताओ को आगे बढऩे के लिए फिल्मे बनाने के लिए राशी उपलब्ध कराए कलाकारो के मानदेय की भी व्यवस्था करे टाकिजों का निर्माण करवाये। हा ये सही है निगम बनने के बाद बहुत से लाभ होंगे सभी लोग जो फिल्म से जुड़े है फायदा होगा ही ऐसा मेरा मानना है मैं आप को और सरकार को शुभ कामनाएं दे रहा हूं सरकार इस पुनीत कार्य को शीघ्र करे
0 सुनीलदत्त मिश्रा, कलाकार बिलासपुर
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बिल्कुल फायदा होगा अगर....!
सरकार द्वारा जो बोर्ड के लिए सदस्य मनोनीत किये गयें हैं वो सभी सिर्फ और सिर्फ अपना फायदा ना देखते हुए सही मायनों में  सभी सदस्य फिल्म विकास बोर्ड के लिए एकजुटता दिखाएँ तो...।।नही तो ऐसा भी हो सकता है जैसा की होते आया है सभी सदस्य व्यक्तिगत अपना सम्बन्ध,  मंत्री या अध्यक्ष के समक्ष स्थापित करने के लिए अगर अंदर ग्राउंड की राजनीति करने लग जाएँ तो फिर जो छत्तीसगढ़ फिल्म विकास बोर्ड का रुपरेखा बनकर तैयार होगा उसे आप खुद ब खुद  देखना की क्या होता है ।।फिर भी अगर सूरज पूरब से ना निकलकर पश्चिम से निकल जाये और हमारे जो सभी सदस्य चुने गए हैं उनकी आपसी एकता और अखंडता कारगर हो जाये तो फिर जरूर एक नया मोड़ सामने आएगा और फिल्म विकास बोर्ड के बनने से हमे बहोत सारे सुविधावों का लाभ मिल सकता है
0 अशरफ अली अभिनेता
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सभी दिक्कतें जल्द ही दूर होंगी
छत्तीसगढ़ी फिल्मों के निर्माण, प्रदर्शन, तकनीकी व फाइनेंस संबंधी दिक्कतें जल्द ही दूर होंगी। बोर्ड के गठन के बाद यहां का फिल्म व्यवसाय व्यवस्थित हो जाएगा। अच्छी फिल्मों का निर्माण होगा जो यहां की संस्कृति और भाषा दोनों को संवर्धित करेंगी। राज्य बनने के बाद से प्रदेश में छत्तीसगढ़ी फिल्मों के निर्माण में तेजी आई है। अब तक तकरीबन 200 फिल्में प्रदर्शित हो चुकी हैें, जिनमें से काफी संख्या में हिट भी हुई हैं। सीमित संसाधन के बीच छत्तीसगढ़ी फिल्म व्यवसाय से जुड़े लोग लगातार फिल्में बना रहे हैं। स्थानीय भाषा में होने के कारण प्रदेश में ये फिल्में अच्छा व्यवसाय कर रही हैं। अब इन फिल्मों के निर्माण, प्रमोशन और प्रदर्शन में आने वाली समस्याएं फिल्म विकास बोर्ड के माध्यम से दूर होंगी।
0 अरुण बंछोर, फि़ल्म समीक्षक
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आम कलाकारों को नहीं होगा लाभ
फिल्म विकास निगम के गठन छत्तीसगढ़ी फिल्म के लिए अच्छी बात हो सकती है इससे निर्माता निर्दैशक को ही लाभ होगा आम कलाकारो को इससे कुछ लाभ होगा ऐसा मुझे नही लगता क्योकि छत्तीसगढ़ के भोले भाले और कम पढ़े लिखे लोक कलाकारो का सभी शोषण करते आ रहे है उन से मजदूरो सा व्यवहार होता आया है और होता रहेगा,इसलिए कलाकारो के लिए भी कोई ठोस कार्य योजना बनानी होगी ,
दिलीप ताम्रकार, कलाकार
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स्वागत हो परिणाम ना देखे
फिल्म विकास बोर्ड बनाने के निर्णय का स्वागत हो.कुछ ही सही कुछ तो होगा ये आशा पैदा होना ही चरितार्थ है.संजीवनी सा.
0 रजनीश झांझी, कलाकार
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निर्माताओं को मिलेगा लाभ
छत्तीसगढ़ फिल्म विकास बोर्ड बनाने से कम से कम छत्तीसगढ़ फिल्मो को फायदा होगा।फिल्मो को यहां अनिवार्य किया जा सकता है.निर्माताओं को आसानी से टाकीज मिलेगा और हम फिल्मो का अच्छा व्यवसाय कर सकेंगे।
आदित्य दीपक देवांगन निर्माता
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ये होगा फिल्म विकास निगम से फायदा
छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम के गठन के बाद छत्तीसगढ़ के फिल्म, थिएटर, लोककला, लोकरंग के कलाकारों को बेहतर मंच मिलेगा। यही नहीं, कलाकारों को होने वाली समस्याओं का निराकरण भी निगम के माध्यम से किया जाएगा। वर्तमान में छत्तीसगढ़ी फिल्में तो लगातार बन रही हैं, लेकिन उस प्रकार का आउटपुट प्राप्त नहीं हो रहा है, जैसा मिलना चाहिए। सिनेमाघर तो हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ी फिल्मों का प्रदर्शन नहीं हो रहा। यही नहीं, राज्य निर्माण के बाद भी अब तक दूरदर्शन में प्रादेशिक चैनल की शुरुआत नहीं हो पाई है। ऐसे में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम के गठन के बाद इन सभी दिशा में तेजी से कार्य किए जाएंगे।
0 अशोक तिवारी
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फिल्मो का स्तर बढ़ेगा
छत्तीसगढ़ फिल्म विकास बोर्ड बनाने से यहां की फिल्मो का स्तर बढ़ेगा और कलाकारों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।इससे छालीवुड का भविष्य उज्जवल होगा। सरकार के इस कदम का हम सराहना करते हैं.
यस त्रिवेदी

सभी प्रकार की भूमिका करना चाहूंगी

अपनी पहचान खुद बनाना चाहती है जयन्ती
मॉडलिंग से छालीवुड में कदम रखने वाली नायिका जयन्ती मनहर की तमन्ना सभी फिल्म इंडस्ट्री में काम करने और अपनी पहचान बनाने की है.साथ ही मौका मिले तो छोटे परदे पर भी काम करना चाहती है। जयन्ती
छालीवुड में सभी प्रकार की भूमिका निभाना चाहती है ताकि उन्हें कटु अनुभव हो जाए। वे कहती है कि छत्तीसगढ़ी फिल्मो में गुणवत्ता हो तो जरूर थियेटरों में चलेगी।जयन्ती की फिल्म बीए सेकण्ड ईयर अभी टाकीजों में चल रही है है.आशिक मयावाले बनकर तैयार है.होगा प्यार धीरे धीरे और धर्मयुद्ध में वे काम कर रही है. जयन्ती से हमने हर पहलुओं पर बात की।
0 आपको एक्टिंग का शौक कब से है ?
00 मुझे एक्टिंग का शौक बचपन से ही रहा है। स्कूल कॉलेजों में नाटकों में भाग लिया करती थी फिर मॉडलिंग करने लगी। जब जब टीवी देखता था तब तब मुझे लगता था कि मुझे भी कुछ बनना चाहिए ।
0 छालीवुड की क्या सम्भावनाये है?
00 बेहतर है। आने वाले समय में यहां की फिल्मे बॉलीवुड की तरह ही चलेंगी।यहां फिलहाल दर्शकों की कमी है। लोगो में अपनी भाषा के प्रति वो रूचि नहीं है जो होनी चाहिए । थियेटरों  की कमी को सरकार पूरा करे।

0 तो छालीवुड की फिल्मे दर्शकों को क्यों नहीं खीच पा रही है?
00 क्योकि यहां की फिल्मो में बहुत सारी कमियां होती है। फिल्मो में वो गुणवत्ता नहीं होती जो यहां के लोगो को चाहिए। प्रोड्यूसरों को इस और ध्यान देने की जरुरत है।
0 फिर मौका कैसे मिला और आपके प्रेरणाश्रोत कौन है ?
00 मेरा रोल मॉडल प्रियंका चोपड़ा है। कालेज के दिनों से ही मुझे फिल्मो का ऑफर मिलाने लगा था.
0 कभी आपने सोचा था की फिल्मो को ही अपना कॅरियर बनाएंगे ?
00 जी नहीं ! कालेज के समय में ऑफर मिला तो मेरा ध्यान सिर्फ पढ़ाई में था लेकिन फिल्मो में जब मेरे काम को पसंद किया जाने लगा तो मुझे लगा की इस क्षेत्र में कॅरियर बना सकती हूँ। अब मै एक्टिंग को कॅरियर बनाने की सोचकर चली हूँ। अब इसी लाईन पर काम करती  रहूंगी।
0  छालीवुड फिल्मो में आपको कैसी भूमिका पसंद है या आप कैसे रोल चाहेंगे।
00  मैं हर तरह की भूमिका निभाना चाहूंगी। लेकिन ऐसा रोल करना चाहूंगी जिसे दर्शक हमेशा याद रखे,और वो रोल मेरी पहचान बने.चाहे रोल छोटा हो या बढ़े.
0 सरकार से आपको क्या अपेक्षाएं हैं?
00 सरकार छालीवुड की मदद करे। टाकीज बनवाए, नियम बनाये। छत्तीसगढ़ी फिल्मो को सब्सिडी दें ताकि कलाकारों को भी अच्छी मेहनताना मिल सके।
0 आपका कोई सपना है जो आप पूरा होते देखना चाहती हैं?
00 छालीवुड में कुछ करके दिखाना चाहती हूँ। ऐसा प्रदर्शन करना चाहती हूँ जहां मेरी अलग पहचान बने.चाहे व: फिल्म हो या टीवी। लोगो के दिलो पर राज करना चाहती हूँ.