शुक्रवार, 13 मई 2016

पार्शवगायन में शोहरत कमाना चाहती है रायपुर की ऐश्वर्या पंडित

इंडियाज गॉट टेलेंट में पंहुची
- एक मुलाक़ात - अरुण बंछोर
कलर्स चैनल के इंडियाज गॉट टैलेंट के सेमीफाइनल राउंड में पहुँची शहर की ऐश्वर्या पंडित पार्श्वगायन में खूब नाम कमाकर माता पिता का सपना पूरा करना चाहती है। ऐश्वर्या में गजब का टेलेंट है । जज करन जौहर, किरण खेर और मलाइका अरोड़ा उनकी आवाज के कायल हो गए हैं। ऐश्वर्या की आवाज इतनी सुरीली है कि पंजाबी फोक सांग 'तू माने या ना माने दिलदारा' को सुनकर प्रसिद्ध अभिनेत्री किरण खेर रो पड़ी थीं। करण जौहर ने इस गाने को उनके दिल का सबसे करीब गाना कहकर गोल्डन बटन दबा दिया था और मलाइका ने अपनी तारीफ़ में उनकी आवाज और उनकी खूबसूरती का कसीदा ही पढ़ दिया । इससे ऐश्वर्या सीधे सेमीफाइनल में पहुंच गई। ऐश्वर्या को कला विरासत में मिली है। उनकी माँ रिंकी पंडित भी एक अच्छी गायिका है। दादा मशहूर तबलावादक थे तो पिता बॉडी बिल्डर है। इसके लिए ऑडिशन फरवरी में हुआ और उसका रिजल्ट मार्च में आया। फिर 23 अप्रैल को रायपुर में उनकी बायोग्राफी शूटिंग हुई थी। ऐश्वर्या  परिवार को भी ऐश्वर्या के फाइनल जीतने की उम्मीद है। ऐश्वर्या छालीवुड में बेस्ट सिंगर का एवार्ड हासिल कर चुकी है। उनसे हमने हर पहलुओं पर बेबाक बात की।
0 इंडियाज गॉट टैलेंट के सेमीफाइनल राउंड में पहुँचने से निश्चित ही छत्तीसगढ़ का नाम रोशन हुआ है। आगे क्या उम्मीद है?
00 मुझे फाइनल जीतने का भरोसा है। क्योकि मैंने शुरू से ही यही लक्ष्य लेकर चला है। इस टैलेंट शो के ऑडिशन में शामिल होने के लिए दस लाख लोग पहुंचे थे। मैंने अपनी प्रतिभा के दम पर अंतिम 6 में स्थान बना लिया है।
0 यहां तक पहुँचने के लिए आपको कितनी मेहनत करनी पड़ी?
00 इस शो के लिए मैंने खूब मेहनत की है। मेरे माँ - बाप ने मुझे लेकर जो सपना देखा है उसे पूरा करने की मन में ठानी है। और मन में लगन हो तो कोइ भी काम असम्भव नहीं होता।
0 गाने की प्रेरणा आपको कहाँ से मिली और क्या आपने कोइ ट्रेनिंग ली है?
00 मेरी मा ही मेरी गुरु है ,मेरी प्रेरणाश्रोत है। मां रिंकी पंडित गृहिणी के साथ-साथ गायिका भी हैं। गाने की प्रेरणा मुझे अपनी मां से ही मिली है।परिवार में दो भाई हैं। पापा कलेक्टोरेट में कार्यरत हैं।
0 कही और से आपने गाने की शिक्षा नहीं ली है?
00 जी नहीं। सब कुछ माँ की ही दें है। खैरागढ़ संगीत विवि में बीए (संगीत) की पढ़ाई कर रही हूँ। अब संगीत ही मेरा लक्ष्य है, संगीत ही मेरा करियर होगा।
0 टेलेंट का आशय क्या गाने से ही है?
00 टेलेन्ट की कोइ परिभाषा  है। कई प्रकार के टैलेंट होते हैं। सबसे मुकाबला होता है।
 0 इसके पहले आपने फिल्मों के लिए भी अपनी आवाज दी है?
00 जी हाँ कुछ छत्तीसगढ़ी फिल्मों और हिन्दी फिल्म कुटुंब के लिए कुमार शानू के साथ अपनी आवाजें दी है। आगे भी फिल्मों के लिए गाना जाती रहूंगी।
0 आपकी कोइ ख्वाहिश जो पूरा होते हुए देखना चाहती हो?
00 बस मेरी एक ही तमन्ना है कि पार्श्वगायिका बनकर छत्तीसगढ़ और अपने माता-पिता का नाम रोशन करूँ।

अपनी आवाज से लोगों का दर्द भुलाना चाहती है छाया प्रकाश

संगीत की कोई सीमा नही होती
० एक मुलाक़ात - अरुण बंछोर
छत्तीसगढ़ की मशहूर पार्श्वगायिका छाया प्रकाशअपनी आवाज से लोगों का दर्द भुलाना चाहती है। वे कहती हैं कि लता जी को सुनकर संगीत को महसूस करना सीखा है. वे चाहती हैं कि वही एहसास अपनी गायकी मे डालें और अपने सुनने वालों को सुकुन का एहसास कराये। संगीत उन्हें अपनी माँ से विरासत में मिली है। नेशनल अवार्ड और छालीवुड की बेस्ट सिंगर  जीत चुकी छाया प्रकाश संगीत के हर अंदाज़ को जानना चाहती है कुछ नया करना चाहती है। 16 एल्बम और 5 फ़िल्म मे अपनी आवाज का जादू बिखे चुकी छाया प्रकाश से हमने हर पहलुओं पे बेबाक बात की है।
० आपको गाने का शौक कैसे हुई?
०० मेरी माँ बहुत अच्छा गाती थी, सामाजिक कारणों से उन्हे आगे बढने का अवसर नही मिला तो उन्होने मुझे बचपन से ही सिखाना शुरू कर दिया था।
० किसी ने आपको प्रोत्साहित किया या फिर मर्जी से गाने लगी?
०० माँ ही मेरी पहली गुरू हैं और मेरी प्रेरणा भी।
० आपकी कोई तमन्ना है जिसे लेकर आप आगे बढ़ रही है 
०० मेरी एक ही तमन्ना है कि मेरी आवाज को सुन कर लोग अपना दर्द भूल जायेँ. मैने लता जी को सुनकर संगीत को महसूस करना सीखा है. मैं चाहती हूँ कि वही एहसास मैं अपनी गायकी मे डाल पाऊँ और अपने सुनने वालों को सुकुन का एहसास करा सकूँ.
० आपने गायकी का क्षेत्र ही क्यों चुना ?
०० मैने बहुत अलग अलग काम करके देखा पी.एच.डी करके कोलेज मे पढाया,.लेकिन आन्तरिक सुख मुझे संगीत मे मिला..इसलिये मैने संगीत को ही   चुना।
० आपने गायकी की ट्रेनिंग ली है ?
०० जी हाँ मैने भातखन्डे संगीत महाविद्यलाय से गीतांजली सीनियर डिप्लोमा लिया है. समय समय पर संगीत गुरुजनो का मार्गदर्शन लेती रही हूँ..जिनमे कुछ विशेश नाम हैँ- किशोर दुबे बिलासपुर.  राजेन्द्र गिरी गोस्वामी रतनपुर.  कल्याण सेन  रायपुर.  भारती बन्धू  रायपुर.  मोइन खान  मुंबई. उन्नीकृष्णन  भिलाई।
० क्या आप फिल्मों में भी एक्टिंग करना चाहेंगी ?
०० फ़िल्मो मे काम करने का कभी नही सोचा।
० आप छत्तीसगढ़ से है तो क्या हिन्दी या भोजपुरी फिल्मो के लिए भी गाना गायेंगी?
०० जी संगीत की कोई सीमा नही होती. अभी एक हिन्दी फ़िल्म के लिये रिकार्डिग किया है और भोजपुरी के लिये भी बात हो रही है..अवसर मिलेगा तो संगीत के हर अंदाज़ को जानना चाहूँगी. नया करना चाहूँगी।
० आप अपना प्रेरणाश्रोत किसे मानती है?
०० मेरी प्रेरणा मेरी माँ श्रीमती माया जैन हैँ
० आपका आदर्श कौन है , जिसे आप फॉलो करती है ?
०० आदर्श लता मंगेशकर जी हैँ

० कभी आपको निराशा महसूस हुई है और कभी ऐसा क्षण आया है जब आप बहुत खुश हुई हो?
०० मुम्बई की चमक के पीछे के अँधेरे को जानकर, झेलकर बहुत निराशा हुई थी। और जब मुझे नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया गया उस दिन बेहद खुशी हुई थी।

शनिवार, 23 अप्रैल 2016

फिल्मों को ही करियर बनाएंगी अनिकृति

माता-पिता को गर्व है इस बेटी पर
छालीवुड में एल्बम से फिल्मो में कदम रखने वाली नायिका अनिकृति चौहान की तमन्ना छालीवुड में बहुत कुछ करने की है। वे कहती है कि मन में दृढ़ इच्छा और लगन हो तो कोइ भी काम असम्भव नहीं होता। फिल्मों में काम करने का अनिकृति चौहान को कोइ शौक नहीं था लेकिन अपने दोनों चाचा आनंद और
लक्ष्मण चौहान की प्रेरणा से फिल्मों में आई और अब फिल्मों को ही करियर बनाना चाहती है। वे कहती है कि छत्तीसगढ़ी फिल्मो में गुणवत्ता हो तो जरूर थियेटरों में चलेगी।
0 आपको एक्टिंग का शौक कब से है ?
00 चार साल हुए है मुझे छालीवुड में आये। एक्टिंग का शौक नहीं था। पर एल्बम करने के बाद आफर मिला तो फिल्में करने लगी।
0 छालीवुड की क्या सम्भावनाये है?
00 बेहतर है। आने वाले समय में यहां की फिल्मे बॉलीवुड की तरह ही चलेंगी।यहां फिलहाल दर्शकों की कमी है। लोगो में अपनी भाषा के प्रति वो रूचि नहीं है जो होनी चाहिए । थियेटरों  की कमी को सरकार पूरा करे।
0 तो छालीवुड की फिल्मे दर्शकों को क्यों नहीं खीच पा रही है?
00 क्योकि यहां की फिल्मो में बहुत सारी कमियां होती है। फिल्मो में वो गुणवत्ता नहीं होती जो यहां के लोगो को चाहिए। प्रोड्यूसरों को इस और ध्यान देने की जरुरत है।
0 फिर मौका कैसे मिला और आपके प्रेरणाश्रोत कौन है ?
0 एल्बम में काम करने के बाद लोगो ने मेरा अभिनय देखा और फिल्मो में मौका दिया। मेरे दोनों चाचा ही मेरे प्रेरणाश्रोत है जो हर पल मेरे साथ होते है।
0 कभी आपने सोचा था की फिल्मो को ही अपना कॅरियर बनाएंगे ?
00 हाँ ! शुरू में तो नहीं सोची थी पर अब मै एक्टिंग को कॅरियर बनाने की सोचकर चली हूँ। अब इसी लाईन पर काम करती  रहूंगी।
0  छालीवुड फिल्मो में आपको कैसी भूमिका पसंद है या आप कैसे रोल चाहेंगे।
00 फिल्मों में लीड रोल ही करना चाहूंगी। छातीसगढी फिल्मों के अलावा हिन्दी  फिल्मों का आफर मिला तो वे जरूर करना चाहेंगी।
0 सरकार से आपको क्या अपेक्षाएं हैं?
00 सरकार छालीवुड की मदद करे। टाकीज बनवाए, नियम बनाये। छत्तीसगढ़ी फिल्मो को सब्सिडी दें ताकि कलाकारों को भी अच्छी मेहनताना मिल सके।
0 आपका कोई सपना है जो आप पूरा होते देखना चाहती हैं?
00 छालीवुड में कुछ करके दिखाना चाहती हूँ। छालीवुड स्टारडम सिने अवार्ड में मुझे सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेत्री का अवार्ड मिला जिससे मेरा हौसला और बढ़ा है। मेरे माता-पिता और पूरा परिवार मुझ पर गर्व करने लगा है। मै उनकी उम्मीदों पर खरा उतरकर दिखाना चाहूंगी। सच बताऊँ अवार्ड समारोह में जाने में मुझे डर लग रहा था। सबके जिद्द पर गयी और आज सब मुझ पर गर्व कर रहे हैं।

बच्चों में खासी लोकप्रिय है मोना

छत्तीसगढ़ी फिल्मों की सुपर स्टार मोना सेन बच्चों में काफी लोकप्रिय है। वे जहां भी जाती है लोग उन्हें घेर लेते हैं। मोना भी अब समाजसेवा में जूट गयी है। कुछ सालो से दुर्ग और महासमुंद में गरीब बच्चों को गोद लेकर उनके शिक्षा दीक्षा एवं लालन पालन का खर्चा उठा रही है। अब मोना नक्सल प्रभावित बस्तर के सुदूर अंचल में जाकर सात बच्चों को गोद ली है। उनके शिक्षा दीक्षा एवं लालन पालन का खर्चा खुद उठाएंगी तथा उन्हें उनके पैरों पर खड़ा करेंगी। मोना कहती है कि ऐसा करने से उन्हें बहुत ही सुकून मिलता है। भविष्य में वे उन क्षेत्रों में जाएंगी जहां सरकारी मिशनरी नहीं पंहुच पाई है। मोना एक ऐसी अभिनेत्री है जिसका जलवा आज भी छत्तीसगढ़ के गाँवों में देखने को मिलता है। उन्हें तमाम सम्मान मिल चुका है कौशिल्या माता सम्मान , मिनीमाता सम्मान , नारी शक्ति सम्मान सहित उनके पास अनगिनत सम्मान प्राप्त है।

उभरते नायिका

नाम -तान्या तिवारी
उम्र  - 25 साल
मॉडलिंग से अभिनेत्री बनी
पहली फिल्म - भोजपुरी
छत्तीसगढ़ी फिल्म - 3

नाम -एलीना डेविड मसीह
पिता - दीपक मसीह
उम्र  - 22 साल
फिल्म - हिन्दी तेलुगु एक -एक
छत्तीसगढ़ी - 3 , तहलका - भोजपुरी
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नाम - अनुकृति चौहान
उम्र - 20 साल
फिल्म - आये हम बाराती
अवार्ड - बेस्ट डेब्यू एकट्रेस
माता पिता को गर्व है इस बेटी पर

नाम - दिव्या यादव
उम्र - 23 साल
पिता का नाम - बलराम सिंह यादव
माँ का नाम - नीलम यादव
डेब्यू मूवी - दबंग देहाती
हॉबी - डांसिंग
लक्ष्य - अपने माता पिता का नाम रोशन करना अच्छा नाम कमाना और अच्छी ऐक्ट्रेस बनना ।

नाम -अंजना दास
जन्म - 13 मई1994
डेब्यू मूवी- असली संगवारी
शौक - फिल्मों में काम करना
लक्ष्य - सर्वश्रेष्ठ नायिका बनना

नारी प्रधान फिल्म बनाने की योजना है : क्षमानिधि

खुद का दर्द भी कर सकता हूँ बयाँ
छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री का एक बड़ा नाम है क्षमानिधि मिश्रा, जिसकी धमक बॉलीवुड में भी सुनाई देती है। जहाँ भी जाते हैं, कुछ न कुछ जुगाड़़ कर ही आते हैं। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, आमिर खान जैसे कलाकारों के साथ काम करने का उन्हें मौका मिला है। वे सिर्फ कलाकार नहीं है बल्कि बहुप्रतिभा के धनी है। वे जितने अच्छे अभिनेता है उतने ही अच्छे गायक, गीतकार, लेखक, निर्माता, निर्देशक और कॉमेडियन भी है। वे जल्द ही एक नई नारी प्रधान फिल्म बनाने की योजना लेकर चल रहे है। उनका कहना है कि उस फिल्म में हो सकता है नायक ही ना हो। खुद के आंतरिक दर्द भी हो सकता है उस  फिल्म में। उनसे हमने हर पहलूओं पर बात की है।
0 आपकी फिल्म ऑटो वाले भांटो प्रदर्शन से पहले ही चर्चित हो गयी है। इससे आपको क्या उम्मीद है?
00 101 फीसदी उम्मीद है की लोग इस फिल्म को पसंद करेंगे? आशा से ज्यादा।
0 इस फिल्म की खासियत क्या है?
00 खासियत ही खासियत है । रोमैंस है कॉमेडी है , कर्णप्रिय गीत है , सुमधुर संगीत है। सभी प्रकार के मसाले हैं।
0 भविष्य की क्या योजना है?
00 एक नारी प्रधान फिल्म बनाने की है। नायकों को लेकर तो सभी फिल्म बनाते है मै कुछ हटकर करना चाहता हूँ। माँ -बेटी के भावनात्मक रिश्ते को लेकर फिल्म बनाऊंगा जिसमे खुद का दर्द भी शामिल हो सकता है। जिंदादिली के साथ जीता हूँ पर आतंरिक दर्द भी है।
0 ऑटो वाले भांटो फिल्म में आपने रायपुर को नए अंदाज में दिखाया है?
00 इस फिल्म में नई तकनीक है जो इसे 50 गुना ज्यादा बेहतर नबनाता है। अच्छी साउंड है। रायपुर को अच्छे ढंग से फिल्माया गया है। नया रायपुर भी दिखेगा और पुराना भी। छत्तीसगढ़ी क्रान्ति है यह फिल्म।
0 आप हमेशा प्रयोग करने के लिए जाने जाते हैं?
00 जरूर ,प्रयोग करते रहता हूँ। नई विधा को छत्तीसगढ़ में मैंने लाया। गाने में नया आधुनिक संगीत का प्रयोग मैंने किया आज सब वही कर रहे हैं।
0 सरकार से क्या मदद चाहिए?
00 छालीवुड को सरकार से सिर्फ इनडोर स्टूडियो चाहिए बस। प्राकृतिक संसाधन बहुत है। नहीं है तो थाना ,अस्प्ताल आदि जिसके लिए इनडोर स्टूडियो चाहिए। मिनी थिएटर चाहिए। सब्सिडी या लीज में ही दे दे। नहीं चाहिए निगम मंडल इससे कुछ नहीं होने वाला है। फिल्म इंडस्ट्री को उद्योग का दर्जा मिले।

पूरी तरह से कॉमेडियन फिल्म है ऑटो वाले भांटो

नारी के हर गुण का चित्रण है
छालीवुड के सफल निर्माता क्षमानिधि मिश्रा ने निर्देशन में बनी फिल्म  ऑटो वाले भांटो बनकर प्रदर्शन के लिए तैयार है। यह फिल्म अब तक बनी सभी छत्तीसगढ़ी फिल्मों से जऱा हटकर है। विशुद्ध रूप से यह कॉमेडियन फिल्म है , लेकिन एक पति पत्नी के बीच भावनात्मक सम्बन्ध को बेहतर ढंग से फिल्माया गया है। इसमें रोमांस, हास्य , मारपीट , एक्शन सहित सारे मसाले शामिल किये गए हैं। इस फिल्म का सकारात्मक पक्ष है गीत संगीत और कोरियोग्राफी।  ऑटो वाले भांटो में जितने भी कलाकार है सब अपना छाप छोड़कर जाता है , यह फिल्म की खासियत है।
निर्माता निर्देशक श्री मिश्रा ने बताया कि फिल्मों में हीरोइनों को निरीह बताया जाता हैलेकिन इस फिल्म में नारी को ही सबल बताया है। नारी की भावना और उनके जितने रूप हो सकते थे सब हमने दिखाया है यह फिल्म ही सबसे हटकर है। उपासना वर्षों से चरित्र अभिनेत्री की भूमिका निभाती रही है उसमे बहुत ही कलात्मक गुण है । हमने सारे गुण बाहर निकाला है। नायिका से हमने डांस कराया है तो फाइट भी कराया है। अभिनेत्री उपासना वैष्णव और सह अभिनेत्री उर्वशी साहू वास्तविक जीवन में अच्छी सहेली है वही हमने इस फिल्म में भी दिखाया है। पल में हंसना ,पल में झगडऩा , पल में समझौता करना ये सब हमने परदे पर दिखाया है जिसे दर्शक खूब इंज्वाय करेंगे। श्री मिश्रा ने बताया कि शूटिंग के दौरान हमने इन दोनों कलाकारों को खूब आजादी दी थी। चार लाएं का संवाद देकर मै दृश्य का सार बता देता था और कह देता था कि तुम लोग जो अच्छा कर सकते हो करो और ये लोग उतने ही बेहतर ढंग से अपना किरदार पूरा करती थी। ये खासियत है इन दोनों कलाकारों की।सीमा सिह अलग रूप में नजर आएंगी । इस फिल्म में दो बड़े नायक है सुनील तिवारी और करन खान। अलग अलग किरदार को दोनों ने बखूबी निभाया है।