शुक्रवार, 15 जनवरी 2016

छॉलीवुड को सरकार की मदद चाहिए : बॉबी खान

छत्तीसगढ़ी फिल्मो के मशहूर निर्माता निर्देशक बॉबी खान का कहना है कि छत्तीसगढ़ी फिल्मों को माहौल बंनाने और अपार सफलता के लिए सरकार की मदद चाहिए, तभी हम आगे बढ़ सकते है। उनका कहना है कि सरकार एक फिल्म विकास निगम बनाये और उसे अच्छे अनुभवी हाथों में सौपे ताकि छत्तीसगढ़ी फिल्मों का उद्धार हो सके। वे कहते है कि भविष्य में छत्तीसगढ़ी भाषा, संस्कृति और फिल्म को आगे बढ़ाने का ही काम करूंगा। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह से मुलाकात कर इसकी मांग भी की है। ओडिय़ा और छत्तीसगढ़ी फिल्मे बना चुके बॉबी खान राजनीति में भी सक्रिय है। वे आरएसएस के मुस्लिम मंच के प्रदेश महामंत्री भी है। प्रस्तुत है बातचीत के संपादित अंश। 
फिल्मों की और रूचि कैसे हुई ?
बचपन से ही इस ओर मेरी रूचि रही है। 1995 में हिन्दी फिल्म पॉयजन बनाई। 2012 में जावेद अली का एक एल्बम बनाया, जिसकी शूटिंग हमने खंडाला में की। 
आपने अभिनय की शुरुवात कब और कहाँ से की?
अभिनय तो मै स्कूल लाइफ से ही करता आ रहा हूँ। 1995 में ही मैंने फिल्म में अभिनय और निर्माता निर्देशक का काम शुरू कर दिया था। 
आप निर्माता, निर्देशक और अभिनेता हैं, तीनो काम कैसे मैनेज करते हैं?
मुझे कोई दिक्कत नहीं होती। सब काम मै बखूबी कर लेता हूँ। अभिनय तो मेरे रग रग में है। फिल्मो का निर्माण और निर्देशन मेरा शौक है। 
अब तक आपकी उपलब्धि क्या है?
दो छत्तीसगढ़ी फिल्म सोनचिरैया और तोर मया मा, हिन्दी फिल्म पॉयजन और उडिय़ा फिल्म ए मोर प्रिया मेरी सबसे बड़ी उपलब्धी है। इसके अलावा एल्बम भी है। 
भविष्य में क्या करना चाहेंगे ,छत्तीसगढ़ के लिए ?
भविष्य में छत्तीसगढ़ी भाषा,संस्कृति और फिल्म को आगे बढ़ाने का ही काम करूंगा । छत्तीसगढ़ मेरी धरती है। इसके लिए मै अपना जीवन लगाना चाहता हूँ। 
ऐसा कोई क्षण जब आपको बहुत खुशी हुई हो?
जब मेरी फिल्म सोनचिरैया को मुख्यमंत्री के हाथो बेस्ट फिल्म का अवार्ड मिला, मै बहुत ही खुश हुआ था। 
और कोई ऐसा क्षण जब निराश हुई हों?
जब फिल्मे नहीं चल पाती तो निराशा होती है पर एक दिन
ऐसा भी आएगा जब हिन्दी फिल्मे टाकीज के लिए मोहताज होगी और छत्तीसगढ़ी फिल्मे सुपर-डुपर होगी।
रील लाइफ और रियल लाइफ में कितना फर्क होता है?
रील लाइफ और रियल लाइफ में बहुत अंतर होता है। रील लाइफ में कहानी के अनुसार चलना पड़ता है। रियल लाइफ में अपने हिसाब से चलना पड़ता है। 
छत्तीसगढ़ी फिल्मे टाकीजो में क्यों नहीं टिक पाते?
एक दिन ऐसा भी आएगा जब हिन्दी फिल्मे टाकीज के लिए मोहताज होगी और छत्तीसगढ़ी फिल्मे सुपर-डुपर होगी। बस सरकार से मदद चाहिए। सरकार एक फिल्म विकास निगम बनाये और उसे अच्छे अनुभवी हाथो में सौपे ताकि छत्तीसगढ़ी फिल्मो का उद्धार हो सके। 
संक्षिप्त परिचय 
नाम -  बॉबी खान 
पेशा     -  फिल्म निर्माता,  निर्देशक, अभिनेता 
फिल्म
एक उडिय़ा, दो छत्तीसगढ़ी 
बनने वाली फिल्म
मोर मया ला राखे रहिबे 
शिक्षा
बीई इलेक्टिकल्स 
अवार्ड
बेस्ट फिल्म अवार्ड 

शनिवार, 9 जनवरी 2016

मोला कइथे रे "दबंग देहाती " नए साल का पहला धमाका

रायपुर। नए साल की पहली छत्तीसगढ़ी फिल्म होगी दबंग देहाती। यह फिल्म बनकर प्रदर्शन के लिए तैयार है। २२ जनवरी को प्रदेश के सिनेमाघरों में आने की चर्चा है। वैसे तो कई फिल्मे रिलीज की प्रतीक्षा में है जिसमे चंद्रशेखर चकोर की फिल्म चक्कर गुरूजी के और क्षमानिधि मिश्रा की फिल्म ऑटो वाले भांटो  प्रमुख है। दबंग देहाती के सुपर स्टार करन खान और मुम्बई की प्रियंका परमार मुख्य भूमिका में नज़र आएंगे। नियाज खान के निर्देशन में बनी इस फिल्म में मनोजदीप एक कॉमेडियन के रूप में और श्वेता शर्मा तथा राजेश पंड्या एक अलग भूमिका में दिखेंगे। अमित प्रधान के गीतों को सुनील सोनी और छाया चंद्राकर ने स्वर दिया है। नई तारिका दिव्या यादव की इस फिल्म के साथ छालीवुड में एंट्री हो रही है। महेंद्र कपूर, शेखर चौहान, महबूब खान, मास्टर रजा खान, अरविन्द गुप्ता विशु ध्रुव इस फिल्म में दिखेंगे।

सोमवार, 4 जनवरी 2016

छालीवुड परदे के बुरे इंसान

छालीवुड परदे पर ये कलाकार बुरे इंसान के किरदार में जरूर नजर आतें हैं पर वास्तविक जिंदगी में उतने ही मिलनसार और अच्छे इंसान होते हैं। खलनायक का पात्र किसी भी फिल्म का मुख्य हिस्सा होता है। खलनायकों के साथ एक विडंबना यह भी होती है, वो अपना काम कितने भी अच्छे से कर जाएं, कभी प्यार नहीं पाते। फिर भी खलनायक बनने की लालसा सबमे होती है। बॉलीवुड में बड़े बड़े नायक भी खलनायक की भूमिका निभा चुके है। आइये हम आपको मिलवाते है छालीवुड के खलनायकों से।
 - अरुण कुमार बंछोर

डॉ अजय सहाय - मशहूर मधुमेह व् हृदयरोग विशेषज्ञ होने के साथ साथ छालीवुड के बेस्ट खलनायक भी है। इन्होने अब तक कई दर्जन फिल्मे की है। हिन्दी और भोजपुरी फिल्मो में भी वे अपनी कला का जादू बिखेर
चुके है। आज डॉ अजय सहाय निर्माताओं की पहली पसंद है। वे छोटे बड़े सभी नायकों के साथ काम कर चुके हैं। सन 2014 में वे बेस्ट खलनायक का खिताब हासिल कर चुके है। इसके पहले उन्हें कई अवार्ड मिल चुके हैं।

मनमोहन ठाकुर -  छालीवुड में गिरधारी पांडे के नाम से मशहूर सबसे बड़े खलनायक मनमोहन ठाकुर किसी परिचय का मोहताज नहीं है। वे अब तक 80 से ज्यादा फिल्मो में अपने
अभिनय का जादू दिखा चुके हैं। मनमोहन सबसे चर्चित खलनायक हैं। उनकी कला के सब कायल है। हालांकि अब वे नायक की भूमिका में आने लगे है पर उनकी पहचान एक खलनायक के रूप में ही है। कई चार्चित फिल्मों में उनकी तूती बोलती रही है।

धर्मेन्द्र चौबे - जाने माने खलनायक धर्मेन्द्र चौबे अब फिल्मो की मांग है। उन्होंने करीब 25 फिल्मे की है और छालीवुड मे अपनी पहचान बना चुके हैं। हाल ही में रिकार्ड कमाई करने वाली फिल्म राजा छत्तीसगढिय़ा में
धर्मेन्द्र चौबे मुख्य खलनायक की भूमिका में है। इस फिल्म ने एक करोड़ को पार किया था। इतना ही नहीं धर्मेन्द्र चौबे फिल्मो में बुरे इंसान जरूर है पर असल जिंदगी में वे जिंदादिल इंसान और मिलनसार हैं।

काशी नायक - छालीवुड के खलनायकों में काशी नायक का नाम ना ले तो कहानी अधूरी लगेगी। मया 2 फिल्म अभी थियेटरों में धूम मचा रही मचा रही है जिसमे खलनायक काशी
नायक ने अमिट छाप छोड़ी है । काशी के कला में दम है। रोबदार आवाज , कुटिल मुस्कान ही उनके अच्छे विलेन होने का सबूत है। काशी ने फिल्म दबंग देहाती में भी मुख्य विलेन का किरदार निभाया है।

पुष्पेन्द्र सिंह - पांच भाषाओं में फिल्म करने वाले पुष्पेन्द्र सिंह बिरले इंसान है। छत्तीसगढ़ी फिल्मो में खलनायक के रूप में यह एक जाना पहचाना नाम है। अब तक 50 छत्तीसगढ़ी फिल्म , 4 भोजपुरी 1 मराठी 2 बुन्देखंडी 3 हिन्दी और 1 उडीयां फिल्म में अपनी भूमिका से सबको प्रभावित किया है।
यही नहीं पुष्पेन्द्र सिंह  को कई कलाओं में महारत हासिल है। इन्होने अब बॉलीवुड की ओर रूख कर लिया है फिर भी छालीवुड के लिए वे हमेशा ही उपलब्द्ध रहेंगे ।

विनय अम्बष्ड - एक जानदार खलनायक है जिन्होंने कई फिल्मो में विलेन के किरदार में लोगो का दिल जीता है। सरपंच ,राजा छत्तीसगढिय़ा इनकी मुख्य फिल्म है। थियेटर से छालीवुड में कदम रखने वाले विनय अम्बष्ड ने फिल्मो में अपनी कला से सबका दिल जीता है। एक खलनायक के रूप में इनकी पहचान बन गयी है। विनय जी को खलनायकी बहुत पसंद है।

प्रदीप शर्मा - छालीवुड के सीनियर कलाकार प्रदीप शर्मा ने कई फिल्मो में खलनायक की भूमिका में जान डाल दी है। भिलाई थियेटर से फिल्मो में आये
श्री शर्मा ने छत्तीसगढ़ी फिल्मो के अलावा हिंदी ,उडिय़ा,और साउथ की फिल्मो में भी काम किया है। अभी हाल ही में वे हिलण्डी फिल्म आशिक आवारा करके वापस छत्तीसगढ़ लौटे है। विलेन के साथ साथ वे तमाम हीरो हीरोइन के पिता की भूमिका में नजर आ चुके हैं।

बलराज पाठक -मयारू भौजी में आपने तीखे ओर कड़क इंसान को देखा होगा। वे कोई और नहीं बलराज
पाठक ही है। पाठक जी ने कई छालीवुड की फिल्मों में खलनायक का किरदार निभाकर लोगो के दिलों में अपनी जगह बनाई है। उन्हें खलनायकी ही पसंद है। वे कहते हैं की विलेन ही फिल्म का में किरदार होता है। विलेन ना हो तो फिल्म बेजान होत है।

विजय मेहरा - छत्तीसगढ़ फिल्म मितवा के दाऊ जी यानी विजय मेहरा आज छालीवुड के जाना पहचाना नाम है। खलनायक के रूप में उन्होंने छालीवुड में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। फिल्म मया दे दे मयारू में
निगेटिव किरदार निभाने वाले विजय मेहरा फिल्म मितवा में ऐसी खलनायकी की जिससे लोगो में नायक की नहीं बल्कि खलनायक की ज्यादा चर्चा हुई।

एजाज वारसी - छालीवुड का एक अहम किरदार है एजाज वारसी जिन्होंने कई कलाओं में महारत हासिल की है। वे एक खलनायक के साथ साथ एक निर्देशक और एक एक्टर भी है। वे हिन्दी छत्तीसगढ़ी भोजपुरी और पंजाबी फिल्म में खलनायक का किरदार निभा चुके है। एजाज वारसी के नाम 70 -80 भी ज्यादा फिल्मे है। उनका माने तो खलनायक ही  मुख्य किरदार है।

उपासना वैष्णव - छालीवुड के सबसे सीनियर महिला कलाकार उपासना वैष्णव को आप छत्तीसगढ़ी फिल्मो में दयालू माँ के अलावा क्रूर महिला के रूप में भी देखे होंगे। कई फिल्मो में वे
खलनायिका का रोल निभा चुके हैं। गुरावट , मया जैसी फिल्मो में निगेटिव रोल करने वाली उपासना वैष्णव ने अब तक, करीब 90 फिल्मे कर चुकी है। उपासना फिल्मो में जितनी क्रूर नजर आती है वास्तविक जिंदगी में उतनी ही मिलनसार और अच्छी महिला है।

श्वेता शर्मा - छालीवुड में माँ बहन की भूमिका में नजर आने वाली श्वेता शर्मा कई फिल्मों में खलनायिका की
भूमिका अदा कर चुकी है। हाल ही में बनी फिल्म दबंग देहाती में भी वे खलनायिका के रूप में लोगो को डराती नजर आएंगी। श्वेता भी वास्तविक जिंदगी में बहुत ही मिलनसार महिला है जो बुरे वक्त में लोगो के साथ खड़ी नजर आती है।

उर्वशी साहू - छालीवुड की सबसे तीखी नजर आने वाली महिला उर्वशी साहू छात्तीसगढ़ी फिल्मो की एक अच्छी खलनायिका है। माँ बहन भाभी की भूमिका में जान डालने वाली उर्वशी खलनायिका की भूमिका में
ज्यादा प्रभावी होती हैं। 50 से अधिक फिल्मे कर चुकी उर्वशी साहू को भी निगेटिव रोल ही पसंद है। उनकी आने वाली फिल्म दबंग देहाती है जिसमे वे नायक करण खान की मा की भूमिका में है।

मनोजदीप - छालीवुड के बेस्ट कोरियोग्राफर मनोज दीप मौका मिलने पर सभी प्रकार के किरदार निभा लेते
है। उन्होंने कई फिल्मों में विलेन की भूमिका निभा चुके है।मया 2 में भी उनकी भूमिका निगेटिव है और इस भूमिका में उन्होंने जान डाल दी है। मनोजदीप जितने अच्छे विलेन है उतने ही अच्छे कलाकार और कोरियोग्राफर है। निगेटिव किरदार में बुरे इंसान कहलाने वाले मनोज वास्तविक जिंदगी में एक जिंदादिल इंसान है।

संतोष सारथी -छालीवुड में संतोष सारथी एक ऐसा नाम है जिन्होंने नायक के साथ साथ खलनायक के रूप में अच्छी खासी लोकप्रियता हासिल की है । संतोष सारथी ने 4 फिल्मो में खलनायक की भूमिका निभाई है। वे
छालीवुड के सबसे जल्द लोकप्रिय होने वाले पहले कलाकार है। उनकी कला का लोहा छोटे बड़े सभी मानते है।

छालीवुड परदे के बुरे इंसान

छालीवुड परदे पर ये कलाकार बुरे इंसान के किरदार में नजर आतें हैं पर वास्तविक जिंदगी में उतने ही मिलनसार और अच्छे इंसान होते हैं। खलनायक का पात्र किसी भी फिल्म का मुख्य हिस्सा होता है। खलनायकों के साथ एक विडंबना यह भी होती है, वो अपना काम कितने भी अच्छे से कर जाएं, कभी प्यार नहीं पाते। फिर भी खलनायक बनने की लालसा सबमे होती है। बॉलीवुड में बड़े बड़े नायक भी खलनायक की भूमिका निभा चुके है। आइये हम आपको मिलवाते है छालीवुड के खलनायकों से।

डॉ अजय सहाय - मशहूर मधुमेह व् हृदयरोग विशेषज्ञ होने के साथ साथ छालीवुड के बेस्ट खलनायक भी है। इन्होने अब तक कई दर्जन फिल्मे की है। हिन्दी और भोजपुरी फिल्मो में भी अपनी कला का जादू बिखेर चुके है। आज डॉ अजय सहाय निर्माताओं की पहली पसंद है। वे छोटे बड़े सभी नायकों के साथ काम कर चुके हैं। सन 2014 में वे बेस्ट खलनायक का खिताब हासिल कर चुके है। इसके पहले उन्हें कई अवार्ड मिल चुके हैं।

मनमोहन ठाकुर -  छालीवुड में गिरधारी पांडे के नाम से मशहूर सबसे बड़े खलनायक मनमोहन ठाकुर किसी परिचय का मोहताज नहीं है। वे अब तक 80 से ज्यादा फिल्मो में अपने अभिनय का जादू दिखा चुके हैं। मनमोहन सबसे चर्चित खलनायक हैं। उनकी कला के सब कायल है। हालांकि अब वे नायक की भूमिका में आने लगे है पर उनकी पहचान एक खलनायक के रूप में ही है। कई चार्चित फिल्मों में उनकी टूटी बोलती रही है।

धर्मेन्द्र चौबे - नाजे माने खलनायक धर्मेन्द्र चौबे अब फिल्मो की मांग है। उन्होंने करीब 25 फिल्मे किये है और छालीवुड मे अपनी पहचान बना चुके हैं। हाल ही में रिकार्ड कमाई करने वाली फिल्म राजा छत्तीसगढिय़ा में धर्मेन्द्र चौबे मुख्य खलनायक की भूमिका में है। इस फिल्म ने एक करोड़ को पार किया था। इतना ही नहीं धर्मेन्द्र चौबे  के बुरे इंसान जरूर है पर असल जिंदगी में वे जिंदादिल इंसान और मिलनसार हैं।

कााशी नायक - छालीवुड के खलनायकों में काशी नायक का नाम ना ले तो कहानी अधूरी लगेगी। मया 2 फिल्म अभी थियेटरों में धूममचा रही मचा रही है जिसमे खलनायक काशी नायक ने अमिट छाप छोड़ी है । काशी के कला में दम है। रोबदार आवाज , कुटिल मुस्कान ही उनके अच्छे विलेन होने का सबूत है। काशी ने फिल्म दबंग देहाती में भी मुख्य विलेन का किरदार निभाया है।

पुष्पेन्द्र सिंह - पांच भाषाओं में फिल्म करने वाले पुष्पेन्द्र सिंह बिरले इंसान है। छत्तीसगढ़ी फिल्मो में खलनायक के रूप में यह एक जाना पहचाना नाम है। अब तक 50 छत्तीसगढ़ी फिल्म , 4 भोजपुरी 1 मराठी 2 बुन्देखंडी 3 हिन्दी और 1 उडीयां फिल्म में अपनी भूमिका से सबको प्रभावित किया है। यही नहीं पुष्पेन्द्र सिंह  को कई कलाओं में महारत हासिल है। इन्होने अब बॉलीवुड की ओर रूख कर लिया है फिर भी छालीवुड के लिए वे हमेशा ही उपलब्द्ध रहेंगे ।

विनय अम्बष्ड - एक जानदार खलनायक है जिन्होंने कई फिल्मो में विलेन के किरदार में लोगो का दिल जीता है। सरपंच ,राजा छत्तीसगढिय़ा इनकी मुख्या फिल्म है। थियेटर से छालीवुड में कदम रखने वाले विनय अम्बष्ड में फिल्मो में अपनी कला से सबका दिल जीता है। एक खलनायक के रूप में इनकी पहचान बन गयी है। विनय जी को खलनायकी बहुत पसंद है।

प्रदीप शर्मा - छालीवुड के सीनियर कलाकार प्रदीप शर्मा ने कई फिल्मो में खलनायक की भूमिका में जान डाल दी है। भिलाई थियेटर से फिल्मो में आये श्री शर्मा ने छत्तीसगढ़ी फिल्मो के अलावा हिंदी ,उडिय़ा,और साउथ की फिल्मो में भी काम किया है। अभी हाल ही में वे हिलण्डी फिल्म आशिक आवारा करके वापस छत्तीसगढ़ लौटे है। विलेन के साथ साथ वे तमाम हीरो हीरोइन के पिता की भूमिका में नजर आ चुके हैं।

बलराज पाठक -मयारू भौजी में आपने तीखे ओर कड़क इंसान को देखा होगा। वे कोई और नहीं बलराज पाठक ही है। पाठक जी ने कई छालीवुड की फिल्मों में खलनायक का किरदार निभाकर लोगो के दिलों में अपनी जगह बनाई है। उन्हें खलनायकी ही पसंद है। वे कहते हैं की विलेन ही फिल्म का में किरदार होता है। विलेन ना हो तो फिल्म बेजान होटा है।

विजय मेहरा - छत्तीसगढ़ फिल्म मितवा के दाऊ जी यानी विजय मेहरा आज छालीवुड के जाना पहचाना नाम है। खलनायक के रूप में उन्होंने छालीवुड में अपनी छाप छोड़ी है। फिल्म मया दे दे मयारू में निगेटिव किरदार निभाने वाले विजय मेहरा फिल्म मितवा में ऐसी खलनायकी की जिससे लोगो में नायक की  खलनायक की ज्यादा चर्चा हुई।

एजाज वारसी - छालीवुड का एक अहम किरदार है एजाज वारसी जिन्होंने कई कलाओं में महारत हासिल की है। वे एक खलनायक के साथ साथ एक निर्देशक और एक एक्टर भी है। वे हिन्दी छत्तीसगढ़ी भोजपुरी और पंजाबी फिल्म में खलनायक का किरदार निभा चुके है। एजाज वारसी के नाम 70 -80 भी ज्यादा फिल्मे है। उनका माने तो खलनायक ही  मुख्य किरदार है।

उपासना वैष्णव - छालीवुड के सबसे सीनियर महिला कलाकार उपासना वैष्णव को आप छत्तीसगढ़ी फिल्मो में दयालू माँ के अलावा क्रूर महिला के रूप में भी देखे होंगे। कई फिल्मो में वे खलनायिका का रोल निभा चुके हैं। गुरावट , मया जैसी फिल्मो में निगेटिव रोल करने वाली उपासना वैष्णव ने अब तक, करीब 90 फिल्मे कर चुकी है। उपासना फिल्मो में जितनी क्रूर नजर आती है वास्तविक जिंदगी में उतनी ही मिलनसार और अच्छी महिला है।

श्वेता शर्मा - छालीवुड में माँ बहन की भूमिका में नजर आने वाली श्वेता शर्मा कई फिल्मों में खलनायिका की भूमिका अदा कर चुकी है। हाल ही में बनी फिल्म दबंग देहाती में भी वे खलनायिका के रूप में लोगो को डराती नजर आएंगी। श्वेता भी वास्तविक जिंदगी में बहुत ही मिलनसार महिला है जो बुरे वक्त में लोगो के साथ खड़ी नजर आती है।

उर्वशी साहू - छालीवुड की सबसे तीखी नजर आने वाली महिला उर्वशी साहू छात्तीसगढ़ी फिल्मो की एक अच्छी खलनायिका है। माँ बहन भाभी की भूमिका में जान डालने वाली उर्वशी खलनायिका की भूमिका में ज्यादा प्रभावी होती हैं। 50 से अधिक फिल्मे कर चुकी उर्वशी साहू को भी निगेटिव रोल ही पसंद है। उनकी आने वाली फिल्म दबंग देहाती है जिसमे वे नायक करण खान की मा की भूमिका में है।

मनोजदीप - छालीवुड के बेस्ट कोरियोग्राफर मनोज दीप मौका मिलने पर सभी प्रकार के किरदार निभा लेते है। उन्होंने कई फिल्मों में विलेन की भूमिका निभा चुके है।मया 2 में भी उनकी भूमिका निगेटिव है और इस भूमिका में उन्होंने जान डाल दी है। मनोजदीप जितने अच्छे विलेन है उतने ही अच्छे कलाकार और कोरियोग्राफर है। निगेटिव किरदार में बुरे इंसान कहलाने वाले मनोज वास्तविक जिंदगी में एक जिंदादिल इंसान है।

संतोष सारथी
छालीवुड में संतोष सारथी एक ऐसा नाम है जिन्होंने नायक के साथ साथ खलनायक के रूप में अच्छी खासी लोकप्रियता हासिल की है । संतोष सारथी ने 4 फिल्मो में खलनायक की भूमिका निभाई है। वे छालीवुड के सबसे जल्द लोकप्रिय होने वाले पहले कलाकार है। उनकी कला का लोहा छोटे बड़े सभी मानते है।

शनिवार, 26 दिसंबर 2015

एंकरिंग से नायिका बनी मंदिरा

शाहरुख के साथ काम कर सके , उस लायक बनने की है तमन्ना
छालीवुड में एंकरिंग से फिल्मो में कदम रखने वाली नायिका मंदिरा नायक की तमन्ना शाहरुख के साथ काम करने लायक बनने की है। साथ ही वे फिटनेस के लिए लोगो को जागरूक करना चाहती है। मंदिरा छालीवुड में सभी प्रकार की भूमिका निभाना चाहती है ताकि उन्हें कटु अनुभव हो जाए। वे कहती है कि छत्तीसगढ़ी फिल्मो में गुणवत्ता हो तो जरूर थियेटरों में चलेगी। मंदिरा दैनिक सन स्टार के दफ्तर आई तो हमने उनसे हर पहलुओं पर बात की।
0 आपको एक्टिंग का शौक कब से है ?
00 मुझे एक्टिंग का शौक बचपन से ही रहा है। स्कूल में नाटकों में भाग लिया करती थी फिर नाटकों में किया। जब जब टीवी देखता था तब तब मुझे लगता था कि मुझे भी कुछ बनना चाहिए ।
0 छालीवुड की क्या सम्भावनाये है?
00 बेहतर है। आने वाले समय में यहां की फिल्मे बॉलीवुड की तरह ही चलेंगी।यहां फिलहाल दर्शकों की कमी है। लोगो में अपनी भाषा के प्रति वो रूचि नहीं है जो होनी चाहिए । थियेटरों  की कमी को सरकार पूरा करे।
0 तो छालीवुड की फिल्मे दर्शकों को क्यों नहीं खीच पा रही है?
00 क्योकि यहां की फिल्मो में बहुत सारी कमियां होती है। फिल्मो में वो गुणवत्ता नहीं होती जो यहां के लोगो को चाहिए। प्रोड्यूसरों को इस और ध्यान देने की जरुरत है।
0 फिर मौका कैसे मिला और आपके प्रेरणाश्रोत कौन है ?
00 मेरा कोई रोल मॉडल नहीं है। नाटकों में भाग लेने के बाद लोगो ने मेरा अभिनय देखा और फिल्मो में मौका दिया। माँ कुंती नायक ही मेरे प्रेरणाश्रोत है जो हर पल मेरे साथ होती है।
0 कभी आपने सोचा था की फिल्मो को ही अपना कॅरियर बनाएंगे ?
00 हाँ ! शुरू से ही मै एक्टिंग को कॅरियर बनाने की सोचकर चली हूँ। अब इसी लाईन पर काम करती  रहूंगी।
0  छालीवुड फिल्मो में आपको कैसी भूमिका पसंद है या आप कैसे रोल चाहेंगे।
00  मैं हर तरह की भूमिका निभाना चाहूंगी  , लेकिन निगेटिव रोल पसंद है।
0 सरकार से आपको क्या अपेक्षाएं हैं?
00 सरकार छालीवुड की मदद करे। टाकीज बनवाए, नियम बनाये। छत्तीसगढ़ी फिल्मो को सब्सिडी दें ताकि कलाकारों को भी अच्छी मेहनताना मिल सके।
0 आप इतने फिट कैसे हो पाई। राज क्या है?
00 मैंने हेल्थ को लेकर बहुत मेहनत की है। अपना काफी वजन कम किया है। अब फिटनेस के लिए लोगो को अभियान चलाकर जागरूक करूंगी। 
0 आपका कोई सपना है जो आप पूरा होते देखना चाहती हैं?
00 छालीवुड में कुछ करके दिखाना चाहती हूँ। शाहरुख खान के साथ काम करने की तमन्ना है। इस लायक बन सकूँ यही मेरी इच्छा है।

गुरुवार, 24 दिसंबर 2015

गॉडफादर जैसे रोल का मुझे इन्तजार है

मैं बार बार टूटता हूँ और सम्हालता हूँ: पुष्पेन्द्र सिंह 
छत्तीसगढ़ के जाने माने स्टार पुष्पेन्द्र सिंह में खूबियों का खजाना है। वे एक अच्छे कलाकार है तो उतने ही
अच्छे निर्माता निर्देशक और लेखक भी हैं। उन्हें अपने काम के प्रति जूनून है। उनका कहना है कि - कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती , लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती। उनका सपना गॉडफादर जैसे रोल करने की है, जो किसी के जीवन पर आधारित हो। पुष्पेन्द्र सिंह मुम्बई में भी अपनी कला का लोहा मनवा रहे हैं। उन्होंने सीरियलों में 100 से ज्यादा एपिशोड कर चुके हैं। उनसे हमने हर पहलूओं पर बेबाक बात की है।
० छत्तीसगढ़ी फिल्मो की क्या संभावनाएं हैं?
०० जब तक टेक्नीकल क्षेत्र में एक्सपर्ट लोग नहीं होंगे तब तक ऐसी ही कमजोर फिल्मे बनती रहेंगी। यहां जिसे जो नहीं आता वही करते हैं । गायक निर्देशक बन जाता है। कोई भी फाइट मास्टर बन जाता है। कोई प्लानिंग नहीं होती जो पैसा नहीं लेते वही कलाकार यहाँ चलते है। तो आप अंदाज लगा ले कैसी फिल्मे बनेंगी। ० छत्तीसगढ़ी सिनेमा अच्छा व्यवसाय करे इसके लिए क्या कर सकते हैं?
०० यहां फिल्मे कमजोर बन रही है । फिल्मे नहीं चल पाती इसकी वजह भी हैं और वो सब जानते हैं कि पिछड़े हुए राज्य में टॉकीजों का विकास नहीं होना। छत्तीसगढ़ में मिनी सिनेमाघर दो सौ दर्शकों की क्षमता वाली टॉकिजों की बड़ी आवश्यकता है जहां छत्तीगसढ़ी फिल्मों के दर्शक आसानी से पहुंच सके। प्रचार प्रसार की कमी है। सिर्फ रायपुर में प्रचार के लिए पांच लाख चाहिए जो निर्माता नहीं करते।
० आप इस क्षेत्र में कैसे आये ?
०० मै थियेटर से आया हूँ। सलमा सुलतान की धारावाहिक सुनो कहानी में मुझे मौका मिला फिर मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। मैंने भारतभूषण के साथ काम किया है।
० फिल्मो की और रुझान कैसे हुआ?
०० मेरी कला मेरे पिताजी की देंन है। कृष्ण बनाकर मुझे खड़ा कर दिए थे वही  प्रेरणाश्रोत है। आगे बढ़ने में मेरी पत्नी का भी बहुत सहयोग है। जिसके कारण मैं कलाकार हूँ ।
० आपने बहुत सी फिल्मे कर ली आपकी राह कैसे आसान हुआ?
०० मै बार बार टूटता हूँ ,बार बार सम्हालता हूँ । मुझे ढर्रे पर जीना नहीं आता। यहां आलोचना करने वाले तो बहुत मिल जाएंगे पर साथ देने वाले नहीं। कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होप्ती , लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती। बस मै यही जानता हूँ।
० छत्तीसगढ़ी फिल्मो के प्रदर्शन में कमी कहाँ होती है?
०० प्रचार प्रसार और विज्ञापन में कमी फिल्म नहीं चलने का सबसे बड़ा कारण है। थियेटर भी एक कारण हो सकता है। गाँव गाँव तक हम अपनी फिल्म नहीं पंहुचा पा रहे हैं। बेहतर प्रचार पसार हो और प्रदेश के सभी टाकीजों में फिल्म लग जाए तो लागत एक हप्ते में निकल आएगी। सरकार मदद नहीं करती और डिस्ट्रीब्यूशन भी सही नहीं है।
० क्या छत्तीसगढ़ में नायिकाओं की कमी है कि बाहर से लाना पड़ता है?
०० हाँ जरूर है। लडकिया बहुत है पर अच्छे घरों की लडकियां इस फिल्ड में आना नहीं चाहती क्योकि उन्हें वो सम्मान नहीं मिलता जो वो चाहतीं हैं। इसलिए कमी बनी हुई है।
० आपकी भविष्य की क्या योजना है?
०० मै साल में दो ही काम करूंगा पर अच्छा करूंगा। मैंने अपना ग्रुप तैयार किया है एसपी इंटरटेनमेंट के बैनर पर हमने काम शुरू किया है। इस क्षेत्र में काम करते रहेंगे।
० आपने सभी प्रकार की भूमिका का निर्वहन किया है वैसे आपको कैसा रोल पसंद है?
०० मुझे आज तक पसंद का रोल नहीं मिला। साइलेंट करेक्टर चाहिए ,पता नहीं कभी मिल पायेगा या नही।
० रील और रियल लाइफ में क्या अंतर पाते है?
०० बहुत अंतर है। रियाल लाइफ की घटना को रील लाइफ में ला सकते हैं पर रील को रियल में नहीं ला सकते।
० ऐसा कोई सपना जिसे आप पूरा होते हुए देखना चाहते हैं?
०० गॉडफादर जैसे रोल करने की तमन्ना है, जो किसी के जीवन पर आधारित हो। जैसे महात्मा गांधी। 

बुधवार, 23 दिसंबर 2015

छत्तीसगढ़ी फिल्मे एक नज़र में

रंगीन फिल्मों में 
((1) कही देबे सन्देश (2) घर द्वार (3) मोर छइयां भुइयां (4) मया देदे, मया ले ले (5) मयारू भौजी (6) अंगना (7) छत्तीसगढ़ महतारी (8) कारी (9) तुलसी चौरा (10) झन भुलव मां बाप ला (11) मया (12) टूरा रिक्शावाला (13) लैला टिपटॉप, छैला अंगूठा छाप (14) भांवर (15) मया देदे मयारू (16) परदेशी के मया (17) मया (18) अब्बड़ मया करथंव (19) माटी के लाल (20) बैरी के मया (21) बिदाई (22) जय महामाया (23) बंधना (24) भकला (25) तीजा के लुगरा (26) गजब दिन भइगे (27) मिस्टर टेटकूराम (28) महूं दीवाना, तहूं दीवानी (29) हीरो न. 1 (30) टूरी न. 1 (31) लेडग़ा नं. 1 (32) छत्तीसगढिय़ा सबले बढिय़ा (33) मितान 420 (34) गुरांवट (35) अब मोर पारी हे (36) ऐ मोर बांटा (37) बैर (38) भुइयां के भगवान (39) घर द्वार (नई) (40) तरी हरी ना ना (41) दिल तोर दीवाना हे (42) कंगला होगिस मालामाल (43) किसान-मितान (44) संगवारी (45) मया के बरखा (46) मोंगरा (47) मोर धरती मईया (48) मोर गांव (49) मोर संग चलव (50) मोर गंवई गांव (51) मोर संग चल मितवा (52) मोर सपना के राजा (53) नैना (54) परशुराम (55) प्रीत के जंग (56) रघुबीर (57) तोर आंचल के छइयां तले (58) तोर मयां के मारे (59) तोर मया म जादू हे (60) तोर संग जीना संगी, तोर संग मरना (61) मोहनी (62) सजना मोर (63) किस्मत के खेल (64) मोर करम मोर धरम (65) अजब जिनगी गजब जिनगी (66) भोला अऊ शंकर (67) पहुना (68) मया के डोरी (69) बईरी सजन (70) दुल्हिन बना के ले जा (71) मोर दुलरवा (72) टूरा अनाड़ी तभो खिलाड़ी (73) जरत हे जिया मोर (74) गुरु बाबा घासीदास (75) गौना (76) डांड (77) पठौनी के चक्कर (78) गुहार रामराज के (79) अनाड़ी संगवारी (80) मया के बंधना (81) सीता (82) मया हो गे रे । 83 राजा छत्तीसगढिय़ा 84 . माटी मोर मितान , 85 महतारी के बँटवारा  86 .एक अउ अर्जुन 87 . सिधवा सजन , 88 तोर खातिर , 89 .राम बनाही जोड़ी 90 छलिया, 91 असली संगवारी (९२) जय बम्लेश्वरी मइया (९३) भोला छत्तीसगढिय़ा (९४) सरपंच (95 ) दू लफाड़ू (96) गदर मताही (९७) कका (98 ) मोहि डारे रे (99) गोलमाल (100) परेम के जीत (101) सलाम छत्तीसगढ़ (102 ) महतारी(103 ) मया के धरांैदा (104 ) तोला ले जाहू उढ़रिया (105 ) सोन चिरैय्या (106 ) ढाई

डब फि़ल्में 
95 लोरिक चंदा, 96 मन के बंधना,97 मया मा फूल मया मा कांटे, 98 माटी मोर म?हतारी,99 पुन्?नी के चंदा, 100 सीता, 101 संग म जीबो संग म मरबो, 102 मोर सैंया 10३ अनाड़ी संगवारी, १०४चंदन बाबू, १०५ हर हर महादेव, १०६ लेडग़ा ममा

अप्रदर्शित फिल्मों में
प्रदर्शित फिल्मों की सूची के साथ ही निर्माणाधीन अप्रदर्शित फिल्मों में (1) दू लफाड़ू (2) गदर मताही (3) कका (4) मोहि डारे रे (5) गोलमाल (6) परेम के जीत (7) सलाम छत्तीसगढ़ (8) जागो रे (9) संगी रे (10) महतारी (11) धुरंधर (12) किरिया (13)  बेर्रा (14) मया के धरांैदा (15) नचकारिन (16) छैला (17) ढाई (18) मेहंदी तोर नाम की (19) तोला ले जाहू उढ़रिया (20) सोन चिरैय्या (21) मया के मंदिर (22) मया के सौगंध (23) फुलकुंवर (24) नागिन के मया (25)अंजोर  (26) कोयला  ,(27 ) धरती पुत्र   (28)चक्कर गुरूजी के ,  (29) दबंग देहाती