गुरुवार, 9 मई 2019

नकुल महालवार , नाम एक कला अनेक

 रंगमंच से फिल्मो तक सफर,,,......
नायक ,खलनायक ,लेखक ,निर्माता ,निर्देशक साहित्यकार, कवि, रंगकर्मी, पटकथा जैसे अनेक कला किसी एक व्यक्ति में हो ऐसे बिरले ही होते है और यह सब कला है नकुल महालवार में। छत्तीसगढ़ी फिल्मो का वे एक आधार स्तम्भ है।
रंगमंच से अपने कॅरियर की शुरुआत करने वाले नकुल महालवार ने फि़ल्मी दुनिया में एक ऊंची मुकाम हासिल कर लिया है. कला सेवा करते 35 साल बीत जाने के बाद भी नकुल काफी दुखी है. वे कहते हैं कि यहां आज उचित सम्मान का अभाव है, लेकिन मै मरते दम तक कला के लिए समर्पित रहूंगा। 1984 में रामलीला में बाल कलाकार के रूप में मंच में प्रवेश किया था और आज छत्तीसगढ़ का जाना माना नाम है. फिल्म डाँड़ में नायक की भूमिका में थे. उन्होंने बताया कि 2001 में डिजिटल फि़ल्म, डाँड़ का  निर्माण किया ,जिसे सेंसर बोर्ड ने इसलिए सेंसर नही दिया कि इस फार्मेट में अब तक कोई डिजिटल फीचर फिल्म सेंसर नही हुआ था, वहाँ मुझे
बताया गया कि इस फार्मेट की फि़ल्म  पहली बार आई है तब मुझे  मालूम हुआ कि यह डिजिटल की पहली फि़ल्म है. इस फि़ल्म उन्हें बतौर नायक  सराहना मिली। 1987 में आदर्श नाट्य मंच का निर्माण कर नुक्कड़ नाटकों सहित मंचीय प्रस्तुति करने लगे। दूरदर्शन , लघु फि़ल्म व अखिल भारतीय नाट्य  स्पर्धा में हिस्सेदारी निभाई। 1990 में  फि़ल्म व रंगमंच अभिनेता ओमशिवपुरी अवार्ड से सम्मानित हुए. 1991 में वीडियो फीचर फिल्म मैना में असिस्टेंट डायरेक्टर व सह नायक के रूप में काम किया। लगातार मंच व दूरदर्शन के  सीरियल में भूमिका करने के बाद लेखन में भी नकुल महालवार दक्ष होता गया. 1997 में  फि़ल्म, महादान  का निर्माण सुपर वीएचएस फार्मेट में किया। फिर लघु कॉमेडी फिल्म - बिहाब देवदास के में उन्हें में बेस्ट राइटर का अवार्ड मिला। उन्होंने बताया कि फिल्म डाँड़ में मुझे बेस्ट एक्टर का भी खिताब मिला। अब वे फिल्मो में कम दिखाई देते हैं पूछे जाने पर उनका कहना है कि जब मुझे लगा कि फि़ल्म में स्कोप नही है, तो मैने लोकमंच को अपनी साधना बना लिया और सुर सांझा के साथ ,लोक मंच में भी अपना उदबोधन करता करता गया.  
इन फिल्मों में निभाई भूमिका
डाँड़, बिहाब देवदास के, खेतीखार, भूल झन देबे, संगवारी सतनाम के, छालीवुड देवदास, चुनाव तिहार, कारी छइयां, सजना साथ निभाबे, भेद, दबंग दरोगा,
अतरंगी। 

फिल्म विकास निगम के अगले अध्यक्ष होंगे पुष्पेंद्र सिंह?

छालीवुड और कांग्रेस के प्रति समर्पण से सरकार खुश
रायपुर। छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम के अगले अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह ही होंगे, हालांकि उन्होंने कभी सरकार से पद की मांग नहीं की है लेकिन सरकार में बैठे लोगों को पुष्पेंद्र सिंह ही सबसे योग्य और काबिल दिखाई दे रहे हैं. इसके पीछे मजबूत कारण भी है. उन्होंने छालीवुड, छत्तीसगढ़ की संस्कृति और छत्तीसगढ़ी फिल्मों के लिए बहुत कुछ किया है. वे एक अच्छे अभिनेता है तो सर्वश्रेष्ठ निर्देशक भी है. पुष्पेंद्र सिंह ने भोपाल और मुम्बई में रहकर सिनेमा जगत को काफी करीब से देखा और जाना है. यहां उन्होंने कई सीरियलों में भी काम किया है. वे थियेटर के बेहतर कलाकार है. पुष्पेंद्र सिंह का अध्यक्ष पद की दौड़ में मजबूत होने का सबसे बड़ा कारण है कांग्रेस के प्रति समर्पित होना। उन्होंने विधानसभा और लोकसभा चुनाव में अपना सब काम छोड़कर प्रचार में अपना पूरा समय लगा दिया था. इसका इनाम भी पार्टी ने उन्हें दिया है. सांस्कृतिक प्रकोष्ठ का प्रदेश महासचिव का दायित्व सौंप दिया। कांग्रेस के एक बड़े नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि पुष्पेंद्र सिंह से बेहतर फिल्म विकास निगम का अध्यक्ष और कोइ नहीं हो सकता। उन्होंने पार्टी के लिए काम भी किया है और उन्हें छालीवुड का बेहतर ज्ञान भी है. वे फिल्म विकास निगम को काफी आगे ले जाने की क्षमता रखतें हैं. छालीवुड को क्या चाहिए क्या नहीं वे अच्छे से जानते हैं. कुल मिलाकर सरकार में बैठे लोगो ने  फिल्म विकास निगम की कमान पुष्पेंद्र सिंह को सौपने का मन बना लिया है.

"आई लव यू टू " की ममतामयी माँ संजू साहू

एक बेहतरीन अदाकारा
- श्रीमती केशर सोनकर
छालीवुड में संजू साहू एक बड़ा नाम है, जिसने भी फिल्म छइयां भुईंया देखी होगी उनकी अदाकारी का लोहा जरूर माना होगा। उन्होंने 16 साल की उम्र में अपनी फि़ल्मी कॅरियर की शुरुआत ही माँ की भूमिका से की थी. बाद में वे नायिका बनी, फिर चरित्र अभिनेत्री का किरदार निभाया। अभी हाल ही बनी सुंदरानी प्रोडक्शन हाउस
की फिल्म "आई लव यू टू" में एक बार फिर ममतामयी माँ की भूमिका में नजर आएंगी। पूरी फिल्म में संजू साहू एक माँ के रूप में अपनी बेटी किरण ( बचपण में सान्वी, फिर मुस्कान साहू) पर प्यार लुटाती दिखेंगी। इसी फिल्म के सेट पर हमारी मुलाक़ात संजू साहू से हुई तो उन्होंने बताया कि  "आई लव यू टू" में माँ की भूमिका निभाकर उन्होंने गर्व महसूस किया है.मैंने माँ की भूमिका को सच में जिया है.अपने आप को किरण की माँ के रूप में ढाल लिया था.यह फिल्म बहुत ही उम्दा बनी है. मुझे इसमें काम करके बहुत ही अच्छा लगा. मै चाहूंगी की सुंदरानी प्रोडक्शन से हमेशा जुडी रहूं , यह मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी। सुंदरानी प्रोडक्शन की अगली फिल्म कचरा बोदरा में संजू साहू एक नए अंदाज में दिखेंगी। इस फिल्म में वे खलनायकी करती नजर आएंगी। वे कहती है कि मुझे हर तरह की भूमिका पसंद है और कचरा बोदरा में मैं निगेटिव किरदार भी निभाऊँगी। संजू साहू ने अपनी मेहनत और लगन से छालीवुड में अपना अलग नाम बनाया है, और वे छत्तीसगढ़ की मशहूर हस्तियों में चर्चित और आर्कषक सेलिब्रिटी हैं। वे बचपन से ही कला में रुचि रखती रहीं हैं यही कारण है कि वे फिल्मों में आ गईं। उन्हें जनता का भी खूब प्यार मिला है, और इसी के बदौलत उनका नाम आज अच्छी अभिनेत्रियों में शुमार है। आज उनके प्रशंसकों की संख्या हजारों में है। संजू फिल्मों में अभिनय के अलावा वे स्टेज परफॉर्मर भी हैं। ये अपने काम के अलावा कई तरह के सोशल वर्क पर भी ध्यान देती हैं। उनकी संस्था कोपल क्रिएटिव ने एक दो नहीं बल्कि सैकड़ों नए कलाकारों को मंच प्रदान किया हैं.

फिल्म महुँ कुंवारा तहँ कुंवारी

 कॉमेडी, एक्शन, रोमांस के साथ सशक्त संदेश देता है
 फिल्म समीक्षा - अरुण बंछोर
एक के बाद एक हिट फिल्मों की लाइन लगा देने वाले मनोज वर्मा की सबसे कसी हुई फिल्म है महुँ कुंवारा तहँ कुंवारी । इसका एक-एक सीन किसी बॉलीवुड फिल्म से कम नहीं है। कमर्शियल जोन में एंटरटेनर फिल्म बनाना सबसे मुश्किल काम होता है। कमर्शियल फिल्म का फॉर्मूला साफ है, एक नायक होता है जो सुपर हीरो होता है, एक नायिका होती है जो हीरो के साथ गाने गाती है और एक खलनायक होता है जिस पर जीत हासिल करके हीरो हीरो बनता है। लेकिन इस फॉर्मूले पर भी लगातार नयापन देते हुए मनोरंजक फिल्म बनाना एक बहुत मुश्किल काम है लेकिन मनोज वर्मा ने यह कर दिखाया है. दो हीरो को लेकर एक ऐसी फिल्म बनाई है जो शुरू से अंत तक दर्शकों को बोर नहीं होने देती। सन्देश है कुंवारा लोगों को जो समस्याएं जीवन में आती है उसका नजारा। कॉमेडी के माध्यम से सारी समस्याएं कहती है फिल्म और समस्याओं का हल करने के लिए तिकड़मबाजी जो दिखाया गया है वह काबिलेतारीफ है. भूमिका निभाने में आकाश सोनी सब पर भारी है. लड़की के किरदार को जीने का अंदाज भी शानदार है. महुँ कुंवारा तहँ कुंवारी की कहानी में भले ही नयापन ना हो मगर एक अलग ट्रीटमेंट के साथ मनोज वर्मा ने पूरी तरह मनोरंजक फिल्म बनाई है। फिल्म के एक-एक फ्रेम पर उनकी पकड़ साफ नजर आती है। फिल्म की भव्यता के लिए जाने जाने वाले मनोज वर्मा ने इस फिल्म को भी भव्यता की चरम पर लाकर खड़ा किया है।
फिल्म देती है सशक्त संदेश
फिल्म में कॉमेडी है, एक्शन है, रोमांस है और साथ ही साथ एक सशक्त संदेश भी है। अभिनय की बात करें तो एक कदम आगे जाते आकाश को स्क्रीन पर देखते ही बनता हैद्य वह इमोशन हो या फिर कॉमेडी एक्शन आकाश हर पहलू पर 100 प्रतिशत खरे उतरते हैं। उनके इस यादगार परफॉर्मेंस से एक बात तय हो गई कि महुँ कुंवारा तहँ कुंवारी का सफर यहां नहीं रुकेगा। एल्सा घोष छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक नायाब तोहफा बनकर आई हैं जिसे उन्होंने इस फिल्म से साबित कर दिया है। निशांत उपाध्याय एक अलग अंदाज में नजर आते हैं। उनको देखकर एहसास होता है यह पात्र सचमुच इतना खतरनाक हो सकता है,साथ ही उतना ही मानवीय भी। पुष्पेंद्र सिंह ने भी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। टेक्सी ड्रायवर बने संजय महानंद अपने किरदार को एक अलग स्तर पर ले जाते हैं। उनके एक्शन डायलॉग डिलवरी सब कुछ बेहतर है. संजय सिद्ध करता है कि वो सच में एक सुलझे हुए कलाकार हैं. माहिरा खान अनुराधा दुबे , सरला सेन , देवेंद्र पांडे समेत बाकी सभी कलाकारों ने अपने अपने किरदारों में जान फूंकी है। कमर्शियल सिनेमा के रग रग से वाकिफ हो चुके मनोज वर्मा ने नए कलाकारों की एंट्री करा कर एक्स्ट्रा तालियों और सीटियों का इंतजाम कर लिया। नए अभिनेता आकाश को देख कर आप खुद को सीटी बजाने से नहीं रोक पाएंगे। संगीतकारों ने शानदार संगीत दिया है। सिनेमैटोग्राफी फिल्म को ना सिर्फ भव्य बनाती है बल्कि मंत्रमुग्ध कर देती है। कुल मिलाकर महुँ कुंवारा तहँ कुंवारी एक बेहतरीन मनोरंजक फिल्म है जिसका आनंद आप सपरिवार उठा सकते हैं। कहानी हम नहीं बता रहे हैं इसके लिए आपको सिनेमाघरों तक जाना होगा। बस इतना कह सकतें हैं की फिल्म एक बार नहीं बार बार देखने लायक है.

कचरा - बोदरा में होंगी मुस्कान और गुलशन साहू की जोडी

- अरुण कुमार बंछोर
रायपुर। सुंदरानी प्रोडक्शन हाउस की नई फिल्म कचरा - बोदरा के लिए अभिनेत्री मुस्कान साहू के बाद अभिनेता के लिए गुलशन साहू को साईंन किया गया है.छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध कलाकार उपासना वैष्णव ,

उर्वशी साहू व छत्तीसगढ़ी फिल्मों के आलराउंडर कलाकार प्रदीप शर्मा इस फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आएंगे। इस फिल्म में कई नए कलाकारों को छालीवुड के भीष्म पितामह मोहन सुंदरानी ने अभिनय का मौका देने जा रहे हैं।  इस फिल्म की शूटिंग रायपुर एवं उसके आसपास ग्रामीण अंचलों में प्रारंभ होगी। स्क्रिप्ट , कहानी गीत एवं संगीत का लगभग कार्य पूरा हो चुका है। फिल्म के निर्देशक उत्तम तिवारी ही होंगे जिन्होंने सुंदरानी प्रोडक्शन हाउस की दो फि़ल्में आई लव यू और आई लव यू 2 का भी निर्देशन किया है। इस फिल्म के लिए 12 और कलाकारों का महत्वपूर्ण अभिनय के लिए चयन करना बाकी है.

बॉलीवुड की तरह अब टकराएंगे छालीवुड की फि़ल्में

एक साथ कई फिल्मे होंगी रिलीज
छालीवुड भी अब बॉलीवुड की राह पर है. फि़ल्में इतनी बनने लगी है जितना छत्तीसगढ़ में थियेटर नहीं है. यही कारण है कि अब यहां की फि़ल्में भी आपस में टकराएंगे। 2018 में 32 फिल्मे बनी और मात्रा 14 फि़ल्में ही
रिलीज हो पाई. इस साल एक ही तारीख पर कई फिल्मे रिलीज करने का ऐलान किया गया है. यह अलग बात है कि फिल्म को टाकीज ना मिले। 26 अप्रैल को महुँ कुंवारा तहूँ कुंवारी एक साथ 22 टाकीजों में लगेगी। 16 जून को दो फिल्मे हंस झन पगली फंस जाबे और राजा भैया एक आवारा रिलीज होने जा रही है. हंस झन पगली फंस जाबे के नायक मन कुरैशी है तो राजा भैया एक आवारा के नायक अनुज शर्मा है. यही नहीं 19 जुलाई को तो तीन फिल्मे रिलीज करने का ऐलान निर्माताओं ने किया है. निर्माता अशोक तिवारी की रंगोबती , अखिलेश मिश्रा की असली कलाकार और तीसरी फिल्म है माधो बैंड वाला। रंगोबती और  माधो बैंड वाला ने तो टाकीज भी बुक कर लिया है. जुलाई में इन तीन फिल्मो के बाद निर्माता मोहन सुंदरानी ने अपनी फिल्म आई लव यू 2 अगस्त में और कचरा बोदरा नवंबर में लाने का ऐलान कर दिया है.

साल 2019 छत्तीसगढ़ी फिल्मो के लिए रहेगा बेहद खास।

यू तो छत्तीसगढ़ी फिल्मे और उनके कलाकारों का संघर्ष बहुत लंबा रहा है, छत्तीसगढ़ के निर्माता, निर्देशक, कलाकार सभी शुरुआत से ही बहुत संघर्ष के दौर से गुजर रहे है, और अपनी मांगों को लेकर भी सरकार से काफी लंबे समय से संघर्ष कर रहे है, बरहाल 2018 में नई सरकार ने छत्तीसगढ़ की बागडोर सम्भाली है, अब फिल्मो से जुड़े लोगों की उम्मीद एक बार फिर जोर पकड़ती नजऱ आ रही है, ये समय ही तय करेगा कि सरकार इस दिशा में उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है। हम बात कर रहे है संघर्ष भरे छत्तीसगढ़ी फिल्मो की, निश्चित तौर पर वर्ष 2019 छत्तीसगढ़ी फिल्मो के लिए एक अहम साल गुजरने वाला है, एक तरफ नई सरकार से ढेरो उम्मीदे है, दूसरी तरफ लंबे समय के अंतराल के बाद छत्तीसगढ़ी फिल्मो के तीन दिग्गज निर्देशकों की फिल्में भी वर्ष 2019 में रुपहले पर्दे पर आएगी। पहले बात करते है सतीश जैन जी की जिन्होंने छत्तीसगढ़ी फि़ल्म इंडस्ट्री में ऑक्सीजन भरने का काम किया है , जिनकी पिछली सारी फिल्में हिट रही, पर फिर वो भोजपुरी फि़ल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हो गए और अब 8 साल के बाद उन्होंने फिर से छत्तीसगढ़ी फि़ल्म का निर्देशन किया है प्तहस झन पगली मया हो जाहिप्त ये फि़ल्म वर्ष 2019 में रिलीज़ होनी है। बात करे प्रेम चंद्राकर जी की, वो भी लंबे समय के बाद अपनी बहुप्रतीक्षित फि़ल्म लेकर आ रहे है प्तलोरी के चंदाप्त जिसकी शूटिंग खत्म हो चुकी है।
मनोज वर्मा भी एक नाम है इस इंडस्ट्री में जिन्होंने छत्तीसगढ़ को हिट फिल्में दी है, हाल ही में उनकी फिल्म प्तभूलनप्त को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचो काफी तारीफ मिली और पुरुस्कार भी जीत चुकी है वे भी अभी जोर शोर से अपनी नई फिल्म की शूटिंग में व्यस्त है प्ततहू कुँवारा महू कुँवारीप्त ये फि़ल्म भी वर्ष 2019 में आएगी। इस तरह तीन बड़े निर्देशक एक साथ 2019 मे अपनी अपनी फिल्मे लेकर आ रहे है ये निश्चित ही छत्तीसगढ़ी फिल्मो के लिए अच्छी सूचना है।दूसरी ओर नए और पुराने निर्माता भी वर्ष 2019 में अपनी फिल्मे लेकर आ रहे है ।बात करे मोहन सुंदरानी जी की 2018 की उनकी हिट फिल्म प्तद्ब द्यश1द्ग ङ्घशह्वप्त का सीक्वल लेकर आने वाले है। मोहित साहू नये निर्माताओं में बहुत बड़ा नाम है 2019 वो भी 3 नये फि़ल्म ला रहे है प्तभोकवा 2प्त प्तद्यश1द्ग दिवानाप्त और मोर जोड़ीदार 2प्त ये तीनो फिल्मे भी 2019 में आयंगी। नए निर्माताओं में नटराज बंझोर भी प्तप्रेम रंगप्त लेकर आ रहे है।इस तरह और भी 15 – 20 फिल्मे नए , पुराने निर्माता लेकर आ रहे है। साथ ही वर्ष 2019 में बहुत सारे नए कलाकार निर्माता, निर्देशक भी इंडस्ट्री को मिलने जा रहे है। अब देखना ये है कि वर्ष 2019 छत्तीसगढ़ी फिल्मो के लिए कैसा बीतता है जो निश्चित तौर पे छत्तीसगढ़ी फिल्मो की दिशा और दशा तय करेगा।